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Satyendra Tiwari

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06/04/2017

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हमें बालिकाओं को सुरक्षा देनी है। यदि कोई मां-बहन रात 12 बजे घर जाना चाहे तो वह आराम से चले जाए। हम लाेग किसानों के लिए ...
25/03/2017
Yogi Adityanath first visit as CM today in Gorakhpur

हमें बालिकाओं को सुरक्षा देनी है। यदि कोई मां-बहन रात 12 बजे घर जाना चाहे तो वह आराम से चले जाए। हम लाेग किसानों के लिए भी योजना बना रहे हैं।
गोरखपुर [रजनीश त्रिपाठी]। मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार अपने शहर गोरखपुर पहुंचे गोरक्षपीठाधीश्वर महंत आदित्यनाथ योगी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्र 'सबका साथ, सबका विकासÓ को आत्मसात करने का संकल्प दोहराया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में प्रदेश का एक भी व्यक्ति उपेक्षित महसूस नहीं करेगा। जात-पात, लिग, मत और मजहब के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। सबका विकास होगा, पर तुष्टिकरण किसी का नहीं किया जाएगा।
महाराणा प्रताप इंटर कालेज के प्रांगण में आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह में आत्मविश्वास से चमक रहे योगी के चेहरे पर 22 करोड़ जनता की जिम्मेदारी सम्हालने का भाव साफ नजर आ रहा था। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभिनंदन मेरा नहीं, बल्कि प्रदेश की उस 22 करोड़ जनता का है, जिसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के आह्वान पर भाजपा को प्रचंड बहुमत दिया। प्रधानमंत्री की भावना के अनुरूप विकास की योजनाओं को राज्य के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना मेरे साथ-साथ आपकी भी जिम्मेदारी है। अपनी बात को विकास की तरफ ले जाते हुए योगी ने कहा कि सपा-बसपा के कुशासन में पूर्वांचल के लोग त्रस्त थे। पहली बार गोरखपुर और पूर्वांचल को बदलाव और विकास की तस्वीर तब नजर आई थी जब प्रधानमंत्री ने गोरखपुर में एम्स और फर्टिलाइजर का शिलान्यास किया था। यह शिलान्यास सिर्फ गोरखपुर में नहीं हुआ बल्कि इसके साथ ही पूर्वी भारत में विकास की नई शुरुआत हो गई। प्रधानमंत्री को हर वक्त उन्हें यूपी के भाग्योदय की चिंता सताती है। इसलिए अब गरीब, मजदूर, किसान, नौजवान, महिलाओं के साथ-साथ हर वर्ग पर केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार का ध्यान है। भाजपा के संकल्प पत्र का अक्षरश: पालन होगा।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं भाजपा अध्यक्ष के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने मुझे एक अवसर दिया है ताकि मैं केवल पूर्वांचल में सीमित न होकर प्रदेश की 22 करोड़ जनता की सेवा कर सकूं। नरेंद्र मोदी एवं अमित शाह का आदर्श हमारे सामने है। कार्यकर्ताओं का सहयोग ही हमारी ताकत है। हम प्रधानमंत्री के सपनों को साकार करेंगे। उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित करके रहेंगे।

अनुशासन की भी दी नसीहत : नेताओं और कार्यकर्ताओं को अनुशासन में रहने की नसीहत देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम धौंस जमाने का नहीं बल्कि कर्तव्य के बोध कराने का पद है। भाजपा अनुशासित पार्टी है। किसी को भी जोश में होश खोने की जरूरत नहीं है। उत्साह में ऐसा कोई काम न करेें, जिससे प्रदेश का माहौल खराब करने की ताक में बैठे तत्वों को मौका मिले।

ऐसी व्यवस्था होगी ताकि रात में भी अकेले जा सकें लड़कियां : एंटी रोमियो दल के खिलाफ शुरू हुई सुगबुगाहट का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि स्वेच्छा से घूमने, बातचीत करने या कहीं बैठे युगल को न छेड़ा जाए। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश में ऐसा माहौल बनाएगी ताकि रात में 12 बजे भी कोई लड़की अकेले कहीं आ जा सके।

नियम से ही चलेंगे बूचड़खाना : एनजीटी की सिफारिशों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने बूचड़खाने पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने अवैध कटान रोकने के लिए कई बार निर्देश दिए। उसके निर्देशों का जिन लोगों ने उल्लंघन किया है उन्हें एक प्रक्रिया के तहत हटाएंगे। जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले बगैर लाइसेंसी अवैध बूचड़खानों को बंद कराएंगे। नियम से चलने वालों को खतरा नहीं है।

छत्तीसगढ़ माडल अपनाकर दूर करेंगे समस्या : किसानों की समस्या पर सरकार की गंभीरता को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को अनाज का समर्थन मूल्य दिलाने और हर गरीब तक सस्ता अन्न पहुंचाने पर सरकार ने काम शुरू कर दिया। सरकार के दो मंत्री और चार अधिकारी छत्तीसगढ़ में वहां का पूरा सिस्टम देखने गए हैं। जल्द ही यहां के पूरे सिस्टम में बदलाव नजर आएगा। किसानों का शत-प्रतिशत गेहूं सरकार खरीदेगी।

कैलास मानसरोवर यात्रा के लिए एक लाख देगी सरकार : मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने लोगों को खुशखबरी देते हुए कहा कि सरकार अब कैलास मानसरोवर यात्रा के इच्छुक लोगों को एक लाख रुपये का अनुदान देगी। यात्रा पर जाने वाले स्वस्थ लोगों को इसका लाभ मिलेगा। गाजियाबाद या किसी स्थान पर बकायदा इसके लिए भवन भी बनेगा, जहां लोगों को सुविधाएं मिल सकेंगी।

15 जून तक खत्म होंगे सड़कों के गड्ढे : मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को 15 जून तक सड़कों का पैचवर्क पूरा करने का निर्देश दिया है। सभी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तीन माह के भीतर प्रदेश की सभी सड़के गड्डा मुक्त हो जानी चाहिए।
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कल गोरखनाथ मंदिर में कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी कल दिन में 11 बजे से गोरखनाथ मंदिर के दिग्विजय स्मृति सभागार में बाबा गंभीरनाथ शताब्दी पुण्यतिथि के समापन समारोह की अध्यक्षता करेंगे। इसमें मुख्य वक्ता पूर्व मंत्री एवं विचारक हृदय नारायण दीक्षित होंगे।
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सांसदों, विधायकों व क्षेत्रीय पदाधिकारियों को संबोधित करेंगे
मुख्यमंत्री 26 मार्च को ही तीन बजे से भाजपा के क्षेत्रीय कार्यालय पर आयोजित विशेष बैठक में भाग लेंगे। बैठक में गोरक्ष प्रांत के गोरखपुर, बस्ती एवं आजमगढ़ मंडल के सभी जिलों के सांसदों, विधायकों एवं क्षेत्रीय पदाधिकारियों को संबोधित करेंगे। यहां से निकलकर वह 4.30 बजे जीडीए सभागार जाएंगे, जहां कानून व्यवस्था एवं विकास कार्यो की समीक्षा करेंगे। 5.30 बजे वह गोरखपुर एयरपोर्ट के लिए प्रस्थान करेंगे। लगभग 6 बजे राजकीय विमान से लखनऊ चले जाएंगे।
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चमकाई गई सड़कें, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी के प्रथम गोरखपुर आगमन के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। एयरपोर्ट से लेकर एमपी इंटर कॉलेज एवं गोरखनाथ मंदिर तक सड़कों को चमकाया जा रहा है। जिन सड़कों की मरम्मत के लिए कभी योगी को पत्र लिखने के साथ ही अधिकारियों को फोन करना पड़ता था, उन सड़कों की हालत भी सुधर गई है।
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तीन दिन से प्रशासन सड़कों से अतिक्रमण हटाने में लगा है। पूरे रास्ते पर सुरक्षा का आलम यह है कि मंडल के अन्य जिलों से भी पुलिसकर्मी बुलाए गए हैं। खुद आइजी जोन मोहित अग्रवाल और कमिश्नर अनिल कुमार सुरक्षा एवं व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं। जिलाधिकारी संध्या तिवारी एवं एसएसपी रामलाल वर्मा ने कल को मातहत अधिकारियों के साथ उन सभी स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया, जहां आज व कल आदित्यनाथ योगी जाने वाले हैi

हमें बालिकाओं को सुरक्षा देनी है। यदि कोई मां-बहन रात 12 बजे घर जाना चाहे तो वह आराम से चले जाए। हम लाेग किसानों के लिए भी योजना बना रहे हैं।

18/11/2016

नोटबंदी के चाहे कितने भी फायदे गिनाए जाए लेकिन इसके नुकसान भी कम नहीं है। सबसे बड़ी तकलीफ तो अभी ही देखी जा सकती है जबकि ऐसी हालत हो गई है कि पूरा भारत बंद हो गया हो। बाजार, व्यापार सब ठप्प सा पड़ दिखाई दे रहा है। खुल्ले पैसे और दैनिक दिनचर्या के लिए जरुरी चीजों को खरीदने के लिए भी लोगों के पास पैसों की कमी हो रही है। सबसे बुरा असर तो उन लोगों पर पड़ा है जो कि रोज काम करके अपना गुजारा करते हैं, उनकी मजदूरी बंद हो गई हैं।
अब भारतीय स्टेट बैंक ने एक साल से तीन साल तक के लिए जमा की जाने वाली बड़ी धनराशि पर ब्याज दरों में 15 बेसिस प्वाइंट तक की कटौती कर दी है। यह कटौती इसलिए की गई है कि बैंकों के पास बहुत अधिक पैसा जमा हो रहा है। जिसका सीधा असर आम लोगों की सेविंग पर पड़ने वाला है। अगर आप बैंक में पैसा जमाकर उस पर अच्छा ब्याज कमाने की सोच रहे हैं तो अब ऐसा संभव होते नहीं दिखने वाला है। ब्याज में यह कटौती आने वाले दिनों में भी जारी रहने की संभावना है। फिक्स डिपॉजिट करके जो लोग पैसा कमाने की सोच रहे थे अब वैसे दिन नोटबंदी के बाद शायद नहीं रहे। लेकिन इसका दूसरा फायदा लोन लेने वालें लोगों को मिलने वाला है जिन्होंने लोन ले लिया है उन्हें भी और जो लोन लेने वाले हैं उन्हें सस्ता लोन मिलने की उम्मीद है।

04/09/2016

अब फिर से भारत कहलायेगा सोने की चिड़िया, मिला खजाना

Puri Dunia 4 Sept. 2016 15:09
नई दिल्ली ।भारत को पहले भी तो सोने की चिड़िया कहा जाता था । फिर अंग्रेजों ने इसे लूट लिया, लेकिन अब एक बार फिर ऐसा लग रहा है कि भारत को जल्द ही फिर से उसी पुराने नाम से जाना जायेगा।

दरसल उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ में स्थित अस्कोट की पहाड़ी के नीचे बेशकीमती धातुओं का खजाना भरा है। एक सर्वे के अनुसार सोना, तांबा, चांदी, लेड, शीशा, जस्ता जैसी एक लाख 65 हजार मीट्रिक टन धातु छिपी हुई हैं।

उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ में पहाड़ी के नीचे छिपी हुई है लाखों की धातु

जी हां इस खनिज संपदा देश को फिर से सोने की चिड़िया बना सकता है, फिर भी यहाँ की सरकार इस दिशा में कोई महत्वपूर्ण कदम उठाने का नाम नहीं ले रही है । अस्कोट की पहाड़ी के नीचे दबा यह ऐसा खजाना है जिसे पाने के लिए पूरी दुनिया नजरें टिकाए है।

मिनरल एक्प्लोरेशन कारपोरेशन (एमइसी) ने यहां पर 30 वर्षों तक खनन किया और धातु निकाली थी। इससे पहले डीजीएम ने यहां पर सर्वे कर धातु निकाला। डीजीएम के कुछ कर्मचारी अभी भी यहां पर हैं।यह जगह अस्कोट की तामखान (तांबे की खान) नाम से प्रसिद्ध है।

जबकि अस्कोट कस्तूरा मृग बिहार लागू होने के बाद एमइसी ने यहां पर खनिजों को निकालने का काम रोक दिया भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय के किए सर्वे के अनुसार वर्ष 2003 में कनाडा की प्रसिद्ध आदि गोल्ड कंपनी ने यहां हाथ डाला। सरकार से अनुमति लेकर आदि गोल्ड कंपनी की भारतीय शाखा ने यहां पर सर्वे किया।

सरकार इस दिशा में कोई महत्वपूर्ण कदम नहीं उठा रही है

बता दें कि कंपनी ने सर्वे की रिपोर्ट के बाद यहां पर धातुओं के खनन होने पर अस्कोट क्षेत्र में 200 करोड़ रुपये निवेश करने का निर्णय लिय। अस्कोट में कंपनी ने अपना कार्यालय खोला और सर्वे के लिए बाहर से अत्याधुनिक मशीनें आई।कंपनी ने सरकार से खुले खनन के लिए वर्ष 2007 में 30 साल की लीज की अनुमति मांगी, जिसे सरकार अभी तक नहीं दिया। सुस्त सरकारी रवैये से कंपनी ने अपना सामान समेट यहां ताला लगा दिया।

कई सालों पहले अस्कोट कस्तूरा मृग अभ्यारण्य भी हट चुका है। पहले खनन की लीज में अभ्यारण्य के कानून बाधक थे। बाधा दूर होने के बाद भी खनिजों को लेकर सरकार कोई रूचि नहीं दिखा रही है।

27/08/2016

Difference between shallow and deep earthquakes
The August 24, 2016 earthquake in Italy was a lot weaker than the one hit Myanmar the same day, but it did far more damage because it happened at a shallower depth. The Associated Press explains the difference between shallow and deep earthquakes.

Earthquake power

A quake’s destructive force depends not only on its strength, but also on location, distance from the epicentre and depth.

Quakes can strike near the surface or deep within the Earth. Most quakes occur at shallow depths, according to the U.S. Geological Survey.

Italy’s quake was very shallow, originating between 4 km and 10 km underground, according to Italy’s geological service and the USGS. The magnitude measurements also varied slightly between magnitude 6 and 6.2.

By contrast, the 6.8 quake in Myanmar was deeper at 84 km, which is considered an intermediate depth.

Shallow quakes

Shallow quakes generally tend to be more damaging than deeper quakes. Seismic waves from deep quakes have to travel farther to the surface, losing energy along the way.

Shaking is more intense from quakes that hit close to the surface like setting off “a bomb directly under a city,” said Susan Hough, a USGS seismologist.

The Italy quake devastated three towns, home to medieval structures built before there were building codes. Many buildings were made of brick or stone, which can fall apart during shaking.

“They’re very quaint, but they don’t withstand earthquakes very well,” Ms. Hough said.

Deep quakes

While deep quakes may be less damaging, they’re usually more widely felt.

Most of the destruction in the Myanmar quake was centred in the tourist town of Bagan where nearly 100 brick pagodas dating back centuries were damaged.

At least four people were killed in the Myanmar temblor, which also shattered ancient Buddhist pagodas.

Dekho phir janmashtmi aayi hai,Makhan ki handi ne phir mithas bhadhai hai,Kanha ki leela hai sabse pyari,Wo de tumhe dun...
25/08/2016

Dekho phir janmashtmi aayi hai,Makhan ki handi ne phir mithas bhadhai hai,Kanha ki leela hai sabse pyari,Wo de tumhe duniya bhar k khusiya sari.Happy Janmasthmi

22/02/2016

जाट आंदोलन: उत्तर भारत को 34 हजार करोड़ रुपये का नुकसान
Feb 22, 2016, 23:41 IST आज तक

जाट आंदोलन के कारण उत्तर भारत के राज्यों को आर्थिक गतिविधियां बाधित होने से 34 हजार करोड़ रुपये के नुकसान होने का अनुमान है. इसका आकलन करने वाले संगठन उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ने कहा है कि आपूर्ति बाधाओं के कारण जरूरी जिंसों के दाम में तेजी आ सकती है. वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही में भारी नुकसान
पीएचडी चैंबर के अध्यक्ष महेश गुप्ता ने कहा, ''न केवल हरियाणा में बल्कि उत्तर भारत के राज्यों में बाधित होने से जरूरी जिंसों की आपूर्ति प्रभावित हुई है.

ऐसे में मुद्रास्फीति पर इसके प्रभाव को खारिज नहीं किया जा सकता.'' गुप्ता ने कहा कि रेलवे, सड़क, यात्री वाहन, माल ढुलाई वाहनों के बाधित होने, सैलानियों की संख्या में कमी, वित्तीय सेवाओं में कमी, विनिर्माण, बिजली और निर्माण समेत उद्योग क्षेत्र में राज्यों के जीएसडीपी को वित्त वर्ष 2015-16 की अंतिम तिमाही में हो सकता है. उद्योग पर पड़ी दोहरी मार
उद्योग मंडल के अनुसार पर्यटन क्षेत्र, परिवहन एवं वित्तीय सेवाओं समेत सेवा गतिविधियों को आंदोलन के कारण 18 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है. इसके अलावा विनिर्माण, बिजली, निर्माण गतिविधियों एवं खाद्य वस्तुओं को नुकसान के कारण औद्योगिक एवं कृषि कारोबार गतिविधियों को का नुकसान हुआ है. साथ ही सड़क, रेस्तरां, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन समेत अन्य ढांचागत सुविधाओं को हुए नुकसान के कारण चार हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है. इस प्रकार, कुल मिलाकर जाट आंदोलन के कारण 34 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है. नौ राज्यों के सकल घरेलू उत्पाद पर असर
नुकसान का यह आकलन पंजाब, दिल्ली, चंडीगढ़, राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश समेत उत्तरी राज्यों के लिए किया गया है. उद्योग मंडल के अनुसार देश के सकल घरेलू उत्पाद में इन राज्यों की हिस्सेदारी है.

15/11/2015

कुछ पल थे खुशी के जो बीत गये,लगा ही नही की हम जीत गये,क्या करता अकेला मै ही,जब खुशी ने खुद साथ छोड़ दिया, थैंक्स...?

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