22/11/2025
Day - 22
पुकार - गांधी मेरा बाप नहीं है।।
आप सब लोगों को एक रोचक तथ्य और बताता हूं क्योंकि बहुत लोग कहे मुझे की गांधी को राष्ट्रपिता कहना एक आस्था का मामला है तो मैं उनसे पूछना चाहता हूं भारत को माँ कहना क्या राजनीति का विषय है ?
एक किसी गलत दुष्प्रभाव का प्रचार क्या अखंड रूप ले सकता है इसको जानिए जो हमारे देश के वीर सपूत चिल्लाते हंसते हुए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दिए कि कभी तो उनकी आवाज उनके देशवासियों तक पहुंचेंगी ।।
आज तो कई माध्यम बन गए जिससे ये सारी जानकारियां बाहर आ रही और लोग इसे खुल के बोल पा रहे उसके बाद भी कुछ हमारे देशप्रेमियों को इस देवभूमि पे डर लग जाता है जबकि उनमें से सबसे ज्यादा युवा है जो एक जर्मन कुत्ते से या उन जैसों से प्रेरित होते रहते है क्योंकि वो तथाकथित बुद्धिजीवी अपना निर्णय खुद करने वाली अपने परिवार धर्म के खिलाफ आवाज उठाने को अपना निजी हक मानने वाली युवा पीढ़ी है।।
"अहिंसा परमो धर्मः"
महात्मा जी इतना ही सीखा के अपना ज्ञान रोक दिए पर इसके आगे का मैं दावे के साथ कहता हूं आज अपने बच्चे से पूछेंगे तो एक दो बार में उसे ये पंक्ति याद आ जाएगी लेकिन इस श्लोक को पूरा वो आपको नहीं बता पाएंगे उनका छोड़िए कई माता पिता जो शाम में बैठ कर अपने बच्चों की रोज के विद्यालय कर्म की पूर्ति करते करवाते है उनको भी नहीं पता होगा पूरा !!??
"अहिंसा परमो धर्मः , धर्म हिंसा तथैव च"।।।
ये श्लोक हमारी महाभारत का है जिसको हमारे महातपस्वी बालब्रह्मचारी महा पराक्रमी गंगापुत्र भीष्म पितामह जी ने कहा था ।।।
अर्थात अहिंसा परम धर्म है पर जो हिंसा धर्म की रक्षा के लिए हो उससे बड़ा कोई सात्विक कर्म या शुद्ध भाषा में धर्म नहीं है ।।
तो क्या महात्मा जी के हिसाब से छत्रपति शिवाजी महाराज संभाजी महाराज पृथ्वी राज चौहान लक्ष्मीबाई मंगल पांडे भगत सिंह और ऐसे कई मेरी भारत माँ के अन्य शूर वीर सपूत महात्मा के हिसाब से अधर्मी थे या आप मानने को तैयार हो गए है ।।।
विचार बहुत जरूरी है आज लेख है कल को जल्द ही हमारी आवाज भी सुनने को मिलेगी जो मेरे साथ है मैं उसके साथ हूं जो नहीं उसके साथ मैं विशेषकर रहूंगा ।।।
भारत माता की जय 🚩
जय श्री राम ❤️🚩