06/08/2026
उत्तराखण्ड की सबसे बड़ी चुनौती केवल पलायन नहीं, बल्कि अपनी पैतृक कृषि भूमि का धीरे-धीरे समाप्त होना है।
जब किसान खेती छोड़ने और भूमि बेचने को मजबूर हो जाए, तो हमें केवल चिंता नहीं, समाधान की दिशा में भी आगे बढ़ना होगा। चकबंदी उत्तराखण्ड की कृषि, गाँवों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने की एक महत्वपूर्ण पहल है।
आइए, इस जनजागरण अभियान का हिस्सा बनें। अधिक से अधिक लोगों तक यह संदेश पहुँचाएँ और उत्तराखण्ड की कृषि भूमि को बचाने में अपना योगदान दें।
🌱 भूमि बेचने की नहीं, भूमि बचाने की सोच अपनाएँ।
🌾 खेत-खेत में दूरी है, चकबंदी ज़रूरी है।
#चकबंदी #चकबंदी_उत्तराखण्ड #उत्तराखण्ड #कृषि #गांव_बचाओ #भूमि_बचाओ
#उत्तराखंड_पौड़ी में 112 नाली कृषिभूमि उनके मालिकों ने बेच दी, अब डीएम द्वारा निर्माण पर लगी रोक.🌴🌴🌳🌳🌳
मित्रों,
पौड़ी जनपद से आई यह खबर पूरे उत्तराखण्ड के लिए गंभीर चेतावनी है। समाचार के अनुसार लगभग 112 नाली उपजाऊ कृषिभूमि उनके वास्तविक भूमिधरों द्वारा बेच दी गई। जनाबिरोध को देखते हुए बाद में जिला प्रशासन द्वारा उस भूमि पर निर्माण कार्य रोकने की कार्रवाई की गई।
समाचार के एक अन्य वीडियो में रिपोर्टर जब भूमिधरों से पूछता है कि "इतनी सुंदर और उपजाऊ कृषि भूमि बेचने की आखिर क्या मजबूरी थी?" तो उनका उत्तर अत्यंत पीड़ादायक था। उनका कहना था कि खेत छोटे-छोटे टुकड़ों में दूर-दूर बिखरे हुए हैं, जंगली जानवर लगातार फसलें नष्ट कर देते हैं, खेती में लागत अधिक और आय नगण्य है। ऐसी स्थिति में हम सभी परिवारों ने विचार-विमर्श कर यह निर्णय लिया कि खेती से कुछ प्राप्त नहीं हो रहा, इसलिए भूमि बेचकर कोई अन्य रोजगार या कार्य किया जाए।
यह केवल एक गाँव की कहानी नहीं है, बल्कि उत्तराखण्ड के हजारों गाँवों की वास्तविकता है। जिसे हमें समझना होगा।
चकबंदी मंच उत्तराखण्ड का स्पष्ट मत है कि समस्या का स्थायी समाधान केवल भूमि बिक्री पर रोक लगाने से नहीं होगा, बल्कि प्रत्येक परिवार की बिखरी हुई कृषि भूमि को एक-दो स्थानों पर एकत्रित (चकबंदी) करने से होगा।
यदि किसी किसान की भूमि एक स्थान पर समेकित हो जाए तो—
• खेती करना सरल और लाभकारी बनेगा।
• जंगली जानवरों से सुरक्षा के सामूहिक उपाय संभव होंगे।
• आधुनिक कृषि तकनीक एवं मशीनों का उपयोग आसान होगा।
• बागवानी, औषधीय पौधों, जैविक खेती तथा कृषिजन्य लघु उद्योगों की स्थापना का मार्ग खुलेगा।
• कृषि-बागवानी के क्षेत्र में करोणों रुपयों की योजनायें जो चल रही हैं, वे सफल होंगी।
• युवाओं को अपने गाँव में ही रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे।
• गाँवों में आवादी बढने से स्कूल/अस्पताल/व्यावसायिक संस्थान आदि भी सुधरेंगे.
• सबसे महत्वपूर्ण, पैतृक कृषिभूमि गैरों को बिकने से बचेगी।
इसी उद्देश्य से चकबंदी मंच उत्तराखण्ड लंबे समय से आग्रह कर रहा है कि सरकार चकबंदी अधिनियम 2016 एवं नियमावली 2020 के प्रावधानों के अंतर्गत प्रत्येक जिले में कम से कम एक-एक "चकबंदी मॉडल गाँव" अनिवार्य रूप से विकसित करे। यदि शासन स्वयं पहल नहीं करता, तो चकबंदी मंच उत्तराखण्ड अपने स्तर पर तैयार गाँवों को "स्वैच्छिक चकबंदी मॉडल गाँव" के रूप में विकसित करने का प्रयास करेगा।
संतोष का विषय है कि आज उत्तराखण्ड के हजारों जागरूक भूमिधरों द्वारा अपनी-अपनी तहसीलों में ऑनलाइन एवं ऑफलाइन आवेदन भेजे जा चुके हैं। अनेक गाँवों में 60–70 प्रतिशत से अधिक परिवार आवेदन भेज चुके हैं तथा ग्रामसभाओं द्वारा चकबंदी के समर्थन में प्रस्ताव भी पारित किए जा चुके हैं।
मंच का तहसील प्रशासन से विनम्र आग्रह है कि यदि किसी कारणवश तत्काल सरकारी चकबंदी प्रक्रिया प्रारम्भ नहीं हो पा रही है, तो कम से कम प्रत्येक आवेदक को उसकी खातावार कुल भूमि का स्पष्ट विवरण उपलब्ध कराया जाए, ताकि इच्छुक भूमिधर आपसी सहमति से अपने खेतों का अदल-बदल कर स्वयं अपनी भूमि को एकत्रित (स्वैच्छिक चकबंदी) कर सकें। बाद में राजस्व अभिलेखों में आवश्यक संशोधन भी नियमानुसार किया जा सकता है।
साथ ही हमारा यह भी सुझाव है कि शासन-प्रशासन स्वयं ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों (ब्लॉक) तथा जिला पंचायतों के माध्यम से व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाए, ताकि प्रत्येक भूमिधर को यह जानकारी मिल सके कि वह चकबंदी हेतु ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन कैसे कर सकता है। जब जनता जागरूक होगी और प्रशासन सहयोग करेगा, तभी उत्तराखण्ड की कृषि भूमि सुरक्षित रह सकेगी।ताकि इच्छुक दो या दो से अधिक भूमिधर भी आपसी सहमति से अपने खेत आदलाबदली कर सकें।
आवेदन फ़ार्म/एप्लीकेशन इस लिंक से भरकर भेजें... https://www.facebook.com/chakbandi1985/posts/1459567492856696
आज आवश्यकता भूमि बेचने की नहीं, बल्कि भूमि बचाने की है।
और भूमि बचाने हेतु— "चकबंदी शक्त भूकानून सहित"।
ताकि चकबंदी होने के बाद कोई भी परिवार इसे कम से कम 5 वर्षों तक नहीं बेच पाए।
खेत-खेत में दूरी है,
चकबंदी ज़रूरी है।
केवला नन्द तेवाडी
चकबंदी मंच उत्तराखंड
Kewala Nand Tewari चकबंदी मंच उत्तराखंडKewala Nand Tewari