19/07/2026
**"कभी सोचा नहीं था कि एक दिन यही तस्वीरें मेरी सबसे बड़ी याद बन जाएँगी।
जिस हाथ ने बचपन में मुझे चलना सिखाया, वही हाथ अब हमेशा के लिए छूट गया।
जिस आवाज़ में अपनापन था, वह अब सिर्फ यादों में सुनाई देती है।
आज भी अनजाने में नज़र दरवाज़े की ओर चली जाती है, मन यही सोचता है कि आप वहीं बैठी होंगी और मुझे देखकर मुस्कुरा देंगी… लेकिन अब यह केवल एक अधूरी चाह बनकर रह गई है।
कहते हैं, समय हर घाव भर देता है… लेकिन कुछ खालीपन ऐसे होते हैं जो उम्रभर साथ रहते हैं। आपकी कमी शब्दों में कभी बयां नहीं की जा सकती।
गरुड़ पुराण का संदेश है कि शरीर नश्वर है, पर आत्मा अमर है। मृत्यु अंत नहीं, बल्कि आत्मा की आगे की यात्रा का एक पड़ाव है। इस संसार से मनुष्य के साथ केवल उसके कर्म, उसका प्रेम और उसकी स्मृतियाँ ही आगे बढ़ती हैं।
दादी, आपने हमें जो प्रेम, संस्कार और आशीर्वाद दिए, वही हमारी सबसे बड़ी पूँजी हैं। आप भले ही हमारी आँखों से ओझल हो गई हों, लेकिन हमारे हर अच्छे कर्म में, हर प्रार्थना में और हर धड़कन में हमेशा जीवित रहेंगी।
हे श्रीहरि, आपकी पावन आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें, सद्गति एवं मोक्ष प्रदान करें।
ॐ तत्सत्।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥ 🕊️🙏🌸