23/12/2025
#स्वामीश्रद्धानंद जी #बलिदानदिवस पर शत शत नमन 🙏🏻
स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान दिवस के संदर्भ में, धर्मांतरण रोकने और "घर वापसी" से जुड़े विषयों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए उनके शुद्धि आंदोलन और समाज सुधार के प्रयासों को समझा जा सकता है। स्वामी जी ने 1923 में भारतीय शुद्धि सभा की स्थापना की, जिसका उद्देश्य धार्मिक और सामाजिक था, विशेष रूप से अस्पृश्यता और दलितों के उत्थान के माध्यम से हिंदू समाज में समानता लाना। उनका मानना था कि हिंदू धर्म में परिवर्तित लोगों को वापस लाने के लिए एक आंदोलन आवश्यक है।
धर्मांतरण रोकने और घर वापसी के विषय
शुद्धि आंदोलन: स्वामी श्रद्धानंद ने 'शुद्धि आंदोलन' की शुरुआत की, जिसका लक्ष्य उन लोगों को वापस हिंदू धर्म में लाना था जो परिवर्तित हो गए थे।
सामाजिक समानता: इस आंदोलन का धार्मिक लक्ष्य हिंदू समाज में समानता और उत्थान लाना था, खासकर अछूतों के बीच।
शिक्षा और जागरण: उन्होंने नारी शिक्षा और समग्र रूप से समाज के जागरण पर भी जोर दिया, ताकि लोग अपनी पहचान और गौरव को समझ सकें।
सांप्रदायिक सद्भाव: 1919 में, उन्होंने जामा मस्जिद के एक विशाल सभा में सभी धर्मों को मतभेदों को भुलाकर एकजुट होने का आह्वान किया।
व्यक्तिगत बलिदान: उनके "घर वापसी" और "परावर्तन" के कार्यों के कारण उन्हें धमकियाँ मिलीं और अंततः 23 दिसंबर, 1926 को उनकी हत्या कर दी गई।
वैचारिक प्रेरणा: स्वामी श्रद्धानंद के प्रयास आज भी उन लोगों को प्रेरित करते हैं जो स्व-धर्म और स्व-संस्कृति के महत्व पर जोर देते हैं।।
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#सुधांशु
*अरुणा नायडू*
*प्रांत प्रमुख सोशल मीडिया विभाग मालवा प्रांत*