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08/11/2025

चीन की एक "पांडा डिप्लोमेसी" (Panda Diplomacy) नाम की नीति है।इसका मतलब है कि चीन अपने पांडा किसी देश को “देता” नहीं है,...
14/10/2025

चीन की एक "पांडा डिप्लोमेसी" (Panda Diplomacy) नाम की नीति है।
इसका मतलब है कि चीन अपने पांडा किसी देश को “देता” नहीं है, बल्कि “किराए पर” (loan) देता है।

सभी पांडा चीन के स्वामित्व में होते हैं।
कोई भी देश उन्हें खरीद नहीं सकता या अपने पास स्थायी रूप से नहीं रख सकता।

दूसरे देशों को पांडा केवल “लीज़” (lease) पर दिए जाते हैं।
यानी चीन अस्थायी तौर पर उन्हें कुछ सालों के लिए “उधार” देता है।

आमतौर पर हर जोड़ी पांडा के लिए देश को चीन को लगभग 1 मिलियन डॉलर (करीब ₹8 करोड़) प्रति वर्ष देना पड़ता है।

यह पैसा चीन में पांडा संरक्षण (conservation) पर खर्च किया जाता है।

अगर किसी दूसरे देश में रखे पांडा के यहाँ बच्चे होते हैं, तो वो बच्चे भी चीन की संपत्ति माने जाते हैं।
कुछ साल बाद उन्हें भी चीन वापस भेजना होता है।

आम तौर पर 10–15 साल का करार होता है।

समय खत्म होने पर पांडा वापस चीन लौट जाते हैं।

इसे "Panda Diplomacy" कहा जाता है क्योंकि
चीन पांडा को “दोस्ती” और “सांस्कृतिक संबंध” का प्रतीक मानता है।

भारतीय वायु सेना दिवस – 8 अक्टूबरहर साल 8 अक्टूबर को भारतीय वायु सेना दिवस मनाया जाता है। यह दिन 1932 में वायु सेना की स...
08/10/2025

भारतीय वायु सेना दिवस – 8 अक्टूबर
हर साल 8 अक्टूबर को भारतीय वायु सेना दिवस मनाया जाता है। यह दिन 1932 में वायु सेना की स्थापना की याद में मनाया जाता है। उस समय इसे "रॉयल इंडियन एयर फोर्स" कहा जाता था, और स्वतंत्रता के बाद इसे “भारतीय वायु सेना” (Indian Air Force) नाम दिया गया।

भारतीय वायु सेना का आदर्श वाक्य है — “नभः स्पृशं दीप्तम्” जिसका अर्थ है “गौरव के साथ आकाश को स्पर्श करो।”
यह वाक्य वायु सेना के साहस, अनुशासन और असीम पराक्रम का प्रतीक है।

वायु सेना देश की सीमाओं की रक्षा करने के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं और आपात स्थितियों में भी अहम भूमिका निभाती है। चाहे वह युद्ध का मैदान हो या राहत अभियान, भारतीय वायु सेना हमेशा देश की सेवा में तत्पर रहती है।

वायु सेना के प्रमुख विमान:
राफेल, सुखोई-30MKI, तेजस, मिराज-2000, मिग-29 जैसे आधुनिक युद्धक विमान भारतीय वायु सेना की ताकत हैं।

हमारा गर्व – हमारे वीर वायुसैनिक:
जो देश के लिए आसमान की ऊँचाइयों को जीतते हैं, वे सिर्फ सैनिक नहीं, बल्कि देश की शान हैं। उनका साहस, अनुशासन और समर्पण हर भारतीय के लिए प्रेरणा है।

हर उड़ान देश के नाम, हर सांस वतन के काम!

02/10/2025
1. वेदव्यास जन्म (व्यास पूर्णिमा)गुरु पूर्णिमा को आशाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाता है, यही दिन महर्षि वेदव्यास (कृष्ण ...
10/07/2025

1. वेदव्यास जन्म (व्यास पूर्णिमा)
गुरु पूर्णिमा को आशाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाता है, यही दिन महर्षि वेदव्यास (कृष्ण द्वैपायन) का जन्मदिवस माना जाता है। वेदव्यास ने वेदों को विभाजित कर महाभारत, पुराण और उपनिषद की रचना की और गुरुवर्ग परंपरा को आरंभ किया

परंपरा अनुसार, उन्होंने इसी दिन भगवद्गीता का प्रथम पाठ श्री गणेश की लिपिलेखन सहायता से आरंभ किया ।

2. गुरु‑शिष्य परंपरा का आदिकाल
गुरु पूर्णिमा उपासना की शुरुआत उनके शिष्यों द्वारा की गई — वेदव्यास ने शिष्यों को कहा कि वे इस पूर्णिमा पूर्वक ‑ गाना गीत, पूजा तथा भेंट द्वारा गुरु को सम्मानित करें ।

इसलिए यह पर्व गुरु‑शिष्य परंपरा की पूजा, आदर और समर्पण का प्रतीक बन चुका है।

3. बौद्ध और जैन धर्म में महत्व
बौद्ध धर्म में इस दिन बुद्ध ने सारनाथ में अपने पाँच सबसे निकट शिष्यों को पहली बार सारन्थ‑उपदेश (धर्मचक्र) दिया, जिसे ‘धर्मचक्र प्रवर्तन दिवस’ कहा गया

जैन धर्म में भगवान महावीर ने गौतम स्वामी को अपना प्रथम शिष्य स्वीकार किया, जिसे जैन गुरु‑दिन के रूप में मनाया जाता है ।

🌕 सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व
“गुरु” का अर्थ है - ‘जो अज्ञान (अन्धकार) को दूर करता है’। पurnima पूर्ण चंद्रमा जैसे ज्ञान का प्रकाश फैलाता है ।

यह दिन गुरुओं को, चाहे वे आध्यात्मिक हों या शैक्षिक, माता‑पिता से लेकर शिक्षक‑गुरुओं तक, सम्मानित करने का होता है

इस दिन विद्यार्थी, भक्त, अनुयायी अपने गुरुओं को फूल, फल, कृतज्ञता, समय तथा सेवा प्रदान कर सम्मानित करते हैं ।

🕉️ अभ्यास एवं समारोह
पूजा एवं आचरण: गुरु को अर्घ्य, दीप‑प्रभात, भेंट‑वस्त्र और भक्तिपूर्ण शुक्रिया ज्ञापन किया जाता है ।

उपवास: कई लोग हल्का व्रत रखते हैं—दही, फल या साधु भोजन ।

भजन–कीर्तन और आध्यात्मिक प्रवचन, नियमित गुरु‑सत्संग आयोजित होते हैं ।

दान और सेवा भी आम हैं—विशेष रूप से गुरु‑आश्रमों में।

🔍 Reddit से सुनिए अनुभव 🎯
“Guru Purnima is a very sacred day to worship the Gurus … a day to show gratitude to all those teachers… made us who we are.”

🧭 सारांश
विषय विवरण
समय आशाढ़ शुक्ल पूर्णिमा (जून–जुलाई में)
मूल महर्षि वेदव्यास का जन्म एवं भविष्य में उनके उपदेश
धार्मिक महत्त्व हिन्दू, बौद्ध, जैन तीनों में विशेष महत्व
परंपरा गुरु‑शिष्य-पारंपरागत गुरुओं का सम्मान
अनुष्ठान पूजा, उपवास, भजन‑कीर्तन, सेवा और दान

अगर आप गुरु पूर्णिमा की तारीख (2025/2026), इससे जुड़ी विशेष मान्यताओं या कोई रिवाज़ियों पर और जानकारी चाहते हैं, तो कृपया बताइए—मैं सहायता करने के लिए तै

🐘 वत्सला (Vatsala)उम्र: अनुमानित तौर पर 100 वर्ष से अधिकस्थान: पन्ना टाइगर रिज़र्व, मध्य प्रदेशजन्म: केरल के नीलंबुर जंग...
10/07/2025

🐘 वत्सला (Vatsala)
उम्र: अनुमानित तौर पर 100 वर्ष से अधिक

स्थान: पन्ना टाइगर रिज़र्व, मध्य प्रदेश

जन्म: केरल के नीलंबुर जंगल में, बाद में 1971 में मध्य प्रदेश लाई गईं और 1993 में पन्ना रिज़र्व में भेजी गईं
अद्भुत जीवन:

जंगलों में बाघों का पता लगाने वाली टीम का हिस्सा रहीं।

रिटायरमेंट के बाद ‘दादी’ की तरह युवा हाथियों की देखभाल करती रहीं, उन्हें मार्गदर्शन और सुरक्ष प्रदान किया
2003 व 2008 में एक नर हाथी ने उन पर हमला किया; पेट फटने जैसी चोटें आईं, पर डाक्टरों की देखभाल से बचकर निकलीं ।

अंतिम वर्ष:

दृष्टिहीन हो गईं, चलने में तकलीफ़ होने लगी।

Hinauta शिविर में रखी गईं, रोज़ाना नाला नहलाई जाती थीं और दलिया खिलाया जाता था
खैरैयाँ नाले के पास बैठने के बाद उठ नहीं पाईं और 8 जुलाई 2025 को उनका देहांत हो गया ।

सम्मान:

उन्हें ‘Nani Maa’, ‘Dadi Maa’ कहा जाता था।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने ट्रिब्यूट दिया: “हमारे जंगलों की मौन संरक्षक”

चेंगल्लूर दक्षयानी (Chengalloor Dakshayani)
उम्र: जन्म ~1930, मृत्यु: 5 फरवरी 2019, उम्र लगभग 88–89 वर्ष

स्थान: केरल में मंदिर हाथी, Travancore Devaswom बोर्ड द्वारा रखी गई

रिकॉर्ड:

2016 में एशिया की सबसे पुरानी कैद में रहने वाली हाथी बनीं

गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए नामांकन हुआ लेकिन औपचारिकता में कमी के चलते नहीं मिला

07/07/2025

The Fight

🐢 कछुआ – प्रकृति का शांति दूत 🐢कछुआ एक शांत और धीमी गति से चलने वाला जीव है, लेकिन इसकी उम्र, सहनशक्ति और ज़िन्दगी जीने ...
06/07/2025

🐢 कछुआ – प्रकृति का शांति दूत 🐢
कछुआ एक शांत और धीमी गति से चलने वाला जीव है, लेकिन इसकी उम्र, सहनशक्ति और ज़िन्दगी जीने का तरीका हमें बहुत कुछ सिखाता है।

🔍 जानिए कछुए के बारे में रोचक तथ्य:
✅ कछुए की उम्र 150 साल से भी ज्यादा हो सकती है।
✅ ये पानी और ज़मीन — दोनों जगह रह सकते हैं (कुछ प्रजातियाँ)।
✅ इनके कवच (shell) में हड्डियाँ होती हैं, जो इन्हें सुरक्षा देती हैं।
✅ ये अपने shell में पूरा शरीर समेट लेते हैं — यही इनका रक्षात्मक तरीका है।

🌍 पर्यावरण के लिए क्यों ज़रूरी हैं कछुए?
कछुए समुद्री और स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र (ecosystem) को संतुलित रखते हैं।
वे मृत जीवों को खाते हैं, जिससे जल प्रदूषण नहीं होता।
समुद्र के कछुए समुद्रतट पर अंडे देते हैं, जिससे रेत उपजाऊ होती है।

⚠️ क्या आप जानते हैं?
हर साल हज़ारों कछुए प्लास्टिक खाने या मछली पकड़ने के जाल में फंसने से मर जाते हैं।

🛑 बचाएं कछुए – बचाएं प्रकृति
❌ प्लास्टिक का उपयोग कम करें
❌ समुद्र या नदियों में कचरा न फेंके
✅ वन्यजीवों का सम्मान करें

21/05/2025

उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में तब सनसनी फैल गई जब एक घर के शौचालय की टंकी से अचानक सांपों का झुंड निकलता देखा गया। इस खौफनाक मंजर को देखकर पूरे मोहल्ले में दहशत का माहौल बन गया.

14/05/2025

12/05/2025

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