21/02/2021
1. #भारत के विभाजन के विचार की नींव रखना
विनायक दामोदर सावरकर ने द्विराष्ट्र सिद्धान्त की नींव 1937 में नागपुर में हिन्दू महासभा के 19वें अधिवेशन में रखी, बाद में संघ ने भारत विभाजन का विरोध करने वाले गांधी की हत्या करके उन्हें ही विभाजन का दोषी ठहराने के लिए दुष्प्रचार किया, इतिहासकार कहते हैं कि अगर संघ नें उग्र हिन्दू वातावरण न बनाया होता तो शायद जिन्ना अलग राष्ट्र नही मांगते।
2. #आर्मी को तोड़ने की साजिश
भारत के आजाद होने के तीसरे साल ही संघ ने आर्मी चीफ जनरल करिअप्पा को कत्ल करने की साजिश रची, संघ ने पहले उत्त्तर भारत और दक्षिण भारत का ध्रुवीकरण किया फिर कुछ सिक्ख युवाओं को भड़काकर करिअप्पा की हत्या की कोशिश की मामले में 6 लोगों को सजा हुई थी(स्त्रोत- 2017 में रिलीज हुए सीआईए के डिस क्लासिफाइड किए गए दस्तावेज)।
3. #नेताजी सुभाष चंद्र बोस से गद्दारी
जब भारत की आजादी के लिए नेताजी जापान से मदद मांगने गए थे तब संघ ने अंग्रेजों का साथ दिया था हिन्दू महासभा ने सावरकर के नेतृत्व में ब्रिटिश फौजों में भर्ती के लिए शिविर लगाए थे।
4. #महात्मा गांधी की हत्या
गुट के नौवें सदस्य दिगम्बर रामचंद्र बडगे के गवाही के आधार पर ही सावरकर का नाम इस मामले से जुड़ा था और गांधी की हत्या के बाद हिन्दू महासभा और संघ पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
5. #नमक सत्याग्रह का विरोध
आरएसएस द्वारा प्रकाशित की गई हेडगेवार की जीवनी के मुताबिक जब गांधी ने 1930 में नमक सत्याग्रह शुरू किया तब हेडगेवार ने हर जगह अपने कारिंदों में सूचना भेजी की संघ इस सत्याग्रह में शामिल नही होगा।
6. #भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध
भारत छोड़ो आंदोलन शुरू होने के डेढ़ साल बाद ब्रिटिश राज की बॉम्बे सरकार ने एक मेमो में बेहद संतुष्टि के साथ नोट किया कि 'संघ ने पूरी ईमानदारी के साथ खुद को कानून के दायरे में रखा है, खासतौर पर अगस्त 1942 में भड़की अशांति में यह शामिल नही हुआ है।'
जिस सज्जन को इन तथ्यों से असंतुष्टि हो या ये तथ्य संदेहास्पद लगे और उसके पास सबूत हो कि ये बातें त्रुटिपूर्ण है वो मुझसे सीधे डिबेट कर सकता है।
𝚁𝙸𝚃𝙴𝚂𝙷 𝙺𝚄𝙼𝙰𝚁... ✍✍✍✍