Santosh Garg II

Santosh Garg II Journalist

अगर माता-पिता दोनों आईएएस हैं, तो बच्चों को आरक्षण क्यों मिलना चाहिए?: सुप्रीम कोर्ट​कहा-आर्थिक और शैक्षिक रूप से उन्नत ...
24/05/2026

अगर माता-पिता दोनों आईएएस हैं, तो बच्चों को आरक्षण क्यों मिलना चाहिए?: सुप्रीम कोर्ट

​कहा-आर्थिक और शैक्षिक रूप से उन्नत परिवारों को आरक्षण से बाहर आना चाहिए | ईडब्ल्यूएस में सामाजिक पिछड़ापन नहीं, केवल आर्थिक रूप से कमजोर | माता-पिता में से कोई भी आईएएस अफसर तो बच्चों को आरक्षण क्यों?

नई दिल्ली।
​सुप्रीम कोर्ट ने पिछड़े वर्गों में आर्थिक और शैक्षिक रूप से संपन्न परिवारों के बच्चों को आरक्षण का लाभ दिए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब माता-पिता दोनों या इनमें से एक भी आईएएस अधिकारी है, तो बच्चे को आरक्षण क्यों मिलना चाहिए? शैक्षणिक व आर्थिक सबलीकरण से सामाजिक गतिशीलता आती है। अगर इसके बाद भी बच्चों के लिए आरक्षण मांगा जाएगा, तो हम कभी इससे बाहर ही नहीं निकल पाएंगे। शीर्ष कोर्ट ने कहा, आरक्षण हासिल कर सामाजिक और आर्थिक रूप से आगे बढ़ चुके परिवारों को धीरे-धीरे आरक्षण व्यवस्था से बाहर आना चाहिए।
​जस्टिस बीवी नागरत्ना व जस्टिस उज्जवल भुइयां की पीठ क्रीमी लेयर से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता के वकील शशांक रत्नू ने दलील दी कि संबंधित लोगों को सिर्फ आय के आधार पर नहीं, बल्कि उनके पद एवं सामाजिक स्थिति के आधार पर क्रीमी लेयर माना गया है। उन्होंने कहा, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और क्रीमी लेयर के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए।
​जस्टिस नागरत्ना ने इस पर कहा कि ईडब्ल्यूएस में सामाजिक पिछड़ापन नहीं, सिर्फ आर्थिक कमजोरी होती है। सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन को मान्यता दी जा सकती है, लेकिन जब परिवार आरक्षण का लाभ लेकर निश्चित स्तर तक पहुंच चुका हो, तब संतुलन जरूरी है। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी कर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
​शीर्ष कोर्ट फिलहाल उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें पिछड़े वर्गों के क्रीमी लेयर परिवारों को आरक्षण लाभ देने की मांग की गई है। इससे यह बहस फिर तेज हो गई है कि क्या आर्थिक और सामाजिक रूप से आगे बढ़ चुके परिवारों को आरक्षण का लाभ मिलता रहना चाहिए।
​यह है मामला
​मामला कर्नाटक के उम्मीदवार से जुड़ा है, जिसे कर्नाटक पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लि. में आरक्षित श्रेणी के तहत सहायक अभियंता (इलेक्ट्रिकल) पद के लिए चुना गया था। हालांकि, जिला जाति एवं आय सत्यापन समिति ने उसे क्रीमी लेयर में मानते हुए जाति वैधता प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया। समिति ने कहा कि उसके माता-पिता सरकारी कर्मचारी हैं और उनकी संयुक्त आय निर्धारित सीमा से अधिक है।
​बीते साल विचार से किया था इनकार :
​सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल जनवरी में एक अलग मामले में मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) आरक्षण से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों के बच्चों को बाहर करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था।
​कोर्ट ने कहा था... पंजाब राज्य बनाम दविंदर सिंह मामले में सात जजों की संविधान पीठ के अगस्त 2024 के फैसले में एससी-एसटी कोटा से क्रीमी लेयर को बाहर करने का जिक्र सिर्फ एक मत था और इस पर विधायिका को निर्णय लेना है।
​वर्तमान में ओबीसी परिवारों के लिए क्रीमी लेयर की आय सीमा 8 लाख रुपये सालाना है। हालांकि कुछ श्रेणियां, जैसे उच्चपदस्थ संवैधानिक पदाधिकारी, वरिष्ठ नौकरशाह या शीर्ष सैन्य अधिकारियों के बच्चे, आय की परवाह किए बिना श्रेणी से बाहर रखे जा सकते हैं।

अंतागढ़ में 24 घंटे बाद सरपंचों का चक्का जाम समाप्त, प्रशासन के लिखित आश्वासन पर माने आंदोलनकारी​अंतागढ़ (कांकेर)। विकास ...
24/05/2026

अंतागढ़ में 24 घंटे बाद सरपंचों का चक्का जाम समाप्त, प्रशासन के लिखित आश्वासन पर माने आंदोलनकारी

​अंतागढ़ (कांकेर)। विकास कार्यों की स्वीकृति की मांग को लेकर अंतागढ़ विकासखंड की 56 ग्राम पंचायतों के सरपंचों द्वारा किया जा रहा आंदोलन रविवार को समाप्त हो गया। भानुप्रतापपुर–नारायणपुर मार्ग पर करीब 24 घंटे से जारी चक्का जाम को प्रशासन के लिखित आश्वासन के बाद खोल दिया गया है, जिससे मार्ग पर आवागमन दोबारा बहाल हो सका।
​अधिकारियों की समझाइश और लिखित आश्वासन
आंदोलन की संवेदनशीलता को देखते हुए अपर कलेक्टर अरुण वर्मा, एसडीएम राहुल रजक और एसडीओपी शुभम तिवारी सहित भारी प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने आंदोलनकारी सरपंच संघ के प्रतिनिधियों से लंबी चर्चा की। प्रशासन की ओर से भरोसा दिलाया गया कि:
​अति-आवश्यक कार्य: अगले 4 से 5 दिनों के भीतर स्वीकृत कर दिए जाएंगे।
​डीएमएफ (DMF) कार्य: अन्य सभी जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) के कार्यों को 15 दिनों के भीतर प्रशासनिक स्वीकृति दे दी जाएगी।
​इस लिखित आश्वासन के बाद सरपंच संघ ने संतोष व्यक्त करते हुए अपना आंदोलन वापस ले लिया और चक्का जाम समाप्त कर दिया।
​यात्रियों को हुई भारी परेशानी, व्यवस्था पर उठे सवाल
हालांकि, करीब 24 घंटे तक चले इस बड़े चक्का जाम के कारण भानुप्रतापपुर–नारायणपुर मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इस दौरान भीषण गर्मी में यात्रियों, महिलाओं और बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों और राहगीरों ने इतनी लंबी अवधि तक जाम न खुलवा पाने और पुख्ता वैकल्पिक व्यवस्था न होने को लेकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं।

​रिपोर्ट: संतोष गर्ग,
वंदे भारत/ इंडिया न्यूज दर्शन
भानुप्रतापपुर

24/05/2026

चाहचाड पहुंचे शिवसेना प्रदेश महासचिव चंद्रमौली मिश्रा , बोले—दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई और परिवार को मिले उचित मुआवजा

​भानुप्रतापपुर की दर्दनाक घटना पर शिवसेना का आक्रोश, बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को बताया मौत का जिम्मेदार

​दुर्गकोंदल, भानुप्रतापपुर।

भानुप्रतापपुर क्षेत्र में एक गर्भवती महिला एवं उसके नवजात शिशु की उपचार के अभाव में हुई दर्दनाक मृत्यु के मामले को लेकर शिवसेना ने प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शनिवार को शिवसेना प्रदेश महासचिव चंद्रमौली मिश्रा के नेतृत्व में पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने दुर्गकोंदल विकासखंड के ग्राम चाहचाड पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी। इस दौरान दिवंगत जच्चा-बच्चा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की गई।
​बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर उठाए सवाल
​प्रतिनिधिमंडल ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक बताते हुए कहा कि:
​समय पर समुचित उपचार एवं स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण एक गर्भवती माता और उसके नवजात शिशु की असमय मृत्यु हो गई।
​प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लगातार बदहाल होती जा रही है, जिसका खामियाजा आम जनता को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है।
​"सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे और घोषणाएं करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई देती है। ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त चिकित्सक, आवश्यक संसाधन और समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यदि संबंधित गर्भवती महिला को समय पर उचित उपचार मिला होता, तो संभवतः मां और बच्चे दोनों की जान बचाई जा सकती थी।"
— चंद्रमौली मिश्रा, प्रदेश महासचिव (शिवसेना)
​शिवसेना की प्रमुख मांगें
​पार्टी ने इस दर्दनाक हादसे को लेकर प्रदेश सरकार के सामने मांगें रखी हैं: 1. जच्चा-बच्चा की मृत्यु के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
2. पीड़ित परिवार को इस कठिन समय में राहत देने के लिए उचित आर्थिक मुआवजा प्रदान किया जाए।
3. ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी

​प्रतिनिधिमंडल ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि केवल योजनाओं और घोषणाओं का प्रचार करने से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं होगा, बल्कि धरातल पर कार्य करते हुए आम जनता तक बेहतर चिकित्सा सुविधा पहुंचाना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
​शिवसेना ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो पार्टी जनहित में उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। पीड़ित परिवार से मुलाकात के दौरान शिवसेना कार्यकर्ताओं ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए न्याय की लड़ाई में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

​रिपोर्ट: संतोष गर्ग

24/05/2026

दिल्ली में 'एसटी डीलिस्टिंग' को लेकर महारैली

विशेष रिपोर्ट: संतोष गर्ग

​आज दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में 'जनजाति सुरक्षा मंच' (JSM) द्वारा एक विशाल "जनजाति सांस्कृतिक समागम" का आयोजन किया गया। इस रैली का मुख्य उद्देश्य उन आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची से बाहर (Delist) करने की मांग करना है, जिन्होंने ईसाई या इस्लाम धर्म अपना लिया है।
​इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, साथ ही कांकेर लोकसभा सांसद भोजराज नाग शामिल हुए, जिससे इस अभियान को और अधिक राजनीतिक और सामाजिक महत्व मिल गया है।

​ 'डीलिस्टिंग' की मांग क्या है?

​आंदोलनकारियों का तर्क सीधा है: जो आदिवासी अपना मूल धर्म और संस्कृति छोड़कर दूसरा धर्म (विशेषकर ईसाई या इस्लाम) अपना चुके हैं, वे अब भी एसटी (ST) दर्जे के तहत मिलने वाले आरक्षण और अन्य सरकारी लाभों का फायदा उठा रहे हैं। ऐसे धर्म-परिवर्तित लोगों को आदिवासियों की सूची से डीलिस्ट (बाहर) किया जाए, ताकि आरक्षण का वास्तविक लाभ केवल उन्हीं आदिवासियों को मिले जो अपनी मूल परंपराओं, संस्कृति और रीति-रिवाजों का पालन कर रहे हैं। इस समागम का मुख्य नारा था— "तू मैं एक रक्त, वनवासी-ग्रामवासी-नगरवासी, हम सब भारतवासी।"

​विशाल उपस्थिति: आयोजकों के मुताबिक, देश भर के 500 से अधिक आदिवासी समुदायों के लगभग 1.5 लाख से अधिक लोग पारंपरिक वेशभूषा में इस रैली में शामिल होने दिल्ली पहुंचे।
​शोभा यात्राएं: दिल्ली के विभिन्न इलाकों जैसे रामलीला मैदान, राजघाट, अजमेरी गेट और कुदेसिया पार्क से पांच भव्य सांस्कृतिक शोभा यात्राएं निकाली गईं, जो लाल किला मैदान पर आकर खत्म हुईं।
​सुरक्षा और ट्रैफिक: इस भारी भीड़ के कारण दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने सेंट्रल और नॉर्थ दिल्ली (जैसे नेताजी सुभाष मार्ग, जेएलएन मार्ग और राजघाट के आसपास) में दोपहर 12 बजे से देर रात तक भारी ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया था।
​राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और विवाद
​इस मुद्दे को लेकर देश की राजनीति में तीखी बहस छिड़ गई है:

पक्ष मुख्य तर्क / स्टैंड
समर्थक (JSM और संघ से जुड़े संगठन) उनका कहना है कि यह आदिवासियों की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करने और आरक्षण के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए जरूरी है।
विपक्ष (कांग्रेस व अन्य दल) कांग्रेस (विशेषकर झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्यों के नेताओं) ने इसे भाजपा का "राजनीतिक स्टंट" करार दिया है। विपक्ष का आरोप है कि इस मुद्दे के जरिए मूल आदिवासी अधिकारों (जल, जंगल, जमीन) और बेरोजगारी जैसे असल मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है।

हालांकि जनजाति सुरक्षा मंच साल 2005-06 से इस मांग को उठा रहा है। सरकार या भाजपा ने इस पर अभी तक कोई आधिकारिक कानून बनाने की घोषणा नहीं की है, लेकिन गृह मंत्री की इस कार्यक्रम में मौजूदगी यह साफ संकेत देती है कि आने वाले समय में देश के भीतर 'एसटी डीलिस्टिंग' का मुद्दा एक बड़ा रूप ले सकता है।

Bhojraj Nag Devendra Tekam

भानुप्रतापपुर में मां-नवजात की मौत से फूटा गुस्सा: बदहाल स्वास्थ्य सिस्टम और निजी अस्पताल की संवेदनहीनता पर उठे सवाल​विश...
24/05/2026

भानुप्रतापपुर में मां-नवजात की मौत से फूटा गुस्सा: बदहाल स्वास्थ्य सिस्टम और निजी अस्पताल की संवेदनहीनता पर उठे सवाल

​विशेष रिपोर्ट: संतोष गर्ग भानुप्रतापपुर (कांकेर)।
​कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने न केवल एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियाँ छीन लीं, बल्कि इलाके की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल भी खोल कर रख दी है। एक गर्भवती महिला और उसके नवजात बच्चे की दर्दनाक मौत के बाद पूरे क्षेत्र में शोक, आक्रोश और गहरी बेचैनी का माहौल है। आज हर आम और खास की जुबान पर एक ही सवाल है— आखिर गरीब और ग्रामीण जनता इलाज के लिए जाए तो जाए कहां?

"​खुशी का घर मातम में बदला"

​ग्राम भानबेड़ा की बेटी द्रौपदी नरेटी का विवाह वर्ष 2024 में ग्राम चाहचाड़ निवासी कमलेश कोमरा के साथ हुआ था। घर में नए मेहमान के आने की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन किसे पता था कि अस्पताल की चौखट पर पहुँचते ही ये खुशियाँ मातम में बदल जाएंगी। प्रसव पीड़ा होने पर परिजन द्रौपदी को लेकर स्थानीय शासकीय अस्पताल भानुप्रतापपुर पहुंचे थे।

"​सरकारी से निजी अस्पताल तक सिर्फ लापरवाही!"

​परिजनों का गंभीर आरोप है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) भानुप्रतापपुर में उन्हें न तो समुचित उपचार मिला और न ही आवश्यक सुविधाएं। आज भी इस क्षेत्र में:
​सोनोग्राफी मशीन का अभाव है।
​आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की भारी कमी है।
​महिला विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता न के बराबर है।
​सरकारी तंत्र से निराश होकर परिजन मजबूरन द्रौपदी को निजी गौतम हॉस्पिटल लेकर गए। आरोप है कि निजी अस्पताल प्रबंधन ने 'नॉर्मल डिलीवरी' का भरोसा देकर परिजनों को रोके रखा। समय बीतता गया, प्रसूता की हालत बिगड़ती गई और अंततः इलाज के अभाव और सही समय पर सही निर्णय न लिए जाने के कारण मां और नवजात दोनों ने दम तोड़ दिया।
​प्रशासनिक हलचल: CMHO ने गठित की उच्च स्तरीय जांच टीम
​मामला तूल पकड़ते ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), जिला उत्तर बस्तर कांकेर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी है।
​जांच दल के मुख्य सदस्य:
जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अधिकारी डॉ. वंदना व्यास (जांच अधिकारी), रोहित कुमार वर्मा (DPM), लहना सिंह नागर (जिला मीडिया अधिकारी), डॉ. विनोद वैद्य (सलाहकार), राज सिंह मड़ावी (सहायक नोडल अधिकारी) और स्वाति ओझा (जिला डाटा प्रबंधक)।
​जांच टीम ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर महिला के मेडिकल रिकॉर्ड और रेफरल प्रक्रिया की जांच की। इसके बाद टीम ने गौतम हॉस्पिटल पहुंचकर ऑपरेशन थिएटर, उपलब्ध सुविधाओं, ड्यूटी डॉक्टरों की भूमिका, सोनोग्राफी रिपोर्ट और दवाइयों के स्टॉक की गहन पड़ताल की है।
​राजनीतिक गलियारों में उबाल: सड़क से सदन तक आंदोलन की चेतावनी
​इस घटना ने क्षेत्र के राजनीतिक पारे को भी गरमा दिया है। पक्ष और विपक्ष दोनों ही दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं:
​शिवसेना की चेतावनी: शिवसेना प्रदेश महासचिव चंद्रमौली मिश्रा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। मिश्रा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "अगर समय पर संसाधन मिलते तो आज मां-बच्चा जिंदा होते।" उन्होंने पीड़ित परिवार को मुआवजा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
​कांग्रेस की समानांतर जांच समिति: ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सुनील बबला पाढ़ी ने निष्पक्ष जांच की मांग की। वहीं, जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष बसंत यादव के निर्देश पर एक 10 सदस्यीय स्वतंत्र जांच समिति (जिसमें सुभद्रा सलाम, सुनील बबला पाढ़ी, मृदुला भास्कर आदि शामिल हैं) का गठन किया गया है, जो अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
​न्याय के लिए सड़क पर उतरी जनता: निकाला कैंडल मार्च
​इस घटना के विरोध में भानुप्रतापपुर नगर के मुख्य चौक पर व्यापारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने पंकज वाधवानी की अगुवाई में एक विशाल कैंडल मार्च निकाला। मृत आत्माओं की शांति के लिए मौन रखा गया और लोगों ने नम आंखों से सिस्टम के खिलाफ अपना आक्रोश दर्ज कराया।

​बड़ा सवाल: कब सुधरेगी व्यवस्था?
​भानुप्रतापपुर का शासकीय अस्पताल पहले भी डॉक्टरों की अनुपस्थिति, एंबुलेंस की कमी और पोस्टमार्टम के नाम पर अवैध वसूली को लेकर बदनाम रहा है। अब क्षेत्र की जनता की नजरें स्वास्थ्य विभाग और जांच समितियों की रिपोर्ट पर टिकी हैं। देखना होगा कि क्या वाकई दोषियों को सजा मिलती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है?

Bhupesh Baghel Bhojraj Nag

अवैध रेत परिवहन ने बिगाड़ी सड़क की सूरत: क्षमता 10 टन, दौड़ रहे 35 टन के ओवरलोड हाइवा l
18/05/2026

अवैध रेत परिवहन ने बिगाड़ी सड़क की सूरत: क्षमता 10 टन, दौड़ रहे 35 टन के ओवरलोड हाइवा l

17/05/2026
17/05/2026

अवैध रेत परिवहन ने बिगाड़ी सड़क की सूरत: क्षमता 10 टन, दौड़ रहे 35 टन के ओवरलोड हाइवा

भानुप्रतापपुर | रिपोर्ट: संतोष गर्ग
भानुप्रतापपुर। क्षेत्र में बेखौफ चल रहे अवैध रेत परिवहन ने ग्रामीण अंचल की लाइफलाइन कही जाने वाली सड़कों को बर्बाद करना शुरू कर दिया है। ताजा मामला प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बनी जाड़ेकुर्से से कोड़ेकुर्से को जोड़ने वाली एकमात्र मुख्य सड़क का है। भारी-भरकम और ओवरलोड वाहनों की अंधाधुंध आवाजाही के कारण यह सड़क अब पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है, जिससे ग्रामीणों का चलना दूभर हो गया है।
नियमों की धज्जियां: क्षमता से तीन गुना ज्यादा भार
तकनीकी मानकों के अनुसार, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत बनाई जाने वाली ग्रामीण सड़कों की भार क्षमता अधिकतम 8 से 10 टन होती है। इसके विपरीत, इस मार्ग से रोजाना 80 से 100 भारी हाइवा गुजर रहे हैं। इन हाइवा वाहनों की खुद की क्षमता ही लगभग 35 टन होती है, और उस पर भी इनमें क्षमता से अधिक (ओवरलोड) रेत लादकर परिवहन किया जा रहा है। क्षमता से तीन से चार गुना अधिक भार पड़ने के कारण सड़क जगह-जगह से उखड़ चुकी है और बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गई है।

संरक्षण के साए में 'अवैध खेल'?
स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है। सड़क की बदहाली ने प्रशासन की मुस्तैदी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बड़ा सवाल: आखिर प्रतिबंधित और कम क्षमता वाली ग्रामीण सड़कों पर इन भारी वाहनों को प्रवेश कैसे मिल रहा है? इस अवैध रेत परिवहन को किसका संरक्षण प्राप्त है? प्रशासनिक कार्रवाई न होने के कारण ही इन रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं।

कार्रवाई का इंतजार
यह सड़क जाड़ेकुर्से और कोड़ेकुर्से के ग्रामीणों को ब्लॉक मुख्यालय और अन्य मुख्य मार्गों से जोड़ने का एकमात्र साधन है। सड़क के गड्डों में तब्दील होने से आए दिन दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। अब देखना यह होगा कि इस मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागता है या नहीं। क्या इन अवैध परिवहन करने वाले वाहनों पर सख्त कार्रवाई होगी, जिससे गांवों को जोड़ने वाली इस लाइफलाइन को पूरी तरह से नष्ट होने से बचाया जा सके?

परीक्षा तंत्र की साख पर सवाल: जवाबदेही से कब तक बचेंगे 'प्रधान'?हाल के वर्षों में भारत का प्रतियोगी परीक्षा तंत्र जिस गह...
14/05/2026

परीक्षा तंत्र की साख पर सवाल: जवाबदेही से कब तक बचेंगे 'प्रधान'?

हाल के वर्षों में भारत का प्रतियोगी परीक्षा तंत्र जिस गहरे संकट से गुजर रहा है, उसने न केवल लाखों छात्रों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, बल्कि सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के दावों की भी पोल खोल दी है। शिक्षा मंत्रालय और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के कामकाज पर उठ रहे सवाल अब केवल प्रशासनिक खामियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह व्यवस्थागत विफलता और राजनीतिक संरक्षण का एक गंभीर उदाहरण बनते जा रहे हैं।

बार-बार की गलतियाँ: इत्तेफाक या अक्षमता?

किसी भी व्यवस्था में एक बार गलती होना मानवीय भूल मानी जा सकती है, लेकिन जब गलतियाँ सिलसिला बन जाएँ, तो वह 'अपराध' की श्रेणी में आती हैं। नीट (NEET) जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में पेपर लीक, धांधली और यूजीसी-नेट (UGC-NET) जैसी परीक्षाओं का रद्द होना यह दर्शाता है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में मंत्रालय ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है। पिछले कुछ सालों में बार-बार होती इन घटनाओं ने छात्रों के बीच असुरक्षा और निराशा का माहौल पैदा कर दिया है।

शिक्षा व्यवस्था की साख पर बढ़ता संकट: जवाबदेही और सुधार की दरकार

भारत जैसे विशाल देश में, जहाँ करोड़ों युवाओं का भविष्य प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता पर टिका होता है, वहां परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठना गंभीर चिंता का विषय है। वर्तमान में शिक्षा मंत्रालय और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) जिस तरह के विवादों के घेरे में हैं, उसने सरकार की कार्यप्रणाली और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर कई तीखे प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

संस्थागत विफलता और जवाबदेही का अभाव

अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि गड़बड़ियां प्रशासनिक स्तर पर होती हैं, लेकिन यह भूलना गलत होगा कि किसी भी मंत्रालय का नेतृत्व उसकी सफलता और विफलता का उत्तरदायी होता है। पिछले कुछ समय में NEET और UGC-NET जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली की बार-बार होती घटनाओं ने छात्रों के मनोबल को तोड़ दिया है। जब एक ही तरह की त्रुटियां बार-बार दोहराई जाती हैं, तो यह केवल एक 'संयोग' नहीं, बल्कि 'संस्थागत विफलता' का प्रमाण बन जाती है। ऐसे में नेतृत्व पर सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर क्यों ठोस कार्रवाई के बजाय केवल 'ब्लैकलिस्ट' करने जैसी औपचारिकताओं तक सीमित रहा जा रहा है।

प्रशासनिक ढिलाई: NTA के अंतर्गत आने वाली परीक्षाओं में निजी केंद्रों की भूमिका और तकनीकी खामियां अक्सर भ्रष्टाचार का द्वार खोल देती हैं।

दंड का डर और कानून की शिथिलता

लेख का एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि जब तक दोषियों के मन में कठोर दंड का भय नहीं होगा, तब तक पेपर लीक जैसे अपराध नहीं रुकेंगे। केवल सेंटर को ब्लैकलिस्ट कर देना पर्याप्त नहीं है क्योंकि भ्रष्ट तत्व अक्सर नाम बदलकर दोबारा तंत्र में प्रवेश कर जाते हैं। इसके लिए:

कठोर कानून: 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माने जैसे प्रावधानों को केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर उतारने की आवश्यकता है।

त्वरित न्याय: पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट होने चाहिए।

निष्कर्ष: भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद हो

छात्र देश की रीढ़ होते हैं। यदि डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी बनने की नींव ही धांधली और भ्रष्टाचार पर रखी जाएगी, तो राष्ट्र का भविष्य अंधकारमय होगा। सरकार को यह समझना होगा कि राजनीतिक समीकरणों से ऊपर उठकर शिक्षा मंत्रालय में व्यापक सुधार और प्रशासनिक फेरबदल समय की मांग है। यदि समय रहते "धर्मेंद्र प्रधान" जैसे नेतृत्व और NTA जैसी संस्थाओं की कार्यशैली में आमूलचूल परिवर्तन नहीं किया गया, तो यह न केवल सरकार की छवि को नुकसान पहुँचाएगा, बल्कि देश की प्रतिभा के साथ एक अक्षम्य अपराध होगा।


संतोष गर्ग

13/05/2026

सड़क हादसा: संबलपुर के साप्ताहिक बाजार में वाहन की चपेट में आने से महिला की मौत

भानुप्रतापपुर। संबलपुर के साप्ताहिक बाजार में आज एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जिसमें एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई। मिली जानकारी के अनुसार, मृतिका की पहचान सरोज सिंह (पति बच्चन सिंह) के रूप में हुई है, जो भानुप्रतापपुर के वार्ड क्रमांक 12 की निवासी थीं। बताया जा रहा है कि महिला संबलपुर साप्ताहिक बाजार आई हुई थी, तभी एक तेज रफ्तार वाहन ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि महिला ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।

पुलिस की कार्रवाई और जांच जारी
हादसे की सूचना मिलते ही भानुप्रतापपुर पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भानुप्रतापपुर मर्च्युरी भेज दिया है।

वाहन चालक फरार
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दुर्घटना के बाद आरोपी वाहन चालक मौके से फरार होने में कामयाब रहा। पुलिस ने अज्ञात वाहन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर वाहन की तलाश शुरू कर दी है।

📢 *कॉलेज प्रवेश सूचना* 📢 *विभिन्न स्कूलों से 12वीं उत्तीर्ण किए समस्त विद्यार्थियों को सूचित किया जाता है कि शासकीय महर्...
12/05/2026

📢 *कॉलेज प्रवेश सूचना* 📢

*विभिन्न स्कूलों से 12वीं उत्तीर्ण किए समस्त विद्यार्थियों को सूचित किया जाता है कि शासकीय महर्षि वाल्मीकि स्नातकोत्तर महाविद्यालय भानुप्रतापपुर में विगत 18 वर्षों से संचालित रोजगारमूलक स्नातक पाठ्यक्रम BA(MC) – 1st Semester, सत्र 2026-27 में प्रवेश हेतु ऑनलाइन आवेदन दिनांक 01/05/2026 से प्रारंभ हो चुका है।*

*इच्छुक विद्यार्थी विश्वविद्यालय की वेबसाइट www.ktujm.ac.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।*

*किसी भी विषय में 12वीं उत्तीर्ण विद्यार्थी प्रवेश हेतू आवेदन कर सकते है।*

*प्रवेश एवं ऑनलाइन आवेदन संबंधी जानकारी हेतु संपर्क करें

📞 6261143203

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494669

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