27/03/2026
माँ भगवती सिद्ध पीठ, केरा (चक्रधरपुर) - 400 साल पुरानी आस्था और विरासत
🚩 400 साल की आस्था: केरा में सजेगा भव्य चैत्र मेला
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के केरा क्षेत्र में आयोजित होने वाला प्रसिद्ध चैत्र मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि लगभग 400 वर्षों पुरानी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है।
📜 इतिहास: कामाख्या से केरा तक की महिमा
• प्राचीन रियासत: ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, केरा कभी 84 मौजा वाली एक समृद्ध रियासत थी। यहाँ के शासक ठाकुर लोकनाथ सिंहदेव ने लगभग 400 वर्ष पूर्व इस मंदिर का निर्माण कराया था।
• राजा का स्वप्न: लोककथा है कि असम (कामरूप कामाख्या) से एक सिद्ध साधु माँ भगवती की दिव्य प्रतिमा लेकर यहाँ पहुँचे थे। उनके ब्रह्मलीन होने के बाद, राजा को स्वप्न में माँ ने उसी स्थान पर मंदिर निर्माण का आदेश दिया।
• प्राकृतिक सौंदर्य: मंदिर के पास बहने वाली नदी और घना वन्य परिवेश इस स्थल को और भी आध्यात्मिक बनाता है।
🔱 पूजा-पद्धति और अनूठी परंपराएं
केरा की पूजा विधि तांत्रिक और वैदिक दोनों परंपराओं का मिश्रण है:
1. चैत्र संक्रांति अनुष्ठान: 9 दिनों तक चलने वाली विशेष पूजा।
2. घट स्थापना: तंत्र-मंत्र विधि से ‘शुभ घट’ और ‘यात्रा घट’ की स्थापना।
3. कठिन भक्ति: श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर दहकते अंगारों पर चलते हैं और कांटों की सेज पर लेटकर माँ के प्रति समर्पण प्रकट करते हैं।
🎭 सांस्कृतिक संगम (छऊ और लोक कला)
मेले के दौरान मंदिर और राजबाड़ी परिसर जीवंत हो उठता है:
• छऊ नृत्य: पारंपरिक मुखौटा नृत्य की भव्य प्रस्तुति।
• लोक कला: पारंपरिक नाटक और ‘गरिया भार’ जैसे प्रदर्शन।
• साहसिक प्रदर्शन: आग पर चलना और कांटों पर लेटना इस मेले की विशिष्ट पहचान है।
📍 यात्रा मार्गदर्शिका (How to Reach)
यदि आप इस महासंगम का हिस्सा बनना चाहते हैं:
• निकटतम रेलवे स्टेशन: चक्रधरपुर (दूरी: लगभग 7-9 KM)
• निकटतम हवाई अड्डा: रांची (दूरी: लगभग 110 KM)
• प्रमुख तिथियां: हर वर्ष 13 और 14 अप्रैल को यहाँ लाखों श्रद्धालुओं का जुटान होता है।
“केरा का यह मेला सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी संस्कृति और अटूट विश्वास की एक जीवित दास्ताँ है।”