15/08/2015
"पहरेदार हिमालय के हम झोंके हैं तूफ़ान के
सुनकर गरज हमारी सीने फट जाते चट्टान के"
वाघा बॉर्डर पर देश के उन जवानों के साथ, जिनके वहां चट्टान
की तरह खड़े रहने के कारण से ही हम यहाँ सारे उत्सव मना पा रहे
हैं। स्वतन्त्रता दिवस पर एक सलाम उन सभी अटल, अक्षय, अभेद्य
सीमा-प्रहरियों के नाम! जय हिन्द!