14/08/2026
🇮🇳 स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर संबोधन
ग्राम सिउरी प्रेमरजा
आदरणीय ग्रामवासी भाइयों-बहनों, माताओं, बुजुर्गों और मेरे प्यारे युवा साथियों,
आज 14 अगस्त की यह शाम हमारे लिए केवल एक तारीख नहीं है। यह वह शाम है, जब हम उन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों को याद करते हैं, जिन्होंने अपने वर्तमान का बलिदान देकर हमारे भविष्य को स्वतंत्र बनाया।
कल हमारा देश 15 अगस्त—स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। वर्ष 1947 में इसी दिन भारत ने लगभग दो शताब्दियों की औपनिवेशिक गुलामी से मुक्ति प्राप्त की थी।
लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि आजादी केवल अंग्रेजों से मुक्ति का नाम नहीं है।
आजादी का वास्तविक अर्थ है—
गरीब को सम्मान मिले,
किसान को उसकी मेहनत का उचित मूल्य मिले,
मजदूर को उसका अधिकार मिले,
बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले,
युवाओं को रोजगार और अवसर मिले,
महिलाओं को सुरक्षा और बराबरी मिले,
और हर नागरिक को बिना डर अपनी बात कहने का अधिकार मिले।
सिउरी प्रेमरजा केवल एक गांव नहीं, हमारी पहचान और हमारी जिम्मेदारी है।
हमारा गांव तभी मजबूत होगा, जब यहां शिक्षा मजबूत होगी, जब युवा आगे बढ़ेंगे, जब गांव की बेटियां अपने सपनों को पूरा करेंगी और जब हम जाति, धर्म और आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर गांव के विकास के लिए एक साथ खड़े होंगे।
आज की शाम हम संकल्प लें कि हम अपने गांव को केवल सरकारी योजनाओं के भरोसे नहीं छोड़ेंगे। हम अपने अधिकारों को समझेंगे, अपने कर्तव्यों को निभाएंगे और गांव के विकास में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।
हम अपने बच्चों को केवल डिग्री नहीं, ज्ञान और संस्कार देंगे।
हम युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने वाला बनाने की कोशिश करेंगे।
हम अपनी बेटियों को कमजोर नहीं, बल्कि गांव की शक्ति मानेंगे।
और सबसे महत्वपूर्ण—हम अपने गांव में ऐसा वातावरण बनाएंगे जहां किसी व्यक्ति की पहचान उसकी जाति या आर्थिक स्थिति से नहीं, बल्कि उसके कर्म और चरित्र से हो।
आज हम उन वीरों को नमन करते हैं जिन्होंने कहा था कि देश उनसे बड़ा है।
महात्मा गांधी, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल, डॉ. भीमराव आंबेडकर और असंख्य ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को हम कभी नहीं भूल सकते।
उनका सपना केवल आजाद भारत नहीं था; उनका सपना था—न्यायपूर्ण, शिक्षित, आत्मनिर्भर और मजबूत भारत।
आइए, स्वतंत्रता दिवस की इस पूर्व संध्या पर हम सिउरी प्रेमरजा से एक छोटा-सा संकल्प पूरे देश के नाम दें—
हम अपने गांव को शिक्षित बनाएंगे।
हम अपने गांव को स्वच्छ बनाएंगे।
हम अपने युवाओं को आगे बढ़ाएंगे।
हम अपनी बेटियों को समान अवसर देंगे।
हम आपसी भाईचारा बनाए रखेंगे।
और भारत की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करेंगे।
क्योंकि देश केवल दिल्ली में नहीं बसता।
देश हमारे गांवों में बसता है।
देश हमारे खेतों में बसता है।
देश हमारे घरों में बसता है।
और देश हम सबके दिलों में बसता है।
आइए, कल तिरंगा फहराते समय केवल झंडे को सलाम न करें—
बल्कि उन मूल्यों को भी सलाम करें, जिनके लिए हमारे पूर्वजों ने अपना जीवन समर्पित किया था।
वंदे मातरम्!
भारत माता की जय!
जय हिंद! 🇮🇳
— ग्राम सिउरी प्रेमरजा
जनपद बलिया, उत्तर प्रदेश
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