Jaywanti Haksar Govt. PG College, Betul

Jaywanti Haksar Govt. PG College, Betul JH College is situated in Madhya Pradesh.

It was established in 1957 and affiliated with Barkatullah University Bhopal to provide ample courses to attain the target of generating employment opportunities for the new generation and developing their per

जयवंती हाक्सर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैतूल की होनहार छात्रा  ज्योति धुर्वे ने MPPSC परीक्षा उत्तीर्ण कर , बनी  स...
08/06/2024

जयवंती हाक्सर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैतूल की होनहार छात्रा ज्योति धुर्वे ने MPPSC परीक्षा उत्तीर्ण कर , बनी सहायक कोषालय अधिकारी। प्राचार्य एवं समस्त स्टाफ की ओर से शुभकामनाएं।

जयवंती हाक्सर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैतूल के अंग्रेजी विभाग द्वारा आयोजित, एक दिवसीय webinar.Date - 08/06/2024 ...
08/06/2024

जयवंती हाक्सर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैतूल के अंग्रेजी विभाग द्वारा आयोजित, एक दिवसीय webinar.
Date - 08/06/2024

*Innovative Initiatives in Teaching
Learning and Evaluation*

उच्चशिक्षा विभाग मध्यप्रदेश के सहयोग से , जयवंती हाक्सर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैतूल के प्राणिशास्त्र विभाग द्वा...
08/06/2024

उच्चशिक्षा विभाग मध्यप्रदेश के सहयोग से , जयवंती हाक्सर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैतूल के प्राणिशास्त्र विभाग द्वारा *Interdisciplinary
Approach in Natural
Sciences*
विषय एक दिवसीय नेशनल बेविनार का आयोजन किया गया ।

जयवंती हाक्सर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैतूल की NSS संयुक्त इकाई ने  रानीपुर में एकदिवसीयदिवाकेम्प लगाया। दिनांक -...
25/05/2024

जयवंती हाक्सर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैतूल
की NSS संयुक्त इकाई ने रानीपुर में एकदिवसीय
दिवाकेम्प लगाया। दिनांक - 16/05/2024

जयवंती हाक्सर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैतूल के वनस्पति शास्त्र विभाग में ,  2 मई 2024 को  प्राचार्य डॉक्टर विजेता...
05/05/2024

जयवंती हाक्सर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैतूल के वनस्पति शास्त्र विभाग में , 2 मई 2024 को प्राचार्य डॉक्टर विजेता चौबे के मार्गदर्शन में एकदिवसीय वर्कशॉप का आयोजन किया , जिसमें विद्यार्थियों को विश्व बैंक परियोजना के अंतर्गत विभाग में प्राप्त होने वाले उपकरणों की जानकारी व उनकी क्रियाविधि से अवगत कराया गया तथा विभिन्न प्रकार के प्रयोगों में उनकी क्या उपयोगिता है यह भी बतलाया गया। कार्यशाला दो सत्रों में संपन्न हुई प्रथम सत्र में प्रथम का प्रथम सत्र का उद्घाटन मां सरस्वती के समक्ष पूजन कर किया गया तत्पश्चात विभाग अध्यक्ष डॉक्टर अलका पांडे ने विभाग में उपस्थित सभी उपकरणों की जानकारी प्राचार्य विजेता चौबे ने अपने उद्बोधन में विद्यार्थियों से से कहां की वे ज्यादा से ज्यादा प्रैक्टिकल में रुचि लें जिससे उनमें अनुसंधान के प्रति भी रुझान पैदा होगा। मंच संचालन डॉ अर्चना मिश्रा के द्वारा वह आभार प्रदर्शन प्रोफेसर अर्चना सोनारे के द्वारा किया गया।
कार्यशाला के दूसरे सत्र में गवर्नमेंट कॉलेज पांढुर्णा से पधारे डॉक्टर श्रेयांश परसाई तथा वनस्पति शास्त्र विभाग की प्रोफेसर अर्चना सुनारे डॉक्टर अर्चना मिश्रा प्रोफेसर सुनीता गडेकर माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डा महेंद्र नवागे डॉ प्रीति वाला पाल प्रो दीपिका साहू एवं बॉटनी की रिसर्च स्कॉलर कुमारी माया रघुवंशी एवं माइक्रोबायोलॉजी की रिसर्च स्कॉलर कुमारी प्रियंका भोपटे द्वारा विद्यार्थियों को विभिन्न उपकरणो को ऑपरेट करने की विधि से अवगत कराया गया, कार्यशाला में विशेष अतिथि के रूप में एनएसएस के नोडल ऑफिसर डॉक्टर सुखदेव डोंगरे भी उपस्थित थे।

जयवंती हाक्सर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैतूल मेंचुनाव के प्रति छात्रों अभिभावकों एवं कर्मचारियों को मताधिकार के लि...
05/05/2024

जयवंती हाक्सर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैतूल में
चुनाव के प्रति छात्रों अभिभावकों एवं कर्मचारियों को मताधिकार के लिए प्रेरित करने के लिए बनाया गया, सेल्फी प्वाइंट।
#मेरा_वोट_मेरा_अधिकार

22 अप्रैल 2024 विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर जयवंती हाक्सर शासकीय महाविद्यालय के ईको क्लब द्वारा सेल्फी पॉइंट का शुभारंभ ...
05/05/2024

22 अप्रैल 2024 विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर जयवंती हाक्सर शासकीय महाविद्यालय के ईको क्लब द्वारा सेल्फी पॉइंट का शुभारंभ , प्राचार्य डॉ विजेता चौबे द्वारा किया गया। महाविद्यालय के अनेक प्रोफेसर्स एवं विद्यार्थियों ने पृथ्वी को हरा-भरा रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा वृक्षारोपण करने तथा पृथ्वी को प्लास्टिक से मुक्त करने के लिए कम से कम मात्रा में प्लास्टिक का उपयोग करने का संकल्प दिया ।इको क्लब प्रभारी डॉ अलका पांडे ने बतलाया कि इस वर्ष विश्व पृथ्वी दिवस की थीम " ग्रह बनाम प्लास्टिक" है अतः प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करें और जो भी प्लास्टिक उपयोग में आ रहा है उसका आकर्षण उपयोगी सामग्री बनाकर पुनः उपयोग करें। सेल्फी पॉइंट में महाविद्यालय की प्रोफेसर अनीता सोनी प्रो अर्चना सोनारे डॉ अर्चना मिश्रा प्रो सुनीता गडेकर, प्रो रामकुमार गौतम एवं प्रो मनीष मानकर ने स्वयं उपस्थित होकर अपने फोटो के माध्यम से महाविद्यालय के समस्त विद्यार्थियों को पर्यावरण के संरक्षण के प्रति जागरूक होने का संदेश दिया, कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य डॉ विजेता चौबे ने सभी विद्यार्थियों से सेल्फी पॉइंट में अपना फोटो खींचकर पर्यावरण के प्रति जागरूक होने के लिए आवाहन किया

जयवंती हाक्सर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय का राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा से, संबद्धता हेतु पधारी टीम का सफल...
05/05/2024

जयवंती हाक्सर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय का राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा से, संबद्धता हेतु पधारी टीम का सफल निरीक्षण। 22/04/2024

जयवंती हाक्सर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैतूल में आज ईको क्लब के माध्यम से महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ विजेता चौबे ...
19/04/2024

जयवंती हाक्सर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैतूल में आज ईको क्लब के माध्यम से महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ विजेता चौबे के नेतृत्व में विद्यार्थियों को‌ पर्यावरण हितैषी जीवन शैली अपनाने के उद्देश्य से प्राकृतिक कृषि के बारे में जानकारी दी गई ।प्राकृतिक कृषि के लिए जो जीवामृत तैयार किया जाता है उसे तैयार करने की विधि बतलाई गई ।MSC 4th Same के दो विद्यार्थी कुमारी वैष्णवी बोरवन एवं कुमारी सुनीता मालवीय के द्वारा डॉ अलका पांडे के मार्गदर्शन में यह प्रोजेक्ट कार्य किया जा रहा है , उनके द्वारा बीएससी स्नातक प्रथम वर्ष के विद्यार्थी जिन्होंने ऑर्गेनिक फार्मिंग वोकेशनल सब्जेक्ट के रूप में लिया है उन्हें भी यह प्रशिक्षण दिया गया । जीवामृत को तैयार करने के लिए प्लास्टिक की टंकी ली जाती है और इसमें 20 लीटर पानी लेकर इसके पश्चात इसमें 10 किलोग्राम गाय का गोबर 10 लीटर गोमूत्र 2 किलोग्राम गुड़ और 2 किलो दाल का पाउडर मिलाया जाता है और एक मुट्ठी किसी भी खेत की मेड की मिट्टी मिलाई जाती है सभी चीजों को मिलाने के पश्चात पूरे मिश्रण को क्लाक वाइज और फिर एंटी क्लाकवाइज कुछ देर के लिए घुमाया जाता है तत्पश्चात इसे ढक्कन से बंद कर रख दिया जाता है अब तीसरे दिन से ढक्कन को प्रतिदिन खोलकर उसे कुछ देर क्लाकवाइज और कुछ देर एंटी क्लाकवाइज घुमाया जाता है । 6 -7 दिनों में यह जीवामृत तैयार हो जाता है इसे छानकर डिब्बो में इकट्ठा कर लिया जाता है और इस जीवामृत को आवश्यकता अनुसार पानी मिलाकर पौधों को या फसल को दिया जाता है जो पौधों के लिए बहुत पोषण युक्त होता है। जीवामृत बनाने के लिए टंकी ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां पर सीधे धूप न पड़े। खेतों में इस जीव अमृतके लगातार प्रयोग से उत्तम क्वालिटी की फसल प्राप्त होने के साथ-साथ उर्वरकता भी बढ़ जाती है और मिट्टी की क्वालिटी में भी सुधार हो जाता है तथा किसी भी प्रकार के केमिकल फ़र्टिलाइज़र के उपयोग की आवश्यकता नहीं पड़ती, महाराष्ट्र के किसानों के द्वारा बड़ी संख्या में इस पद्धति को अपनाया जा रहा है ।इस पद्धति के जनक श्री सुभाष पालेकर जी हैं जिन्हें इस उपलब्धि पर पद्मश्री की उपाधि भी प्राप्त हो चुकी है,। 30 अप्रैल 2010 में मेरे द्वारा जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग विषय पर जयंती हाक्सर शासकीय महाविद्यालय में एक सेमिनार आयोजित किया गया था जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में श्री सुभाष पालेकर जी उपस्थित हुए थे आपके मार्गदर्शन के पश्चात बैतूल में भी कुछ किसानों ने इस पद्धति को अपनाया है और उन्हें सफलता भी प्राप्त हुई है वर्तमान में NEP के अंतर्गत इसे फर्स्ट ईयर के ऑर्गेनिक फार्मिंग के पेपर में शामिल किया गया है।
प्रशिक्षण में स्नातक प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के साथ-साथ महाविद्यालय के अन्य विद्यार्थी भी उपस्थित हुए ,बॉटनी विभाग की प्रोफेसर अर्चना सोनारे ,डॉ अर्चना मिश्रा प्रो सुनीता गडेकर एवं डॉ महेंद्र नावंगे भी उपस्थित थे। प्रशिक्षण इको क्लब प्रभारी डॉ अलका पांडे द्वारा दिया गया । दिनांक 18/04/2024

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Civil Lines
Betul
460001

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