07/10/2026
यह फोटोज़ लगभग 13 से 14 साल पुरानी होंगी। जब भी इन फोटोज़ को देखता हूँ तो लगता है कि मेरा दूसरा जन्म हुआ है।
बात ताशकंद (उज़्बेकिस्तान) की है। हमें बर्फ के पहाड़ों पर एक साइट सीइंग के लिए ले जाया गया। वहाँ एक एक्टिविटी थी कि लोग स्नो ड्रेस डालकर स्कीइंग करते थे। मुझे देखने में बड़ी ईज़ी लगी और मैंने स्कीइंग करने वालों को कहा कि मैं पहाड़ से सबसे बाद में स्कीइंग करता हुआ नीचे आ जाऊँगा। सब एक-एक करके नीचे जा रहे थे और कुछ रास्ते में गिरते तो उन्हें जो हमारे आसपास वहाँ के ट्रेनर होते, वह बर्फ से निकाल कर नीचे ले जाते।
ट्रेनर्स ने मुझसे पूछा कि आप आ जाओगे नीचे? मैंने भी बड़े कॉन्फिडेंस से बोल दिया कि आप लोग जाओ, मैं आ जाऊँगा। उनके पास स्पेशल बर्फ में चलने वाले स्कूटर्स थे। वह वहाँ से चले गए और मैं ऊपर अकेला रह गया। मैं जिस चीज़ को बड़ा आसान समझ रहा था, वह वास्तव में इतनी नहीं थी।
जैसे ही मैंने स्कीइंग करनी शुरू की, कुछ ही सेकंड बाद मेरा बैलेंस खराब हो गया और मैं अकेला वहीं बर्फ में पलटी खा के गिर गया। मेरे स्कीइंग वाले स्कूटर्स बर्फ में बुरी तरह फँस चुके थे। मैंने बहुत कोशिश की बर्फ से खुद को निकालने की लेकिन निकल नहीं पाया।
अब मैं खुद को बर्फ में दबा हुआ महसूस करने लगा और मेरा बॉडी टेम्परेचर भी काफ़ी डाउन हो रहा था। मैंने काफ़ी बार शोर भी मचाया कि मेरी आवाज़ नीचे तक पहुँच सके लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था। अब मैं पूरी तरह से हिम्मत हार चुका था और ठंड ने मुझे तोड़ दिया था। मैं भगवान को याद कर रहा था।
तभी मैंने बर्फ पर चलने वाले स्कूटर की आवाज़ सुनी, जिसको एक आदमी ऊपर लेकर आ रहा था। तभी मैंने हिम्मत से उसको ज़ोर से चिल्लाया कि मुझे बर्फ से निकालो। पहले तो उसको पता नहीं चला कि कहाँ से आवाज़ आ रही है। जब मैंने हाथ हिलाया और दुबारा चिल्लाया तो उस आदमी ने मेरे फँसे हुए शूज़ और स्कूटर्स को बर्फ से बाहर निकाला, जिससे कि मैं नीचे तक पहुँच सका।
नीचे आने के बाद मुझे आग के पास काफ़ी देर बिठाया गया, जिससे कि मेरी बॉडी का टेम्परेचर नॉर्मल हो सका और मैं ज़िंदा इंडिया वापस आ पाया।