Aqeel Ahmad Advocate

Aqeel Ahmad Advocate State Secreatary Rashtriya Lokdal
Uttar Pradesh

23/06/2026
20/06/2026

:
⚖️⚖️ अधिवक्ता एकता ज़िंदाबाद ⚖️⚖️
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📢 निःशुल्क चेम्बर हमारा अधिकार है!
📢 निःशुल्क फर्नीचर हमारी मांग है!
✊ जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होंगी,
✊ तब तक संघर्ष जारी रहेगा!
एकता हमारी ताकत है
संघर्ष हमारी पहचान है
🔥 हर जोर-जुल्म की टक्कर में,
संघर्ष हमारा नारा है! 🔥
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अक़ील अहमद, एडवोकेट
Ch. No. 160, हाई कोर्ट इलाहाबाद
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#अधिवक्ता_एकता_ज़िंदाबाद

18/06/2026

एक बहू ने अपनी सास से कहा:
"अम्मा जी, सब्ज़ी काट दी है।"
सास बोलीं:
"बहू, ऐसे नहीं कहते। 'काट दी' कहना ठीक नहीं लगता, बोलो कि सब्ज़ी सुधार दी है।"
बहू ने बात गांठ बांध ली।
करीब पंद्रह दिन बाद सासू माँ को एक कुत्ते ने काट लिया। सास दर्द से कराहती हुई घर पहुँचीं।
बहू दौड़कर पड़ोसियों से बोली:
"जल्दी आइए, अम्मा जी को कुत्ते ने नहीं काटा है... कुत्ते ने अम्मा जी को सुधार दिया है!"
शेर:
लफ़्ज़ों की जो ज़्यादा नुमाइश करने लगे,
कभी-कभी अपने ही क़ायदे उन पर पड़ने लगे।
या
सब्ज़ी को "सुधारना" जब सास ने सिखा दिया,
कुत्ते ने भी पंद्रह दिन में मतलब समझा दिया। 😄

16/06/2026

धार्मिक राजनीति के बजाय सकारात्मक राजनीति की आवश्यकता
देश की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों से धार्मिक ध्रुवीकरण की प्रवृत्ति बढ़ती दिखाई दे रही है। हिंदू-मुस्लिम मुद्दों को राजनीतिक बहस का केंद्र बनाकर वोट हासिल करने की कोशिशें की जाती हैं। ऐसे माहौल में मुस्लिम राजनीतिक दलों और नेतृत्व की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे उसी रास्ते पर चलने के बजाय सकारात्मक, रचनात्मक और दूरदर्शी राजनीति को अपनाएं।
लोकतंत्र में सफलता का आधार धार्मिक नारे, भावनात्मक भाषण या भीड़ की राजनीति नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं का समाधान होता है। शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, किसानों की समस्याएं, महंगाई, महिलाओं की सुरक्षा और युवाओं का भविष्य ऐसे मुद्दे हैं जो हर नागरिक से जुड़े हुए हैं। यदि मुस्लिम राजनीतिक दल भी केवल धार्मिक पहचान की राजनीति तक सीमित रहेंगे, तो इससे समाज में दूरी बढ़ेगी और वास्तविक समस्याएं पीछे छूट जाएंगी।
मुस्लिम नेतृत्व को चाहिए कि वह संविधान के मूल्यों, सामाजिक सद्भाव, शिक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण और युवाओं के विकास को अपनी राजनीति का केंद्र बनाए। मुसलमानों की वास्तविक तरक्की भावनात्मक नारों से नहीं, बल्कि आधुनिक शिक्षा, राजनीतिक जागरूकता, आर्थिक आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय मुख्यधारा में प्रभावी भागीदारी से संभव है।
यह भी सच है कि जब राजनीति धर्म के आधार पर बंटने लगती है, तो समाज में अविश्वास और तनाव बढ़ता है। इसलिए समझदारी इसी में है कि मुस्लिम राजनीतिक दल प्रतिक्रिया की राजनीति से बचें और सेवा, विकास तथा जनहित की राजनीति को प्राथमिकता दें। नफरत का जवाब नफरत से नहीं, बल्कि बेहतर सोच, बेहतर नेतृत्व और बेहतर कार्यों से दिया जाना चाहिए।
एक मजबूत लोकतंत्र तभी बन सकता है जब सभी राजनीतिक दल धर्म और जाति से ऊपर उठकर जनता के वास्तविक मुद्दों पर काम करें। राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सौहार्द और देश की प्रगति का रास्ता भी इसी सोच से होकर गुजरता है। आज समय की मांग है कि राजनीति को टकराव का नहीं, बल्कि विकास और भाईचारे का माध्यम बनाया जाए।
✍️ अकील अहमद
एडवोकेट, हाई कोर्ट, इलाहाबाद
प्रदेश सचिव, राष्ट्रीय लोक दल (RLD), उत्तर प्रदेश

16/06/2026

مذہبی سیاست کے بجائے مثبت سیاست کی ضرورت
ملک کی سیاست میں گزشتہ چند برسوں سے مذہبی بنیادوں پر پولرائزیشن کا رجحان بڑھتا ہوا نظر آ رہا ہے۔ ہندو-مسلم مسائل کو سیاسی مباحث کا مرکز بنا کر ووٹ حاصل کرنے کی کوشش کی جاتی ہے۔ ایسی صورتحال میں مسلم سیاسی جماعتوں اور مسلم قیادت کے لیے ضروری ہے کہ وہ اسی طرزِ عمل کی نقل نہ کریں بلکہ ایک مثبت، تعمیری اور دور اندیش سیاست کو فروغ دیں۔
جمہوریت میں کامیابی کا راستہ مذہبی نعروں، جذباتی تقاریر یا ہجوم کی سیاست سے نہیں بلکہ عوامی مسائل کے حل سے ہو کر گزرتا ہے۔ تعلیم، روزگار، صحت، کسانوں کے مسائل، مہنگائی، خواتین کے حقوق اور نوجوانوں کے مستقبل جیسے موضوعات ہر شہری کے لیے یکساں اہمیت رکھتے ہیں۔ اگر مسلم جماعتیں بھی صرف مذہبی شناخت کی سیاست میں الجھ جائیں گی تو اس کا فائدہ نہ مسلمانوں کو ہوگا اور نہ ہی ملک کو۔
مسلم قیادت کو چاہیے کہ وہ آئینی اقدار، سماجی ہم آہنگی، تعلیم اور معاشی ترقی کو اپنا بنیادی ایجنڈا بنائے۔ مسلمانوں کی حقیقی ترقی کا راستہ جذباتی نعروں سے نہیں بلکہ جدید تعلیم، سیاسی شعور، معاشی خود کفالت اور قومی دھارے میں مؤثر شرکت سے ہموار ہوتا ہے۔
یہ بھی ایک حقیقت ہے کہ جب سیاست مذہبی بنیادوں پر تقسیم ہونے لگتی ہے تو معاشرے میں دوریاں بڑھتی ہیں اور اصل مسائل پس منظر میں چلے جاتے ہیں۔ اس لیے دانشمندی کا تقاضا ہے کہ مسلم سیاسی جماعتیں ردِ عمل کی سیاست سے بچیں اور خدمت، کردار اور ترقی کی سیاست کو ترجیح دیں۔ نفرت کا جواب نفرت سے نہیں بلکہ بہتر سوچ، بہتر قیادت اور بہتر کارکردگی سے دیا جانا چاہیے۔
ایک مضبوط جمہوریت اسی وقت ممکن ہے جب تمام سیاسی جماعتیں مذہب اور ذات پات سے اوپر اٹھ کر عوامی مسائل کے حل پر توجہ دیں۔ یہی راستہ قومی یکجہتی، سماجی امن اور ملک کی ترقی کی ضمانت بن سکتا ہے۔
✍️ عقیل احمد
ایڈووکیٹ، ہائی کورٹ، الہ آباد
پردیش سکریٹری، راشٹریہ لوک دل (RLD)، اتر پردیش

08/06/2026

डॉ. जागृति शुक्ला की मृत्यु पर दोषी डॉक्टरों की गिरफ्तारी की मांग
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, इलाहाबाद की अधिवक्ता बहन डॉ. जागृति शुक्ला की इलाज के दौरान हुई मृत्यु अत्यंत दुखद एवं चिंताजनक है। प्राप्त तथ्यों के अनुसार उनकी मृत्यु डॉक्टरों की कथित लापरवाही के कारण हुई है, जिसकी निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए।
दोषी पाए जाने वाले डॉक्टरों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। यदि 24 घंटे के भीतर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो अधिवक्ता समाज व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
हम प्रशासन से मांग करते हैं कि मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषी डॉक्टरों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए।
अकील अहमद, एडवोकेट
उच्च न्यायालय, इलाहाबाद।

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High Court Allahabad
Allahabad
211016

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