24/05/2026
अगर माता-पिता दोनों आईएएस हैं, तो बच्चों को आरक्षण क्यों मिलना चाहिए?: सुप्रीम कोर्ट
कहा-आर्थिक और शैक्षिक रूप से उन्नत परिवारों को आरक्षण से बाहर आना चाहिए | ईडब्ल्यूएस में सामाजिक पिछड़ापन नहीं, केवल आर्थिक रूप से कमजोर | माता-पिता में से कोई भी आईएएस अफसर तो बच्चों को आरक्षण क्यों?
नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछड़े वर्गों में आर्थिक और शैक्षिक रूप से संपन्न परिवारों के बच्चों को आरक्षण का लाभ दिए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब माता-पिता दोनों या इनमें से एक भी आईएएस अधिकारी है, तो बच्चे को आरक्षण क्यों मिलना चाहिए? शैक्षणिक व आर्थिक सबलीकरण से सामाजिक गतिशीलता आती है। अगर इसके बाद भी बच्चों के लिए आरक्षण मांगा जाएगा, तो हम कभी इससे बाहर ही नहीं निकल पाएंगे। शीर्ष कोर्ट ने कहा, आरक्षण हासिल कर सामाजिक और आर्थिक रूप से आगे बढ़ चुके परिवारों को धीरे-धीरे आरक्षण व्यवस्था से बाहर आना चाहिए।
जस्टिस बीवी नागरत्ना व जस्टिस उज्जवल भुइयां की पीठ क्रीमी लेयर से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता के वकील शशांक रत्नू ने दलील दी कि संबंधित लोगों को सिर्फ आय के आधार पर नहीं, बल्कि उनके पद एवं सामाजिक स्थिति के आधार पर क्रीमी लेयर माना गया है। उन्होंने कहा, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और क्रीमी लेयर के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए।
जस्टिस नागरत्ना ने इस पर कहा कि ईडब्ल्यूएस में सामाजिक पिछड़ापन नहीं, सिर्फ आर्थिक कमजोरी होती है। सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन को मान्यता दी जा सकती है, लेकिन जब परिवार आरक्षण का लाभ लेकर निश्चित स्तर तक पहुंच चुका हो, तब संतुलन जरूरी है। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी कर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
शीर्ष कोर्ट फिलहाल उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें पिछड़े वर्गों के क्रीमी लेयर परिवारों को आरक्षण लाभ देने की मांग की गई है। इससे यह बहस फिर तेज हो गई है कि क्या आर्थिक और सामाजिक रूप से आगे बढ़ चुके परिवारों को आरक्षण का लाभ मिलता रहना चाहिए।
यह है मामला
मामला कर्नाटक के उम्मीदवार से जुड़ा है, जिसे कर्नाटक पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लि. में आरक्षित श्रेणी के तहत सहायक अभियंता (इलेक्ट्रिकल) पद के लिए चुना गया था। हालांकि, जिला जाति एवं आय सत्यापन समिति ने उसे क्रीमी लेयर में मानते हुए जाति वैधता प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया। समिति ने कहा कि उसके माता-पिता सरकारी कर्मचारी हैं और उनकी संयुक्त आय निर्धारित सीमा से अधिक है।
बीते साल विचार से किया था इनकार :
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल जनवरी में एक अलग मामले में मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) आरक्षण से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों के बच्चों को बाहर करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था।
कोर्ट ने कहा था... पंजाब राज्य बनाम दविंदर सिंह मामले में सात जजों की संविधान पीठ के अगस्त 2024 के फैसले में एससी-एसटी कोटा से क्रीमी लेयर को बाहर करने का जिक्र सिर्फ एक मत था और इस पर विधायिका को निर्णय लेना है।
वर्तमान में ओबीसी परिवारों के लिए क्रीमी लेयर की आय सीमा 8 लाख रुपये सालाना है। हालांकि कुछ श्रेणियां, जैसे उच्चपदस्थ संवैधानिक पदाधिकारी, वरिष्ठ नौकरशाह या शीर्ष सैन्य अधिकारियों के बच्चे, आय की परवाह किए बिना श्रेणी से बाहर रखे जा सकते हैं।