17/02/2026
32वां स्थापना दिवस: म.प्र. राज्य निर्वाचन आयोग
📍 भोपाल | 16 फरवरी 2026
“बीएलओ से लेकर चीफ इलेक्शन ऑफिसर तक—सभी इलेक्शन कमीशन हैं, और सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है।”
— पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओ.पी. रावत
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के 32वें स्थापना दिवस समारोह में लोकतंत्र की मजबूती और स्थानीय चुनावों की अहमियत पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
🔹 वन नेशन-वन इलेक्शन में स्थानीय निकायों की भूमिका
पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओ.पी. रावत ने कहा कि “वन नेशन-वन इलेक्शन” लागू होने पर भी राज्य निर्वाचन आयोगों की भूमिका अनिवार्य रहेगी। पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव इन्हीं के माध्यम से संपन्न होने चाहिए।
🔹 हर वोट-हर निकाय महत्वपूर्ण
पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त आर. परशुराम ने कहा कि बुद्धिजीवी और मीडिया को भी स्थानीय निकाय चुनावों को गंभीरता से लेना चाहिए।
“चुनाव, चुनाव होता है—चाहे लोकसभा का हो या पंचायत का।”
उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में Prepare, Prepare & Prepare के मंत्र और नवीनतम तकनीकों को अपनाने पर बल दिया।
🔹 जमीनी लोकतंत्र और पारदर्शिता
दैनिक भास्कर स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के विभागाध्यक्ष नरेन्द्र कुमार सिंह ने 1952 के प्रथम लोकसभा चुनाव से लेकर वर्तमान तक के अनुभव साझा किए और बताया कि 1977 का चुनाव भारतीय मतदाता की जागरूकता का प्रतीक बना।
🔹 संविधान एक जीवंत ग्रंथ
वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ ने स्थानीय निर्वाचन में न्यायिक पहलुओं और कानूनी प्रक्रियाओं पर प्रकाश डाला।
🔹 म.प्र. राज्य निर्वाचन आयोग—‘निर्वाचन आयोगों का वर्ल्ड बैंक’
राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि हालिया बैठक में मध्यप्रदेश को राज्य निर्वाचन आयोगों का “वर्ल्ड बैंक” कहा गया।
उन्होंने मैदानी अधिकारियों की नवाचारों के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की और कहा कि इससे आयोग का आत्मविश्वास बढ़ा है।
✨ इस अवसर पर ‘निर्वाचन साहित्य ई-बुक’ का विमोचन और ‘प्रेक्षा मोबाइल ऐप’ का शुभारंभ किया गया।
उल्लेखनीय कार्य करने वाले कलेक्टर्स, उप जिला निर्वाचन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित भी किया गया।
लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने की दिशा में एक और प्रेरक कदम।