यूरेशिया निवासी

यूरेशिया निवासी “Nothing in life is to be feared, it is only to be understood

19/07/2026

मान लीजिए कोई आपके सिर पर पिस्तौल रखकर कहे कि मेरी मांग मानो, नहीं तो मैं तुम्हें गोली मार दूँ; या इसके उलट, वह अपने ही सिर पर पिस्तौल रखकर कहे कि मेरी मांग मान लो, नहीं तो मैं आत्महत्या कर लूँगा—इन दोनों में से कौन-सा रास्ता कानूनी है?

मैं तो कहता हूँ कि #भूख_हड़ताल पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून ही बना देना चाहिए।

कोई भूख हड़ताल पर बैठे तो सरकार को उस स्थान पर #अंतिम_संस्कार की सारी सामग्री भेजकर कड़ा संदेश दे देना चाहिए।

इस देश का सबसे बड़ा ब्लैकमेलर #गांधी था। उसके दुष्परिणाम देश आज भी भुगत रहा है और भविष्य की पीढ़ियाँ भी उसके इससे भी अधिक भयंकर दुष्परिणाम भुगतेंगी। यह दीवार पर लिखा हुआ सत्य है।

ये #मैग्सेसे_पुरस्कार प्राप्त करने वाले सभी राक्षस ही होते हैं।

मान लीजिए कि मादा #मेधा_पाटकर की भूख हड़ताल से ब्लैकमेल होकर पूरी #सरदार_सरोवर_नर्मदा_योजना रद्द कर दी गई होती, तो सौराष्ट्र, कच्छ और राजस्थान की क्या दशा होती?

ये गदराये जिस्म की मलिका....रामपुर की रहने वाली सुप्रिया शुक्ला जी हैँ.....ये इंस्टाग्राम पर नृत्य की वीडियो बनाती थीं.....
18/07/2026

ये गदराये जिस्म की मलिका....रामपुर की रहने वाली सुप्रिया शुक्ला जी हैँ.....
ये इंस्टाग्राम पर नृत्य की वीडियो बनाती थीं.... इसी दौरान ये सोशल मीडिया पर मेरे आप जैसे ठरकी लड़कों को अपने प्रेमजाल में फसाती थीं , फिर मिलने के लिए उनको रामपुर बुलाती थीं...

यहां होटल में मुलाकात होती थी..और क्रियाकलाप🫴🫴 के समय ही एंट्री होती थी इनके गुर्गों की....
और गुर्गे बकायदा न्यूड वीडियो बनाते और करते थे वसूली.... शर्म वश अधिकांश लोग इनकी शिकायत नहीं करते थे....

एक बार एक ब्यापारी के बेटे का इनपर दिल आ गया....घपाघप💧के पुरखुलूस मौके पर उसका भी वीडियो बना....उससे भी जबरदस्त वसूली हुई....बस यही इनकी आखिरी गलती साबित हुई..
बनिया व्यापारी के लड़के ने इनकी शिकायत थाने में की... क्यूंकि बनिये का पैसा लेना आसान नहीं होता दोस्तों....
वो बोला की -- इज्जत की भा का मोसड़ा ... मुझे पैसा ज्यादा प्यारा है... पैसे से बहुत इज्जत खरीद लूँगा..
पुलिस ने भी साथ दिया....

जिसके बाद अब सुप्रिया शुक्ला जी को गिरफ्तार कर लिया गया है... कुछ गुर्गे भी पकड़ में आ गए हैँ.... अन्य आरोपियों की भी तलाश जारी है....

इसीलिए कहा जाता है -

बुलाती है... मगर जाने का नई..... 😁😁

मजहबी चाहे कोई भी सेलीब्रिटी हो या किसी भी जाति का हो, सबसे पहले वो जैहादी मजहबी ही होता है।हिन्दूओ के चहेते क्रिकेटर यु...
18/07/2026

मजहबी चाहे कोई भी सेलीब्रिटी हो या किसी भी जाति का हो, सबसे पहले वो जैहादी मजहबी ही होता है।
हिन्दूओ के चहेते क्रिकेटर युसुफ पठान ने 16 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले की कथित ऐतिहासिक अदीना मस्जिद की तस्वीरें अपने सोशल मीडिया पर साझा कीं।

यूसुफ पठान ने मस्जिद की तारीफ करते हुए लिखा कि यह एक ऐतिहासिक धरोहर है, जिसे 14वीं सदी में इलियास शाही वंश के दूसरे शासक सुलतान सिकंदर शाह ने बनवाया था। यह मस्जिद 1373 से 1375 ईस्वी के बीच बनाई गई थी और उस समय यह भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे बड़ी मस्जिद थी। यह उस दौर की शानदार वास्तुकला को सलाम करते है।

इस ने हिन्दूओ के जले पर नमक छिडकने के लिये ऐसी जगह पर खडे होकर एक फोटो शेयर की है जिसमे दीवार पर धनुष साफ दिखाई देता है।
सच्चाई यही है यह मालदा का आदिनाथ मंदिर था, जिसपर मुस्लिमों ने कब्जा करके मस्जिद मे बदल दिया था ज्ञानवापी की तरह... वहां जाकर फोटो खिचवांकर पकी आदिनाथ मस्जिद है...🙄 अभी कुछ दिन पहले एक हिन्दू भगवा पहने हुये संत गए थे, उन्हें अनुमति नही मिली थी।
ये कोई अदीना मस्जिद नहीं, हिंदुओं का आदिनाथ मंदिर है

TMC सांसद युसूफ पठान मजहबी आक्रांताओं का कर रहा है बखान।

18/07/2026

हिंदू संस्थाओं को जलालुद्दीन उर्फ छांगुर मौलवी से यह सीख लेनी चाहिए कि चुपचाप अपना काम कैसे करते हैं

जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा भारत के 330 जिलों में अपना नेटवर्क बनाया कोर्ट के पेशकार से लेकर कई मुस्लिम पुलिस कर्मियों तक को अपने नेटवर्क में शामिल किया और देखते ही देखते 20000 से ज्यादा हिंदू लड़कियों महिलाओं का धर्मांतरण करवाया

और किसी को भनक तक नहीं लगने दिया

हमारे वाले अगर किसी का घर वापसी करेंगे तो घर वापसी करने के पहले ही सोशल मीडिया पर प्रसिद्ध होने के लिए बड़े-बड़े वीडियो डाल देंगे

काम कुछ नहीं होगा हो हल्ला ज्यादा करेंगे

सालों तक देश को एक सोची-समझी छवि बेची गई:सोनम वांगचुक को 3 Idiots_के असली "रैंचो" के रूप में पेश किया गया - वो गरीब लद्द...
18/07/2026

सालों तक देश को एक सोची-समझी छवि बेची गई:

सोनम वांगचुक को 3 Idiots_के असली "रैंचो" के रूप में पेश किया गया - वो गरीब लद्दाखी लड़का जो शून्य से उठा, टूटी हुई व्यवस्था को नकारा, और आम आदमी के लिए लड़ने वाला क्रांतिकारी आविष्कारक बन गया।

ये कहानी झूठ है।

3 Idiots का रैंचो किरदार कभी भी सोनम वांगचुक पर आधारित नहीं था। असल में मामला उल्टा है; वांगचुक की सार्वजनिक छवि फिल्म से बनाई गई है।

उनकी पूरी पब्लिक पर्सोना, हीरो वाली पूजा, और "पहाड़ों से निकले जीनियस" वाली कहानी सब 3 Idiots के दम पर खड़ी की गई। इसी फिल्म ने उन्हें राष्ट्रीय आइकन बना दिया। इसके बिना भारत के ज्यादातर लोग उनका नाम तक नहीं जानते।

सच्चाई कहीं कम सिनेमाई है।

वांगचुक का जन्म एक राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवार में हुआ। उनके पिता, “सोनम वांग्याल, लेह से कांग्रेस के विधायक थे और बाद में 1975 में J&K सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। जब उनके पिता सत्ता में आए तो परिवार श्रीनगर शिफ्ट हो गया। ये किसी गरीब, दबे-कुचले पहाड़ी लड़के की संघर्ष वाली कहानी नहीं थी। ये शुरुआत से ही पहुंच, पहचान और राजनीतिक विशेषाधिकार की जिंदगी थी।

उन्होंने IIT से पढ़ाई नहीं की। उन्होंने 1987 में रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज, श्रीनगर (अब NIT श्रीनगर) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में B.Tech किया - वही रीजनल कॉलेज जहाँ हजारों आम छात्र पढ़ते हैं। उस समय उनके पिता कांग्रेस के विधायक और मंत्री थे, इसलिए उनके एडमिशन में इसका फायदा मिला होगा। राजनीतिक परिवार का प्रभाव उन दरवाजे खोलता है जो दूर-दराज के असली गरीब छात्रों के लिए शायद ही खुलते हैं।

वो वैज्ञानिक नहीं हैं। योग्यता से वो मैकेनिकल इंजीनियर हैं जो बाद में पर्यावरण कार्यकर्ता बने, और अक्सर लद्दाख में विकास परियोजनाओं का विरोध करते रहे हैं।

Ice Stupa जैसे आविष्कारों के इतने प्रचार के बावजूद, उनके नाम पर *एक भी पेटेंट दर्ज नहीं है*। ना एक भी पेटेंट, ना एक भी रिसर्च पेपर।

फिर भी कांग्रेस के मंत्री के इसी विशेषाधिकार प्राप्त बेटे को "बेबस गरीबों की असली आवाज" के रूप में पेश किया जाता है।

यही पैटर्न दूसरों में भी दिखता है - जैसे *अभिजीत दीपके*, जो बोस्टन के महंगे लिबरल आर्ट्स कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं, या *सौरव दास*, दक्षिण दिल्ली के अमीर परिवार से CLAT में फेल अभ्यर्थी, जिसका जमीनी जनसेवा में कोई योगदान नहीं। इन्हीं लोगों को "आम, दबे-कुचले भारतीयों" का "प्रतिनिधि" बनाकर पेश किया जा रहा है।

यही असली कड़वी सच्चाई है:

कुलीन और राजनीतिक रूप से जुड़े वर्ग के एक हिस्से ने गरीब और वंचितों का मुखौटा पहनने की कला में महारत हासिल कर ली है। वो फिल्मों, मीडिया और चुनिंदा कहानियों के जरिए अपने इर्द-गिर्द cult बनाते हैं, जबकि सत्ता, विशेषाधिकार और प्रभाव वाली अपनी असल पृष्ठभूमि छिपाते हैं।

सोनम वांगचुक की कहानी "रैग्स टू रिवोल्यूशन" नहीं है। ये कहानी है कि कैसे राजनीतिक परिवार के विशेषाधिकार को "जमीनी बगावत" के रूप में दोबारा पैक करके बेचा गया।

मिथक उजागर हो चुका है। तथ्य झूठ नहीं बोलते।

--

ये पृथ्वीराज की दिल्ली नहीं है जहाँ मुहम्मद गौरी को बिठा दोगे ये अमित शाह की दिल्ली है, हमले का सोचा भी तो अफगानिस्तान भ...
18/07/2026

ये पृथ्वीराज की दिल्ली नहीं है जहाँ मुहम्मद गौरी को बिठा दोगे ये अमित शाह की दिल्ली है, हमले का सोचा भी तो अफगानिस्तान भी खो दोगे।

कॉकरोच दिल्ली का तख़्त हिलाने निकले थे लेकिन इस दिल्ली साम्राज्य का महाराजा वो है जिसने 12 साल गुजरात मे सिर्फ षड़यंत्र झेला है।

पांडव कुरुक्षेत्र जीते क्योंकि उसके पीछे एक कारण इतने वर्षो का वनवास भी था, दुर्योधन ने समस्या पैदा कर करके उन्हें मजबूत बना दिया था और इसका परीक्षण विराट युद्ध मे हुआ जब अकेले अर्जुन ने पूरी हस्तिनापुर की सेना को पस्त कर दिया।

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मे अमित शाह के साथ जो सब हुआ उसने उन्हें कई सालो तक परेशान रखा, गुजरात छोड़ना पड़ गया मगर उस संघर्ष से जो अमित शाह आज बन गए है वो ही अब विपक्ष के लिए घातक है। भारत के गृहमंत्री के लिए सबसे जरुरी तीन ही प्रोजेक्ट थे एक आतंकवादी हमले रोकना, दूसरे घुसपैठियों को रोकना और तीसरा जो सबसे जरूरी और सबसे कठिन था नक्सलवाद।

अमित शाह को 7 साल हो गए है और तीनो ही समस्या हल हो गयी है। आतंकी हमले हुए होंगे मगर 2008-09 वाला डर नहीं है, जितनी सरलता से ISI जो मर्जी किसी भी शहर मे धमाके कर रही थी वो अब बंद हो गए है। घुसपैठ रोकने के लिए अंतिम दीवार बंगाल बची थी जो भी अब मजबूत हो गयी।

गजवा ए हिन्द का प्रोजेक्ट अब कम से कम 50 साल पीछे जा चुका है और वो भी इस पर निर्भर है कि कांग्रेस को कम से कम 15 साल तो मिले तब ही भारत इस्लामिक राष्ट्र बन सकता है अन्यथा अब सारे दरवाजे बंद है।

लेकिन तीसरा और सबसे जरूरी है नक्सलवाद, ये रूस की क्रांति पर आधारित है। कम्युनिस्ट नहीं चाहते थे कि कांग्रेस को सत्ता मिले इसलिए उन्होंने हथियारों का सहारा लिया, ये कम्युनिस्ट तीन श्रेणी मे बंटे थे।

एक जो जंगलो मे नक्सलवाद फैला रहे थे, दूसरे जो कॉलेज और यूनिवर्सिटीज मे बच्चों के माध्यम से सरकार विरोधी मुहीम छेड़ रहे थे और तीसरे जो राजनीति मे उतरकर हल्ला मचा रहे थे, तीनो ही विदेशो से मिलने वाले समर्थन पर टिके थे। विदेशो से जो फंडिंग हो रही थी वही इनकी ऑक्सीजन थी।

लेकिन फिर होती है नोटबंदी, इसके बाद से ही असल मे सबकी कमर टूटी है। आतंकी घटनाये हथेली पर गिनने योग्य रह गयी है, नक्सली बर्बाद हो गए और पड़ोस मे पाकिस्तान भी पतन के रास्ते आगे बढ़ गया।

2019 मे अमित शाह गृहमंत्री बने और यही से असली क्रेकडाउन भी शुरू हुआ, सबसे पहले कॉलेज यूनिवर्सिटीज मे चुन चुन कर वे प्रोफेसर शांत कराये गए जो साम्यवाद का सपना देख रहे थे। अधिकारियो और जजों की नियुक्ति भी उसी हिसाब से बदली गयी, सोहराबुद्दीन को देसी ढंग से मारा था उसका भी सबक ले लिया।

नक्सलीयों के एक एक सरगना को बड़ी ही कसाईंनुमा मौत दी और वो भी क्लासिक ढंग से, मीडिया मैंनेजमेंट भी शानदार रहा कौन सी खबर किस तरह से दिखाई जायेगी यह भी सुनिश्चित हो गया। कम्युनिस्टो को हर राज्य मे साम नाम दंड भेद से मात दी और आज नतीजा ये है कि इस कैंसर का इलाज हो गया।

2029 तक भारत के गृहमंत्री के लिए इन 3 प्रोजेक्टस से जरूरी और कुछ नहीं होगा। अमित शाह सरदार पटेल के बाद सबसे योग्य गृहमंत्री है, मोहन यादव और भजनलाल शर्मा जैसी शिकायते जरूर है मगर वो शिकायते हमें इतना दिवालिया भी नहीं बनाती कि हम अमित शाह की योग्यता पर शक करें।

2016 मे जेएनयू के आंदोलन हुए थे तब एक अलग ही माहौल था, मीडिया की रिपोर्टिंग, बॉलीवुड का सपोर्ट और विपक्ष का हंगामा देखकर हम सभी ये सोचने को मजबूर थे कि 2014 मे सिर्फ सत्ता मिली है काम करने के लिए अभी एक अलग ही लड़ाई लड़नी है।

लेकिन आज सोनम वांगचुक का जो हाल हुआ है वो बता रहा है कि व्यवस्था कितनी बदल गयी है। आज बॉलीवुड कही नहीं है अब यदि आपको स्वरा भास्कर बॉलीवुड की पहचान लगने लगे तो गेट वेल सून ही कहूंगा। सोनम वांगचुक यदि खुद अपना आंदोलन करते तो शिकायत ना होती मगर इन्होने ऐसा प्लेटफॉर्म पकड़ा जहाँ सच मे कॉकरोच ही है।

यदि अरुनधति रॉय जैसी महिला आपके बगल मे बैठती है तो इससे जलील कुछ हो ही नहीं सकता। अभिजीत दीपके चाहता था कि एयरपोर्ट पर उसे गिरफ्तार कर ले ताकि केजरीवाल वाली नौटंकी वो भी खेले लेकिन हुआ उल्टा ही, पुलिस ने खुद जंतर मंतर की इज़ाज़त दे दी। इस आंदोलन ने वैसे भी इथेनॉल वाला संकट लोगो को भुला दिया।

अब सिर्फ नौटंकी हो रही है, 19 दिन बहुत ज्यादा होते है। मुझे निजी रूप से लगता है कि ये बंदा कुछ ना कुछ तो खा रहा है, अब समस्या यही है कि दिन निकलते जाएंगे और इसके पास विकल्प नहीं बचेगा। 20 को ये संसद भवन का घेराव करेंगे, जाहिर है पुलिस ही लाठी मारेगी, इनमे आधे से ज्यादा तो ABVP से हारे लेफ्ट छात्र संगठन है।

मोटा भाई आप तो दंड बजाओ हम आपके साथ है, जंगलो मे ज़ब सेना ने नक्सलियो को मारा वो हम नहीं देख पाए लेकिन दिल्ली की बीच सड़को पर ज़ब पुलिस नक्सलियो को पीटेगी वो 22 जनवरी और 5 अगस्त जितना ही ऐतिहासिक क्षण होगा।

जब देश में एमरजेंसी लगी तब पंजाब केसरी समाचार पत्र बहुत मुखरता से आपातकाल के खिलाफ मुद्दा उठा रहा था। इंदिरा सरकार इस बा...
18/07/2026

जब देश में एमरजेंसी लगी तब पंजाब केसरी समाचार पत्र बहुत मुखरता से आपातकाल के खिलाफ मुद्दा उठा रहा था। इंदिरा सरकार इस बात के लिए पंजाब केसरी के संचालक लाल जगत नारायण के खिलाफ हो उठी। तभी एमरजेंसी की आड़ में के पंजाब की जैल सिंग सरकार ने पंजाब केसरी की जालंधर स्थित प्रिंटिंग इकाई का बिजली कनैक्शन स्थाई रूप से काट दिया गया ताकि समाचार पत्रों की छपाई ना हो पाए। उन दिनों लाल जगत नारायण ने ट्रैक्टरों के माध्यम से छपाई केंद्र को चलवाया।

पंजाब केसरी लगातार सरकार के आपातकाल वाले अत्याचारों के विरुद्ध लिखता रहा। एमरजेंसी के बाद जब पंजाब में विधानसभा चुनाव हुए तो जैल सिंग सरकार बुरी तरह हार गई और जैल सिंग की बहुत बदनामी हुई। हार के बाद जैल सिंग अपनी हार का जिम्मेवार लाला जगत नारायण को ठहराते थे और लाला को जनसंघी बताने लगे।

खैर, आपातकाल में जनता पार्टी के नेताओं की प्रधानमंत्री बनने की लालच से जनता पार्टी सरकार गिर गई और इंदिरा गांधी की दुबारा वापसी हुई। नई इंदिरा सरकार में जैल सिंग को देश का गृहमंत्री बनाया गया। भिंडरांवाला जोकि जैल सिंग के जिले से थे और उनके खासमखास थे। उसी भिंडरांवाला द्वारा 1982 में पंजाब केसरी के संचालक लाल जगत नारायण की हत्या करवा दी गई लुधियाना के समीप।

लाला जगत नारायण की हत्या केस में भिंडरांवाला के भतीजे सहित 5 हत्या आरोपी गिरफ्तार हुए। भिंडरांवाला समय रहते ही हरियाणा चला गया गिरफ्तारी से बचने के लिए। पंजाब के मुख्यमंत्री उस समय दरबारा सिंह थे, जिन्हें जैल सिंग अपना विरोधी गुट मानते थे। मुख्यमंत्री दरबारा सिंह ने “जालंधर रेडियो से यह घोषणा करवाई कि भिंडरांवाला लाल जगत नारायण की हत्या के केस में नामजद है और वह ही इस केस में मास्टरमाइंड है, जिस भी राज्य में भिंडरांवाला हो कृपया उस राज्य की पुलिस उसे तुरंत गिरफ्तार करे।” इस घोषणा से हरियाणा सरकार की मजबूरी बन गई उसे गिरफ्तार करने की, तभी गृहमंत्री जैल सिंग ने हरियाणा के CM भजन लाल से बात कर उन्हें भिंडरांवाला की गिरफ्तारी से रोका।

जैल सिंग ने गांधी परिवार से बात कर दरबारा सिंग पर दबाव बनाया कि लाला जगत नारायण हत्या केस में भिंडरांवाला को पुलिस रिमांड में ना भेजा जाए और केस से उनका नाम हटाया जाए। भिंडरांवाला को पंजाब जाने के लिए कहा और वहां भिंडरावाले को एक महीने तक सरकारी गेस्ट हाउस में रखा गया। तभी गृहमंत्री जैल सिंग ने संसद में बयान देते हुए कहा कि, “संत भिंडरांवाले जी का लाला जगत नारायण की हत्या में कोई हाथ नहीं है”

तभी भिंडरांवाला का नाम केस से हटते ही वह वापिस अमृतसर स्थित हरिमंदिर चले जाते हैं। वहां जाकर भिंडरांवाले द्वारा लाला जगत नारायण के हत्यारों को सम्मानित किया गया शरेआम और कहा, “इन योद्धाओं ने कौम के हित में काम किया है लाला को मारके।”

सुलेमान खान जिस घर में रहता है वो PM आवास योजना में मिला हुआ है .....सुलेमान को राशन सरकारी मिलता है .....सुलेमान बीमारी...
17/07/2026

सुलेमान खान जिस घर में रहता है वो PM आवास योजना में मिला हुआ है .....

सुलेमान को राशन सरकारी मिलता है .....

सुलेमान बीमारी में इलाज़ भी आयुष्मान कार्ड से करवाता है .....

सुलेमान हर नागरिक सुविधा का भरपूर लाभ लेता है
लेकिन सुलेमान का दिल पाकिस्तान के लिए धड़कता है .......

और अपने इस पाकिस्तान के लिए धड़कते दिल से सुलेमान सोशल मीडिया पर ........

एक AI से बनी तश्वीर शेयर करता है जिसमें भारत के PM मोदी पाकिस्तान के PM के पैरों में झुके हुए हैं...

और तुर्रा ये कि इन सुलेमानों को गद्दार कह दो तो देश के कांग्रेस व लिबरल को बुरा लग जाता है ।

हमारा ताहिर हुसैन बेगुनाह है, अल्लाह जानता है, इसके आसपास के जितने भी पड़ोसी है सब ताहिर के कसीदे पढ़ रहे हैवो भी तब जब ...
16/07/2026

हमारा ताहिर हुसैन बेगुनाह है, अल्लाह जानता है, इसके आसपास के जितने भी पड़ोसी है सब ताहिर के कसीदे पढ़ रहे है

वो भी तब जब उसके घर से खुद हथियार और पत्थरों के ढेर और तेजाब मिले थे, हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के लिए प्रेरित करते भाषण और कई चश्मदीद जिन्होंने भीड़ को ताहिर के घर की ओर अंकित शर्मा को ले जाते देखा था

अधिकतर कह रहे है कि वे उस वक्त नहीं थे पर ताहिर हुसैन निर्दोष है, एक मजहबी वृद्ध व्यक्ति जो हिंदू इलाके में दुकान चलाता है उसे भी पता है कि ताहिर हुसैन निर्दोष है

मतलब हराम पना देख रहे हो?

अभी कुछ समय से ये गुट मजहबी अपराधियों को भी बचाने में लगा हुआ है, होली के रंग लगने पर हिन्दू युवक की हत्या करने वाले का एनकाउंटर हो या फिर बकरीद में हिन्दू युवक की हत्या कर देने वाले का बचाव करना हो

या फिर रेपिस्टों और गुंडों के एनकाउंटर हो

इनके अनुसार अगर अपराधी मजहबी हो तो उन्हें रियायत देते हुए छोड़ देनी चाहिए

लंदन क्यों मिनी पाकिस्तान बनता जा रहा है समझना इतना मुश्किल नहीं, ये इतने बड़े धुर्त है कि इनके क्या ही कहने

यह तस्वीर साल 2009 की है जब सूपर पीएम का बेटा ओर कांग्रेस का युवराज एक सभा को संबोधित कर रहा था,और उस समय देश मैं कांग्र...
16/07/2026

यह तस्वीर साल 2009 की है जब सूपर पीएम का बेटा ओर कांग्रेस का युवराज एक सभा को संबोधित कर रहा था,

और उस समय देश मैं कांग्रेस सत्ता मैं थी,

मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे सोनिया गांधी सुपर प्रधानमंत्री थी राहुल गांधी सुपर सुपर प्रधानमंत्री थे क्योंकि वह सरकार का ऑर्डिनेंस मंच से फाड़ने की हिम्मत रखते थे

राहुल जी बोल रहे हैं थे कि

"मेरे पिता कहते थे कि दिल्ली से भेजा एक रुपया, लोगों तक पहुंचते-पहुंचते 15 पैसे रह जाता है। आज 15 पैसे भी नहीं, बल्कि 05 पैसे पहुंचते हैं"

मतलब राहुल गांधी मंच से कह रहे हैं कि कांग्रेस जब सत्ता में होती है तब ₹100 में 95 रुपए का जाती है भ्रष्टाचार करती है

अब मोदी 6000 खाते में डालता है तो 6000 ही पहुंचता है। बीच में 85-95% खाने वाली दलाली बंद हो गई।

दलाल लोग कहां जाएंगे?

उनका परिवार कैसे चलेगा?

दलाल ऐश कैसे करेंगे

लोकतंत्र ख़तरे में है।

Address

Ghaziabad
201017

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when यूरेशिया निवासी posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category