राजेश कुमावत

राजेश कुमावत मैं तू एक रक्त
मै नहीं हम...मैं - अंहकार का जनक है..और
हम - जोड़ने ( एकता ) का...हमें क्या पसंद हैं मैं या हम..

 #राष्ट्रीय_स्वयंसेवक_संघ में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि भगवा ध्वज को गुरु के र...
08/07/2026

#राष्ट्रीय_स्वयंसेवक_संघ में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि भगवा ध्वज को गुरु के रूप में प्रणाम किया जाता है। संघ की परंपरा में इसे श्री गुरु दक्षिणा उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
गुरु पूर्णिमा का महत्व
#गुरु_पूर्णिमा के दिन भारत में गुरु के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। संघ इस परंपरा को एक विशिष्ट रूप देता है।
संघ के अनुसार:
भगवा ध्वज त्याग, तपस्या, शौर्य, ज्ञान और राष्ट्रनिष्ठा का प्रतीक है।
कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं होता, इसलिए किसी व्यक्ति को गुरु न मानकर आदर्शों के प्रतीक भगवा ध्वज को गुरु माना जाता है।
इससे व्यक्तिपूजा के स्थान पर तत्त्वपूजा और आदर्शपूजा की भावना विकसित होती है।

सरकार के कुछ कर्मचारी अनैतिक गतिविधियों में लिप्त पाए जाते है तो सीधे मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांगते हो क्या? चंपतराय जी ...
02/07/2026

सरकार के कुछ कर्मचारी अनैतिक गतिविधियों में लिप्त पाए जाते है तो सीधे मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांगते हो क्या? चंपतराय जी राममंदिर आंदोलन से लेकर निर्माण तक के स्पर्शी घटक है, उनका इस्तीफ़ा सभी रामभक्तों के त्याग, समर्पण एवं बलिदान का घोर उपहास मात्र है। सभी रामभक्तों को विधर्मियों के इस षड्यंत्र से सतर्क रहने की आवश्यकता है।

19/06/2026

मैं हूं क्योंकि आप हैं
आत्मीयता का भाव सदैव मेरे मन में बना रहे इसी अपेक्षाओं के साथ मां जगत जननी जगदंबा की कृपा से आज मेरे जीवन के 47 बसंत पूर्ण हुए

जिसका कोई आकार नहीं पर जिस आकार के प्रति भी आपके मन में श्रद्धा और विश्वास हो आप उस आकार को ध्यान में ला सकते हैं?जिसका ...
30/05/2026

जिसका कोई आकार नहीं पर जिस आकार के प्रति भी आपके मन में श्रद्धा और विश्वास हो आप उस आकार को ध्यान में ला सकते हैं?

जिसका कोई नाम नहीं।पर जिस नाम के प्रति भी आपके मन में श्रद्धा और अटूट विश्वास हो आप उस नाम से उसको पुकार सकते हो।। चाहे वह राम हो या अल्लाह.......

उसकी कोई भाषा नहीं ।। वह केवल आपके मन की भाषा सुनता है । जितनी मन की गहराईयों से आप उसको पुकारोगे उतनी ही आपकी आवाज़ उस को सुनाई देगी। फिर चाहे आपकी प्राथना की भाषा संस्कृत हो या उर्दू हो........

उसका कोई स्थान नहीं। जहाँ पर भी बैठकर आप उसको मन की गहराईयों से पुकारोगे वो वहीं प्रकट हो जाएगा चाहे वो काशी हो, मक्का मदीना हो या फिर पश्चिम अफ्रीका का कोई स्थान

उसका कोई धर्म नहीं।आप किसी भी धर्म को अपना कर इंसानियत की राह पर चलकर उसको अपने पास पा सकते हो. वह केवल इंसानियत देखता है और कोई धर्म नहीं।

"सुखी होने के लिए व्यक्ति का शरीर और मन दोनों स्वस्थ होने चाहिएं, तभी व्यक्ति सुख पूर्वक जीवन जी सकता है।"*        अब सं...
26/05/2026

"सुखी होने के लिए व्यक्ति का शरीर और मन दोनों स्वस्थ होने चाहिएं, तभी व्यक्ति सुख पूर्वक जीवन जी सकता है।"*
अब संसार में अनेक घटनाएं होती रहती हैं, अच्छी भी और बुरी भी। *"जब बुरी घटनाएं होती हैं तब व्यक्ति दूसरों के साथ झगड़ा करता है। उससे उसकी मानसिक शांति खो जाती है। मन में चिंता और तनाव बढ़ जाते हैं।"*
"दूसरी ओर यदि व्यक्ति झगड़ा न करे, प्रेम से रहे, दुष्टों से बचकर रहे, दूर रहे, तो मन की शांति बनी रहती है। इस प्रकार से यदि मन शांत रहे, तो व्यक्ति का शरीर भी स्वस्थ रहता है। खाना पीना पढ़ना लिखना व्यापार नौकरी करना ईश्वर का ध्यान करना आदि सब कार्यों में उसका मन लगता है।
तब वह सुख पूर्वक जीवन जी सकता है।"और यदि लड़ाई झगड़ा करे, तो शरीर और मन दोनों रोगी हो जाते हैं। और फिर व्यक्ति तनाव युक्त जीवन जीता है। तब जीवन का पूरा लाभ नहीं हो पाता।"
इसलिए सब प्रकार से सुखी होने के लिए व्यक्ति को मन और शरीर से स्वस्थ होना आवश्यक है। और उसका उपाय यही है, कि "व्यक्ति झगड़ों से दूर रहे, प्रेम और शांति से से जीवन जीए, तो ही वह सुखी हो सकता है।"

16/05/2026

🚩 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 🚩
राजस्थान क्षेत्रीय प्रचारक निंबाराम जी भाई साहब
#राष्ट्रीय_स्वयंसेवक_संघ #संघ #राष्ट्र_प्रथम #भारतमाता #हिंदुत्व #संस्कार #सेवा #जयतु_भारतम्

यूं तो प्रत्येक व्यक्ति प्रसन्न रहना चाहता है, और उसके लिए वह अनेक प्रकार से प्रयत्न भी करता है। कुछ लोगों को यह भ्रम है...
13/05/2026

यूं तो प्रत्येक व्यक्ति प्रसन्न रहना चाहता है, और उसके लिए वह अनेक प्रकार से प्रयत्न भी करता है। कुछ लोगों को यह भ्रम है कि "यदि हम बहुत अधिक धन कमा लेंगे, तो हम प्रसन्न या सुखी हो जाएंगे।"तो इस भ्रांति से भी बचना चाहिए।
"ठीक प्रकार से जीवन चलाने के लिए भौतिक वस्तुओं की आवश्यकता होती है. यह बात ठीक है। "अतः आवश्यक भौतिक साधनों का संग्रह तथा उनका उपयोग अवश्य करें।" "परंतु उसकी सीमा अवश्य बनाएं। उससे आपका जीवन अच्छा चलेगा। परंतु भौतिक साधनों से व्यक्ति मन में भी प्रसन्न रहेगा, इस बात की गारंटी नहीं है।"
मानसिक प्रसन्नता के लिए तो अच्छे लोगों की संगति आवश्यक है। जिन लोगों के विचार शुद्ध हैं, जिनकी भाषा में नम्रता है। जिनकी भाषा मीठी तथा सभ्यता पूर्ण है। जिनका आचरण शुद्ध है। जो लोग सबके साथ न्याय पूर्वक प्रेम पूर्वक पक्षपात रहित व्यवहार करते हैं।
सच्चे ईश्वर भक्त देशभक्त और ईमानदार हैं, ऐसे लोगों की संगति से आपका मन प्रसन्न रह सकता है। इस बात की गारंटी है।"यदि आप ऐसे लोगों के साथ रहें। उनके साथ बातचीत करें। लेन देन करें। उठना बैठना आदि व्यवहार रखें। तो आप मानसिक रूप से भी प्रसन्न रह सकते हैं।
दुष्टों की संगति से तो आपके जीवन में अशांति ही बढ़ेगी। इसलिए उनसे तो बचना अर्थात दूर रहना ही ठीक है

11/05/2026

सांसारिक दांपत्य जीवन यात्रा के धर्म+पत्नी के संघ 21 वर्ष पूर्ण हुए

"आजकल व्यवहार में दिखावा अधिक है, और वास्तविकता कम।" ऐसा अधिकांश लोग अनुभव करते हैं। व्यक्ति का जीवन दोहरा हो गया है। उस...
10/05/2026

"आजकल व्यवहार में दिखावा अधिक है, और वास्तविकता कम।" ऐसा अधिकांश लोग अनुभव करते हैं। व्यक्ति का जीवन दोहरा हो गया है। उसके मन में कुछ और होता है, तथा वाणी में कुछ और।
"संसार में झूठ छल कपट चालाकी धोखाधड़ी धड़ल्ले से चल रही है। इन सारे दुष्ट व्यवहारों में लोग अपनी स्वार्थ सिद्धि करने के लिए बहुत मीठी-मीठी भाषा बोलते हैं, जबकि उनके मन में ऐसी मिठास नहीं होती। मन में तो कपट भरा हुआ होता है।
अवसर आते ही वे लोग इस तरह का व्यवहार कर देते हैं, जिससे दूसरे लोगों को बहुत झटका लगता है, बहुत दुख होता है। उन्हें बहुत आश्चर्य होता है, कि "इस व्यक्ति ने मेरे साथ ऐसा किया! इससे तो मुझे इस प्रकार के व्यवहार की आशा नहीं थी।" तब उन्हें बहुत कष्ट होता है।
अतः सदा सावधान रहें। "दूसरे व्यक्ति की मीठी-मीठी बातें सुनकर बिना परीक्षा किए, उस पर तत्काल विश्वास न कर लें। क्योंकि हो सकता है, कि दूसरे व्यक्ति के मन में कपट हो, चालाकी हो, और ऊपर ऊपर से वह मीठी भाषा बोलता हो। वह स्वयं को आपका हितैषी दिखलाना चाहता हो।"
उठना बैठना, लेना देना, अपने वचन को ठीक समय पर निभाना, उसकी भाषा के शब्दों और उसकी टोन का अध्ययन करना, चेहरे के लक्षणों और हाव भाव को ध्यान से देखना आदि आदि क्रियाओं का परीक्षण करने से व्यक्ति का पता चल जाता है, कि इसके मन में आपके प्रति कैसी भावना है
"अतः परीक्षा करके ही दूसरों पर विश्वास करें। जो मन में भी आपका हित चाहता हो, उस व्यक्ति की बातों पर विश्वास करें।" "तभी आप दुखों से बच पाएंगे, और सुख पूर्वक अपना जीवन जी पाएंगे। अन्यथा दुखों से बचना कठिन है।

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