15/12/2025
सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारत को
नारेबाज़ी से नहीं,
दूरदर्शी निर्णयों, साहसिक संवाद
और अटूट संकल्प से जोड़ा।
उन्होंने “एकता” को
कभी सत्ता की भाषा नहीं बनने दिया,
बल्कि उसे जनता के विश्वास,
सम्मान और सहभागिता की नींव बनाया।
आज जब एकता को
अक्सर चुप रहने,
एक जैसा सोचने
और बिना सवाल आदेश मान लेने से जोड़ दिया जाता है,
तो सरदार पटेल की विरासत
हमें ठहरकर याद दिलाती है—
सच्ची एकता दबाने से नहीं,
सुनने से बनती है।
डर से नहीं,
सम्मान से जन्म लेती है।
सरदार पटेल का सपना था—
एक ऐसा भारत
जो मज़बूत हो क्योंकि वह जुड़ा है,
न कि इसलिए कि वह ख़ामोश है।
वो भारत को निर्भीक देखना चाहते थे,
सम्मानित देखना चाहते थे,
एकजुट देखना चाहते थे—
डर के साये में नहीं,
विश्वास की रोशनी में।
भारत के शिल्पकार, महान स्वतंत्रता सेनानी, राष्ट्रीय एकता और अखंडता के प्रतीक, स्वतंत्र भारत के प्रथम गृहमंत्री, भारत रत्न “लौह पुरुष” सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की पुण्यतिथि पर सादर नमन ।
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Swami Prasad Maurya