30/03/2026
समस्या से आंख तो मिलाओ
एक बार स्वामी विवेकानंद अपने गुरु से मिलने जा रहे थे रास्ते के एक ओर पानी का तालाब था और दूसरी तरफ ऊंचे पहाड़ के टीले. पहाड़ के बीच में ही एक मंदिर था, जहां बहुत से बंदर रहते थे। उस रास्ते से गुजरते समय स्वामी विवेकानंद की नजर ढ़ेर सारे बंदरों पर पड़ी विवेकानंद बंदरों से डरते थे। लेकिन, गुरु आश्रम में जाना भी जरूरी था, बन्दर इतने उदंड थे कि वे किसी भी राहगीर को वहां से गुजरने नहीं दे रहे थे. अगर कोई कोशिश करता, तो वे उसका सामान छीनकर भाग जाते या उसको काटने को दौड़ते यह सब देखकर स्वामी विवेकानंद के पसीने छूटने लगे. अंततः उन्होंने निश्चय किया कि वे जाएंगे जरूर, विवेकानंद बलवान और ऊर्जावान थे. उन्होंने तेजी से उस रास्ते पर भागना शुरू किया, यह देख बंदरों का एक झुंड भी उनके पीछे-पीछे भागना शुरू कर दिया. विवेकानंद अच्छे धावक थे, वे और तेज भागने लगे, बंदरों ने भी उनके पीछे और तेज भागना शुरू कर दिया आखिरकार विवेकानंद को लगा कि अब उनसे और नहीं भागा जायेगा तभी उनको गुरु की एक बात याद आयी और वे वहीं रुक गये. अब उन्होंने पीछे मुड़कर वापस चलना शुरू कर दिया और सामने से आ रहे बंदरों को घूरने लगे. यह देख बंदर ठिठक गए और फिर वहां से दुम दबाकर थोड़ी ही देर में भाग गए।
जीवन में हम कई बार किसी अनजाने डर से भयभीत होकर अपने लिए बेहतर भविष्य लेकर आनेवाले अवसरों को खो देते हैं. कई बार वे परिस्थितियां भयावह या मुश्किल नहीं होती, जितना कि हम अपने जेहन में बिठा लेते हैं. परंतु, इसकी वास्तविकता को समझने के लिए हमें उस परिस्थिति या समस्या की आंख में आंख डाल कर देखना होगा. बुजुर्गों ने कहा है यदि आपका मन कमजोर है तो परिस्थितियां समस्या बन जायेंगी, यदि मन सामान्य है तो वही परिस्थितियां चुनौती बन जायेंगी और यदि मन मजबूत है, तो फिर वही परिस्थितियां अवसर बन जायेंगी.