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​👤 प्रमोद लोधी
📍 समाज सेवक | उदयपुरा, रायसेन
🔸 प्रदेश संगठन महामंत्री - राष्ट्रीय लोधी युवा महासभा
🔸 जिलाध्यक्ष - अखिल भारतीय ओबीसी महासभा
🔸 जिला उपाध्यक्ष - राष्ट्रीय गौ सेवा संघ
🔸 ब्लॉक अध्यक्ष उदयपुरा- भारतीय मजदूर संघ

📔 मौन-संवाद: मेरी आत्मा की आवाज 📔​(दिनांक: 18 फरवरी 2026 | स्थान: बरेली | स्थिति: गहन मौन)​आज ढाई घंटे के इस गहन सन्नाटे...
18/02/2026

📔 मौन-संवाद: मेरी आत्मा की आवाज 📔
​(दिनांक: 18 फरवरी 2026 | स्थान: बरेली | स्थिति: गहन मौन)
​आज ढाई घंटे के इस गहन सन्नाटे में, जब मैंने बाहरी दुनिया के कोलाहल को शांत किया, तो अंतर्मन का स्वर सुनाई दिया। उस मौन को चीरकर जो 'सत्य' मुझे प्राप्त हुआ, वह यहाँ अंकित है:
​🔥 खंड 1: आत्म-मंथन (मेरी कसौटियाँ)
​1. पूर्ण पवित्रता:
क्या मुझमें कोई बुराई नहीं?
मेरा उत्तर: "मैं मानव हूँ, देवता नहीं। कभी-कभी दूसरों की चमक देखकर मन में ईर्ष्या की परछाई आती है। किंतु मौन ने सिखाया है कि कीचड़ में ही कमल खिलता है। अब मैं उस जलन को 'प्रार्थना' में बदल रहा हूँ। मेरी पवित्रता 'बुराई न होने' में नहीं, बल्कि रोज उसे त्यागकर निर्मल होने में है।"
​2. पूर्ण सत्यनिष्ठा:
क्या मैं खुद से सच्चा हूँ?
मेरा उत्तर: "दुनिया के लिए मैं ईमानदार हूँ, पर खुद से? कई बार मैंने अपनी पीड़ा मुस्कुराहट के पीछे छिपाई। आज मैं स्वीकार करता हूँ— मैं भी थक सकता हूँ, मुझे भी सहारे की आवश्यकता हो सकती है। अपनी दुर्बलता को स्वीकार करना ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।"
​3. पूर्ण निस्वार्थता:
क्या सेवा कामनाओं से मुक्त है?
मेरा उत्तर: "अक्सर मन में प्रशंसा की चाह थी। पर आज प्रकृति ने कहा— 'वृक्ष अपने फल स्वयं नहीं खाते।' आज से संकल्प है: मेरा उद्देश्य 'श्रेय' लेना नहीं, किसी के जीवन में 'सवेरा' लाना है।"
​4. पूर्ण प्रेम:
क्या मैं सबको माफ कर पाया?
मेरा उत्तर: "द्वेष का भारी बोझ लेकर मैं आगे नहीं बढ़ सकता। मेरा प्रेम अब शर्तों पर नहीं, बल्कि 'अस्तित्व' पर आधारित होगा। मैं उन सभी को प्रेम भेजता हूँ जिन्होंने मेरा दिल दुखाया।"
​💪 खंड 2: मेरी आंतरिक शक्ति
​मैं गिरकर पुनः उठने का साहस रखता हूँ।
​मैं एक 'प्रवाहमान सरिता' हूँ, जो चट्टानों से टकराकर रुकती नहीं, अपना मार्ग बना लेती है।
​📝 खंड 3: हृदय की पाती (Letters)
​✉️ स्वयं के नाम:
"प्रिय प्रमोद, मैं तुम्हें स्वीकार करता हूँ। तुमने आंधियों में भी दीपक बुझने नहीं दिया। जो भूलें हुईं, उन्हें भूल जाओ। तुम पूर्ण नहीं हो, पर तुम 'निरंतर प्रयास' कर रहे हो, और यही काफी है। उठो! संसार को तुम्हारी ऊर्जा की जरूरत है।"
​✉️ ईश्वर के नाम:
"हे मेरे आराध्य, मैं एक रिक्त बांसुरी हूँ, अपने स्वर इसमें तुम भर दो। अब तक जो किया, वह मेरा अहंकार था; अब जो होगा, वह तुम्हारी इच्छा होगी। मुझे इतना छोटा रखना कि हर दिल में समा सकूँ, और इतना विशाल बनाना कि हर किसी के आंसू पोंछ सकूँ।"
​🌟 खंड 4: जीवन का परम ध्येय
​मेरा उद्देश्य केवल सफल होना नहीं, अपितु 'सार्थक' होना है।
मेरा जीवन एक 'अल्पविराम' बने—जहाँ आकर थके हुए पथिकों को थोड़ा विश्राम और आगे बढ़ने की आशा मिले।
​🙏 प्रमोद सिंह लोधी
(एक साधक, एक सेवक)

ऐतिहासिक ग्राम जामगढ़: पौराणिक और पुरातात्विक धरोहर​जामगढ़, मध्य प्रदेश के रायसेन जिले की बरेली तहसील से 20 किमी उत्तर म...
10/02/2026

ऐतिहासिक ग्राम जामगढ़: पौराणिक और पुरातात्विक धरोहर
​जामगढ़, मध्य प्रदेश के रायसेन जिले की बरेली तहसील से 20 किमी उत्तर में विंध्याचल पर्वत श्रेणियों में स्थित एक ऐतिहासिक गाँव है। इसे त्रेता और द्वापर युग के रीछराज जामवंत जी का निवास स्थल माना जाता है, जिसके कारण इसका नाम जामगढ़ पड़ा।
​यहाँ के प्रमुख स्थलों और उनसे जुड़ी मान्यताओं का विवरण निम्न है:
​1. जामवंत जी की गुफा (Jamwant Ji’s Cave)
​यह गुफा गाँव के तालाब और शंकर जी की गुफा के बीच स्थित है। इसका मुख्य द्वार चौड़ा और ऊँचा है, लेकिन अंदर जाने पर यह सकरा और अंधकारमय हो जाता है।
​पौराणिक महत्व: मान्यता है कि जामवंत जी यहाँ त्रेता से द्वापर युग तक रहे। यहीं भगवान श्रीकृष्ण और जामवंत जी का युद्ध हुआ था, जिसके बाद जामवंत जी ने अपनी पुत्री जामवंती का विवाह श्रीकृष्ण से किया और उन्हें स्यमंतक मणि दहेज में दी।
​रहस्य: रात में गुफा के द्वार पर कभी-कभी एक रहस्यमयी प्रकाश पुंज दिखाई देता है, जिसे कुछ लोग मणिधारी नागराज और कुछ जामवंत जी से जोड़ते हैं।
​2. काले पत्थर का प्राचीन मंदिर (Ancient Black Stone Temple)
​जामगढ़ से लगे भगदेही गाँव में काले पत्थर का एक मंदिर है, जिसे पुरातत्व विभाग परमार वंश कालीन मानता है। इसकी शैली भोजपुर मंदिर जैसी है।
​स्थापत्य कला: मंदिर के पत्थरों पर सुंदर नक्काशी और नर-नारियों के चित्र उकेरे गए हैं, जो खजुराहो शैली की याद दिलाते हैं। ताज्जुब की बात यह है कि मंदिर निर्माण में प्रयुक्त पत्थर 20 किमी के दायरे में कहीं नहीं मिलते।
​किवदंती: कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण जामवंत जी ने एक ही रात में किया था। मंदिर का शिखर अधूरा रह गया क्योंकि चक्की चलने की आवाज़ सुनकर उन्हें लगा कि सुबह हो गई है।
​3. शंकर जी की गुफा (Shankar Ji's Cave)
​गाँव के उत्तर में पहाड़ी पर स्थित इस गुफा में प्राचीन शिवलिंग है। यहाँ बारह महीने पानी से भरी रहने वाली एक प्राकृतिक बावड़ी भी है। माना जाता है कि इसे ऋषि-मुनियों ने स्थापित किया था।
​4. सुरा गउ की गुफा और चरवाहे की कथा
​शंकर जी की गुफा के बगल में स्थित इस गुफा का द्वार अब लगभग बंद हो चुका है।
​लोककथा: एक चरवाहे ने देखा कि उसकी गाय एक गुफा में जाती है जहाँ ऋषि तपस्या कर रहे थे। ऋषियों ने उसे मजदूरी के रूप में चमत्कारिक गेहूँ दिए जो कभी खत्म नहीं होते थे। जब गाँव वालों ने लालच में उस गेहूँ की कोठी को पलटा और गुफा में घुसने की कोशिश की, तो गुफा का द्वार सकरा हो गया और बंद हो गया।
​5. खिरका वाले हनुमान जी का मंदिर
​बस स्टैंड के पास स्थित यह मंदिर एक चमत्कारिक घटना से जुड़ा है।
​इतिहास: करीब 50 साल पहले, जब भी कुम्हार यहाँ आवा (भट्टा) लगाता था, गाँव में आग लग जाती थी। एक महात्मा के कहने पर खुदाई की गई, जहाँ हनुमान जी की मूर्ति मिली। स्थापना के बाद आग लगने की घटनाएं बंद हो गईं।
​अन्य दर्शनीय स्थल:
​पैरों के निशान: भगदेही तालाब और गुफा के बीच चट्टानों पर बड़े पैरों के निशान हैं, जिन्हें जामवंत जी के पैरों के निशान माना जाता है।
​भगदेवी मंदिर: भगदेही गाँव के बाजार में स्थित विशाल प्रतिमा वाला मंदिर।
​वराही माता मंदिर: जामगढ़ तालाब के किनारे स्थित, जहाँ मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
​प्राकृतिक सौंदर्य: गाँव में तीन तालाब और एक बरसाती झरना है। तालाब में जल स्तर नापने के लिए पुराने समय के पत्थर के चीरे (निशान) लगे हैं।
​जामगढ़ पुरातत्व की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है और यहाँ खुदाई करने पर कई ऐतिहासिक रहस्यों से पर्दा उठ सकता है।
Yagyawalkya Sn Pro Raisen Collector Office Raisen

🔥 साहस का पथ: भय के पार ही विजय है 🔥​प्रायः हम जीवन में 'सुरक्षित तट' ढूंढते हैं। हम उन मार्गों पर चलने से संकोच करते है...
08/02/2026

🔥 साहस का पथ: भय के पार ही विजय है 🔥

​प्रायः हम जीवन में 'सुरक्षित तट' ढूंढते हैं। हम उन मार्गों पर चलने से संकोच करते हैं जहाँ अनिश्चितता हो।
किंतु सत्य यह है कि "शांत समुद्र में कभी कुशल नाविक नहीं बनते।"
​आज मैं अपने अनुभव से यह साझा करना चाहता हूँ:
"जीवन में 'जोखिम' उठाना सीखिए।"
​यदि कोई मार्ग आपको भयभीत कर रहा है, यदि कोई निर्णय आपको असहज कर रहा है, तो रुकिये मत। समझ लीजिये कि वही वह मार्ग है जो आपको आपके 'सर्वोत्तम स्वरूप' से मिलवाएगा।
​भय केवल एक संकेत है कि आप अपनी सीमाओं का विस्तार कर रहे हैं। उस भय के पार ही एक विराट सफलता और आत्म-संतोष आपकी प्रतीक्षा कर रहा है।
​इसी संकल्प के साथ, मैं भी मार्च में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अनूठी यात्रा—'आत्म-खोज की यात्रा'—पर अग्रसर हो रहा हूँ। यह यात्रा बाहर की नहीं, अपितु स्वयं के भीतर उतरने की है।
​विश्वास है कि कठिनाइयाँ केवल देह को थका सकती हैं, संकल्प को नहीं।
​"साहस का अर्थ भय का न होना नहीं, अपितु भय के बावजूद आगे बढ़ना है।"
​क्या आप भी अपने जीवन में 'स्वयं' को खोजने का साहस रखते हैं?
​आपका साथी,
प्रमोद सिंह लोधी
(एक साधक, एक अन्वेषक)
#आत्ममंथन

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