20/02/2026
क्या सच में इस देश में हर नागरिक को बराबरी का अधिकार मिला है? 🤔
अगर मिला है, तो न्याय की राह आम आदमी के लिए इतनी मुश्किल क्यों है?
क्यों शिकायत दर्ज होने के बाद भी पीड़ित को ही बार-बार अपनी सच्चाई साबित करनी पड़ती है?
क्यों गरीब की सुनवाई धीमी और ताकतवर की फाइल तेज़ चलती दिखाई देती है?
क्या मानवाधिकार सिर्फ सेमिनारों और भाषणों तक सीमित हैं,
या ज़मीन पर भी उनका असर दिखता है?
अगर संविधान हमें आज़ादी, बराबरी और सम्मान देता है,
तो फिर आम नागरिक को अपने ही हक़ के लिए दरवाज़े क्यों... खटखटाने पड़ते हैं?
क्या सवाल पूछना गलत है?
या चुप रहना ही सबसे बड़ी गलती है?
अब समय है सोचने का —
क्या हम सिर्फ दर्शक बनकर रहेंगे,
या अधिकारों की बात खुलकर करेंगे?
मानवाधिकार कोई एहसान नहीं,
यह हर इंसान की पहचान है।
और जब तक न्याय सबके लिए समान नहीं होगा,
तब तक सवाल उठते रहेंगे। ✊🔥
#सवाल_तो_पूछेंगे
#न्याय_की_आवाज़
ी_लड़ाई
#लोकतंत्र_जिंदा_है
#आवाज़_उठाओ