Culture Department Madhya Pradesh

Culture Department Madhya Pradesh संस्‍कृति संचालनालय, मध्‍यप्रदेश भोपाल
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मध्य प्रदेश की कला, साहित्य और संस्कृति को हर संभव उपायों द्वारा प्रोन्नत करना ही संस्कृति विभाग का परम उद्देश्य है। हमारा प्रयास सांस्कृतिक धरोहर, पुरातात्विक संपदा एवं ऐतिहासिक महत्व का यथास्थिति संरक्षण करना भी है। हमारे अन्य उद्देश्यों में जनजातीय और लोककला, साहित्य एवं संस्कृति का अनुरक्षण, संरक्षण, प्रोत्साहन, प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण शामिल है। राजभाषा, स्वाधीनता संग्राम से संबंधित कार्य, कलाक

ारों, साहित्यकारों, विद्वानों, पुरातत्वविदों एवं संगठनों का सम्मान हमारे अन्य कार्य हैं। इनके अतिरिक्त नाट्य विद्यालय, रंगकर्म प्रदर्शन तथा अध्ययन, अभिनय, प्रशिक्षण, प्रचार और विकास, अशासकीय सांस्कृतिक संगठनों को प्रोत्साहन एवं वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना, संगीत एवं ललित कला को प्रौन्नत व सुदृढ़ करना, विस्तार देना भी हमारे कार्यों में सम्मिलित है।

मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग अंतर्गत वीर भारत न्यास द्वारा आयोजित ‘’सदानीरा’’ समारोह के तहत 30 मई, 2026 को चौथे दिन भ...
01/06/2026

मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग अंतर्गत वीर भारत न्यास द्वारा आयोजित ‘’सदानीरा’’ समारोह के तहत 30 मई, 2026 को चौथे दिन भारत भवन के अंतरंग सभागार में बाल नाटक ‘’मिराज मेलोडीज़’’ ने दर्शकों का मन मोह लिया। वहीं पूर्व रंग के मंच पर जल केन्द्रित लोक-गीतों की प्रस्तुति भी दी गई। इसके अतिरिक्त बहिरंग के मंच पर नृत्य नाटिका ‘’जल प्रवाह’’ का मंचन हुआ। इन प्रस्तुतियों ने मनोरंजन के साथ-साथ जल संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और मानवीय संवेदनाओं का प्रभावशाली संदेश भी दिया।

भोपाल स्थित भारत भवन में मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग अंतर्गत वीर भारत न्यास द्वारा आयोजित ‘’सदानीरा’’ समारोह के तहत ...
01/06/2026

भोपाल स्थित भारत भवन में मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग अंतर्गत वीर भारत न्यास द्वारा आयोजित ‘’सदानीरा’’ समारोह के तहत 30 मई, 2026 को विशेष चित्रांकन कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में देशभर से लगभग 100 लोक, पारंपरिक और जनजातीय कलाकारों ने अपनी विशिष्ट कला शैलियों के माध्यम से जल संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन एवं भारतीय सांस्कृतिक विरासत का संदेश सम्प्रेषित किया।
कार्यशाला में पटुआ, कलमकारी, जोगी कलम, मंजूषा, मिथिला (मधुबनी), टिकुली, वारली, पिथोरा तथा पहाड़ी चित्रकला जैसी विविध लोक एवं पारंपरिक कला शैलियों के कलाकारों ने प्रतिभाग किया।

इन कृतियों के माध्यम से नदियों की अविरलता, जल स्रोतों का संरक्षण, जल और जीवन का संबंध तथा प्रकृति के प्रति भारतीय समाज की आस्था प्रमुखता से उभरकर सामने आई।

मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग एवं उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी द्वारा पद्मविभूषण पण्डित कुमार गंधर्व की स...
01/06/2026

मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग एवं उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी द्वारा पद्मविभूषण पण्डित कुमार गंधर्व की स्मृति में आयोजित दो दिवसीय संगीत समारोह में आप सभी का हार्दिक स्वागत है। 🎶

देवास की सांगीतिक धरा पर देश के प्रतिष्ठित एवं सुविख्यात संगीतज्ञ अपनी प्रस्तुतियों से शास्त्रीय संगीत की अनुपम छटा बिखेरेंगे। आइए, संगीत साधना और सुरों की इस अविस्मरणीय संध्या का हिस्सा बनें।

📅 6 एवं 7 जून, 2026
🕖 प्रतिदिन सायं 7:00 बजे से
📍 मल्हार स्मृति मंदिर, देवास

31/05/2026

प्रख्यात वायलिन वादक और संगीत रचनाकार अग्निमित्रा ने नौ वर्ष की अल्प आयु में अपने पिता श्री दयानिधि बेहरा से संगीत की प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त की। उस्ताद मोहम्मद अली अहेद तथा श्री सुनील सिंह मोहंता के मार्गदर्शन में संगीत साधना समृद्ध की।

हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में पारंगत होने के साथ-साथ उन्होंने पश्चिमी संगीत का भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। अपनी संगीत यात्रा का आरंभ उन्होंने नृत्य प्रस्तुतियों में संगतकार के रूप में की। बाद में एकल वादन के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की।

वर्ष 2009 से उन्होंने पद्मश्री श्रीमती अरुणा मोहंती, श्रीमती सुजाता महापात्रा, श्रीमती माधवी मुद्गल सहित अनेक प्रतिष्ठित ओडिसी नृत्यांगनाओं एवं समूहों के लिए संगीत रचनाएँ तैयार कीं। उन्होंने अमेरिका, कनाडा, यूके, जर्मनी, मलेशिया सहित अनेक देशों में प्रस्तुतियाँ देकर भारतीय शास्त्रीय संगीत को वैश्विक मंचों तक पहुँचाया।

हिन्दुस्तानी शास�

अभिव्यक्ति’ श्रृंखला की अगली कड़ी के माध्यम से हम आपको भारतीय शास्त्रीय नृत्य की अन्य सुंदर हस्त-मुद्राओं से परिचित करा र...
30/05/2026

अभिव्यक्ति’ श्रृंखला की अगली कड़ी के माध्यम से हम आपको भारतीय शास्त्रीय नृत्य की अन्य सुंदर हस्त-मुद्राओं से परिचित करा रहे हैं। क्या आप जानते हैं कि इन हस्त-मुद्राओं को हस्ताभिनय भी कहते हैं? इनके माध्यम से कलाकार अपने भाव अभिव्यक्त करते हैं। इन प्रभावशाली मुद्राओं की जानकारी हम आप तक लगातार पहुँचाते रहेंगे - हमसे जुड़े रहिए!

Baiga Dwellings reflect a way of life deeply connected to forests, simplicity, and indigenous knowledge systems.Traditio...
30/05/2026

Baiga Dwellings reflect a way of life deeply connected to forests, simplicity, and indigenous knowledge systems.

Traditionally found across the forested regions of Mandla, Dindori, Balaghat, Umaria, Shahdol, and Amarkantak in Madhya Pradesh, Baiga homes are built using natural materials such as bamboo, wood, mud, grass, and thatch, making them well-suited to local climatic conditions and woodland surroundings.

Earlier Baiga settlements are often arranged around a shared central courtyard, creating spaces for gathering, warmth, and everyday community interactions. Strong wooden fences known as ‘Parda’ traditionally surround the homes, offering protection while maintaining a close relationship with the forests.

Inside the house, Water Pots, Grain Storage units, Clay Stoves, and Everyday Tools are thoughtfully arranged, reflecting practicality and self-sustained living. Decorative clay-plastered walls and carved wooden doors further highlight the artistic sensibilities found within these indigenous dwellings.

Simple in structure yet rich in cultural meaning, Baiga homes continue to represent sustainable living traditions shaped by generations of community wisdom.

Keep discovering indigenous housing traditions of Madhya Pradesh with

भोपाल स्थित भारत भवन में आयोजित ‘सदानीरा’ समारोह के अंतर्गत 28 मई 2026 को अमृतमय जलमय एवं पानी नामा की मनमोहक प्रस्तुतिय...
29/05/2026

भोपाल स्थित भारत भवन में आयोजित ‘सदानीरा’ समारोह के अंतर्गत 28 मई 2026 को अमृतमय जलमय एवं पानी नामा की मनमोहक प्रस्तुतियाँ आयोजित की गईं। इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों को भावनाओं, संगीत और दर्शन की अद्भुत यात्रा का अनुभव कराया।

पानी नामा में वर्षा, नदी, सावन, पनघट और प्रेम को जीवन के विभिन्न रंगों से जोड़ते हुए प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रमों ने यह सशक्त संदेश दिया कि “जल ही जीवन है” और इसका संरक्षण मानवता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित त्रिनिदाद एवं टोबैगो के हाई कमिश्नर चंद्र दत्त सिंह ने भारत की सांस्कृतिक समृद्धि की सराहना की। वहीं नेपाल दूतावास के प्रथम सचिव दीपक पोरखिरे ने भारतीय जनजातीय संस्कृति एवं विरासत की प्रशंसा की।

29/05/2026

The Tribal Museum, Bhopal, offers a fascinating glimpse into the vibrant lives of Madhya Pradesh’s indigenous communities. Every gallery reflects the creativity, beliefs, and cultural identity of tribes such as the Gond, Bhil, Baiga, Saharia, and Korku, preserving their legacy through remarkable artistic expressions.

From handcrafted ornaments and traditional musical instruments to striking murals and sacred ritual artifacts, each display reveals a unique connection between people, nature, and heritage.

More than a museum, it is a living celebration of culture—where history breathes, art speaks, and the soul of Madhya Pradesh comes alive with every step.

Video credit -

संस्कृति, अध्यात्म और प्रकृति संरक्षण का अद्भुत संगम बना भारत भवन में आयोजित ‘सदानीरा समागम 2026’भागवत पुराण आधारित भव्य...
28/05/2026

संस्कृति, अध्यात्म और प्रकृति संरक्षण का अद्भुत संगम बना भारत भवन में आयोजित ‘सदानीरा समागम 2026’

भागवत पुराण आधारित भव्य नृत्य प्रस्तुति ‘गोवर्धन लीला’ ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ड्रोन तकनीक से आसमान में इंद्र स्वरूप और मंच पर होलोग्राफिक दृश्य ने प्रस्तुति को अद्वितीय बना दिया।
भगवान श्रीकृष्ण की लीला के माध्यम से जल, पर्वत, वृक्ष और प्रकृति संरक्षण का संदेश कलाकारों ने भावपूर्ण अंदाज़ में प्रस्तुत किया।

साथ ही ‘गंगा यात्रा’ की मनमोहक प्रस्तुति ने गंगा के अवतरण, प्रकृति और मानव हस्तक्षेप के प्रभाव को कलात्मक रूप में दर्शाया।

आज सदानीरा समागम में नदीगीत, अमृतमय एवं पानीनामा जैसी विशेष प्रस्तुतियाँ दर्शकों को संस्कृति और जल संरक्षण से जोड़ेंगी।

नई दिल्ली स्थित मध्यप्रदेश भवन में 29 मई, 2026 को सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जा रहा है। आगंतुक पद्मश्री कालूराम बाम...
28/05/2026

नई दिल्ली स्थित मध्यप्रदेश भवन में 29 मई, 2026 को सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जा रहा है। आगंतुक पद्मश्री कालूराम बामनिया के कबीर गायन एवं श्री महेश कुलश्रेष्ठ के मालवी फूलपाती नृत्य का भरपूर आनंद ले सकेंगे।

आप भी इन मनभावन कार्यक्रमों का रसपान करने अवश्य पधारें!

Address

संस्कृति संचालनालय गैस राहत एवं पुर्नवास भवन, 1, शिवाजी नगर(रेडक्रॉस अस्पताल के पीछे)
Bhopal
462016

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