15/10/2024
इसे खुशबू का धमाका न कहूँ तो क्या कहूँ..?
संगठित फूलों की सुंदरता जिसके आगे शब्द फीके पड़ जाएं...
ये सब कुछ मिलेगा आपको मधुमालती में...
आइये और खो जाइये इसकी मादक खूबसूरती, खुशबू और औषधीय गुणों में। मेरी पसंद में यह पहले नम्बर पर आती है, क्योंकि यह सर्वगुण सम्पन्न भारतीय वनस्पति है।
रंगून बेल को मधुमालती, मालती या Rangoon creeper के नाम से जानते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम Combretum indicum या Quiscalis indica है जो Combretaceae कुल का सदस्य है। यह लता अपने फूलों की सुंदरता के लिए बगीचे तथा घरों के प्रवेश द्वार के लिए सर्वोत्तम विकल्प है। इसके फूलों में मौजूद नेक्टर/ रस कीटो को आकर्षित करता है जिससे इसकी बेल हमेशा मधुमक्खी तथा अन्य कीटो से लदी रहती है। humming bird insect के लिए यह पोषक पौधा है। इसकी झाड़ीदार शाखाओं में बीच पक्षी भी खूब चहलकदमी करते हैं और घोसला भी बनाते है। इन सबसे खास है इसकी मदहोश कर देने वाली खुशबू जो सुबह- शाम दूर दूर तक अपनी उपस्थिति का एहसास कराती रहती है।
मधुमालती फूल शायद अकेले वह खूबसूरती और माहौल बनाने में असमर्थ रहते लेकिन जब ये एक साथ मिलकर विशालकाय गुच्छे की शक्ल में आ जाते हैं, तो फिर कोई इसकी सुंदरता के जादू और मायाजाल से बच नही सकता। यह तो सत्य है कि ये फूल अकेले इतने पसंद नही किये जाते जितने कि संगठित होने पर किये जाते हैं। प्रकृति भी न, ना जाने कितना कुछ सिखाती है, पर एक हम हैं कि जात- पात, ऊँच- नीच के भाव पर ही अटके हुये हैं। संगठन में शक्ति है का भाव समेटे यह वनस्पति कितना मधुर संदेश से रही है। जो सीख जायें, सांझ जाएं तो दुनिया कितनी सुंदर है...😊
इसके पुष्प बागवानी के साथ साथ पारम्पारिक चिकित्सा पद्धति में भी बहुत उपयोगी माने जाते हैं। इसका प्रयोग मधुमेह, मलेरिया, कैंसर, उदर सबंधी विकार, त्वचा रोग, कीटनाशक, परजीवी नाशक आदि के रूप किया जाता रहा है।
इसमें कई महत्वपूर्ण श्रेणियों के रसायन जैसे टैनिन, फ्लेवेनॉइड, स्टेरॉयड, सैपोनिन, व एमिनो एसिड पाये जाते हैं जिनमे से क्विसकैलिस एसिड और काइनेट में कुछ कीटो जैसे Acaris के लिये लकवाग्रस्त कर देने की क्षमता पाई जाती है। क्विसकेलिक एसिड कई हानिकारक कीटो के लिये विष की तरह कार्य करता है। सही मायनों में देखा जाए तो दवा बनाने के लिए सिद्धांत प्राचीन ज्ञान पर ही आधारित होते हैं, लेकिन अक्सर देखने मे आता है कि पारंपरिक ज्ञान को आधार बनाकर जब रिसर्च के परिणाम आते हैं तो यही पढ़े लिखे लोग पारंपरिक ज्ञान को हीन दृष्टि से देखने लग जाते हैं, ठीक उसी तरह जैसे आजकल कॉन्वेंट में पढ़े लिखे बुद्धिजीवी अनहाइजीनिक एवं नॉनप्रैक्टिकल लगने लगे हैं। इस विषय पर भी चिंतन करना चाहिए।
धन्यवाद 🙏
डॉ. विकास शर्मा
वनस्पति शास्त्र विभाग
शासकीय #महाविद्यालय चौरई
जिला छिन्दवाड़ा (म.प्र.)
चौरई, जिला #छिंदवाड़ा (म.प्र.)
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