23/08/2026
लंबे समय से संविधान द्वारा प्रदत्त हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व की व्यवस्था यानी आरक्षण के खिलाफ माहौल तैयार किया जा रहा है। अब इसी अभियान को “आरक्षण में सुधार” जैसे शब्दों की आड़ में आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
कान खोलकर सुन लो—आरक्षण कोई खैरात नहीं है। यह सदियों से सामाजिक भेदभाव, असमानता और वंचना झेलते समाज को संविधान द्वारा दिया गया प्रतिनिधित्व का अधिकार है।
भारत सरकार और लखनऊ में बैठे सत्ताधीशों को स्पष्ट कहना चाहते हैं—आरक्षण व्यवस्था के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आरक्षण पर हमला सीधे तौर पर सामाजिक न्याय पर हमला है और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) सामाजिक न्याय से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगी।
हम यह भी देख रहे हैं कि आरक्षण के खिलाफ माहौल बनाने में मीडिया का एक बड़ा हिस्सा लगातार भूमिका निभा रहा है। हमारे अधिकारों के विपरीत विचार रखने वाले लोगों को बार-बार मंच देकर एकतरफा विमर्श खड़ा करने की कोशिश की जा रही है।
लेकिन याद रखिए—हमारे धैर्य की परीक्षा मत लीजिए। अगर हमारी आवाज को दबाने, नजरअंदाज करने और हमारे अधिकारों पर चोट करने का प्रयास जारी रहा, तो जनता लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगी।
मेनस्ट्रीम मीडिया में हमारा प्रतिनिधित्व भले ही सीमित हो, लेकिन हमारी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। मीडिया को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और आरक्षण जैसे संवेदनशील संवैधानिक मुद्दे पर निष्पक्ष, संतुलित और जिम्मेदार भूमिका निभानी होगी।
और जो लोग आरक्षण का विरोध करते हैं, आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) उन्हें खुली बहस की चुनौती देती है।
अगर आपके पास आरक्षण के खिलाफ तर्क और तथ्य हैं, तो सामने आइए। बहस हो—तर्क से, तथ्यों से और संविधान के दायरे में।
जय भीम! जय भारत! जय मंडल!
जय संविधान! जय आरक्षण!