24/09/2025
🖋️ मेरी कलम से
बचपन की हँसी – सबसे बड़ी दौलत
बचपन की खिलखिलाहट किसी भी घर की रौनक होती है। लेकिन जब यह मासूम हँसी समय से पहले जिम्मेदारियों और समाज की कुरीतियों में दब जाती है, तो यह न केवल बच्चे का नुकसान है, बल्कि पूरे समाज की हार भी है।
आज भी हमारे समाज में बाल विवाह जैसी कुप्रथाएँ बच्चों से उनका बचपन छीन लेती हैं। मासूम उम्र, जो पढ़ने-लिखने और सपने देखने की होती है, उसे बंधन और बोझ में बदल दिया जाता है। यह केवल कानूनी अपराध नहीं, बल्कि इंसानियत के खिलाफ भी है।
माता-पिता और समाज को यह समझना होगा कि—
बच्ची का विवाह जल्दी करना सुरक्षा नहीं, अन्याय है।
बच्चे की शिक्षा रोकना परिवार का गौरव नहीं, भविष्य की बरबादी है।
बचपन को बचाना ही सबसे बड़ी पूजा है।
आइए, हम सब यह संकल्प लें कि न बाल विवाह को बढ़ावा देंगे, न चुप रहकर इसे सहन करेंगे।
हर बच्चा सुरक्षित, शिक्षित और स्वतंत्र बचपन का हकदार है।
“बचपन बचाएँ, भविष्य बनाएँ।”
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