Sadanand godbole jbp

Sadanand godbole jbp Politician

08/07/2026

जबलपुर के कर्ताधर्ताओंका अधिकारीयों पर कोई नियंत्रण नही है इनका शहर विकास यातायात अतिक्रमण से कोई लेना-देना नही है

07/07/2026

जबलपुर की यातायात व्यवस्था अत्यंत दयनीय है लेफ्ट,राईट टर्न सब पर आटो वाले,आटो मेकेनिक का कब्जा है कोई धनिधोरी नही।

सोमवार; दिनांक ६ जुलाई २०२६​विचारपूर्वक अपने जीवन को राष्ट्र के प्रति समर्पित करने वाली लक्ष्मीबाई केळकर का आज जन्मदिन ह...
06/07/2026

सोमवार; दिनांक ६ जुलाई २०२६
​विचारपूर्वक अपने जीवन को राष्ट्र के प्रति समर्पित करने वाली लक्ष्मीबाई केळकर का आज जन्मदिन है।
​हिंदू संस्कृति से अगाध प्रेम करने वाली महिलाओं में राष्ट्र-जागृति की ज्योत जलाने वाली आदरणीय लक्ष्मीबाई केळकर का जन्म ६ जुलाई १९०५ को नागपुर शहर में हुआ था।
​लक्ष्मीबाई का जन्म एक मध्यमवर्गीय और राष्ट्रीय संस्कारों से युक्त परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली उम्र में लोकमान्य तिलक के ओजस्वी और राष्ट्रप्रेरक भाषण सुने, जिससे उनके मन में स्वराज्य और स्वदेशी के बीज अंकुरित हुए। जब वह स्कूली शिक्षा प्राप्त कर रही थीं, तभी प्लेग की भयानक महामारी फैल गई और उनकी पढ़ाई रुक गई। महज १४ वर्ष की आयु में उनका विवाह वर्धा के केळकर परिवार में हो गया।
​विवाह के बाद वर्धा आने पर, वे संसार को केवल 'चूल्हा और चौका' (घर-गृहस्थी) तक सीमित न रखकर, गांधीजी के आश्रम में उनके साथ सूत कातने का काम करने लगीं। विवाह के केवल १२ वर्ष बाद ही उनके पति का निधन हो गया। संसार की जिम्मेदारी संभालते हुए भी लक्ष्मीबाई प्रभात फेरियों में भाग लेती थीं और गांधी आश्रम जाती थीं।
​जब हिंदू-मुस्लिम दंगे भड़के, तब उन्होंने देखा कि दंगाइयों ने हिंदू महिलाओं का अपहरण किया। इस घटना से उनके मन में गहरा आक्रोश पैदा हुआ। उन्होंने पहचान लिया कि महिलाओं का आत्मरक्षा के लिए शारीरिक रूप से सक्षम होना समय की मांग है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक महिला संगठन का होना आवश्यक है, यह विचार उनके मन में आया। उन्होंने अपने इस विचार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार के सामने व्यक्त किया। लक्ष्मीबाई केळकर की इस संकल्पना और उनकी आत्मीयता को पहचानकर डॉ. हेडगेवार ने उन्हें संगठन स्थापित करने की अनुमति दे दी। २५ अक्टूबर १९३६ को दशहरे के दिन वर्धा में उन्होंने "राष्ट्रसेविका समिति" की स्थापना की।
​कार्य का विस्तार और विचार
​राष्ट्रसेविका समिति की स्थापना के बाद उनके सामने यह सवाल खड़ा हुआ कि:
​महिलाओं को संगठन में कैसे लाया जाए?
​उन्हें क्या सिखाया जाना चाहिए?
​उनके सामने कौन सा विचार रखा जाए जिससे वे समझ सकें कि राष्ट्रधर्म क्या है?
​लक्ष्मीबाई ने बेहद सुनियोजित तरीके से राष्ट्रसेविका समिति के कार्य की शुरुआत की। उन्होंने प्रतिदिन महिलाओं को इकट्ठा करना शुरू किया। उनके सामने हिंदुत्व के विचार रखकर उन्हें उनके मन पर अंकित किया। स्वामी विवेकानंद के दर्शन (तत्वज्ञान) के बारे में बताया। स्वातंत्र्यवीर सावरकर के साहित्य के माध्यम से हिंदू धर्म से परिचित कराया। पंडित सातवलेकर के हिंदू संस्कृति के साहित्य का अध्ययन किया। उन्होंने हिंदी सीखी और उस दौर में, उस उम्र में वे साइकिल चलाना भी सीखीं। भारतीय परंपरा और संस्कृति का गहरा अध्ययन कर उन्होंने उस पर स्वतंत्र चिंतन किया और महिलाओं के सामने इसे प्रभावी ढंग से कैसे प्रस्तुत किया जाए, इसका अभ्यास किया। अपनी अत्यंत सात्विक और ओजस्वी वाणी से वे श्रोताओं को रामायण सुनाने लगीं। वे एक प्रभावी वक्ता और विचारक के रूप में जानी जाने लगीं।
​संस्थागत विकास और वैश्विक विस्तार
​लक्ष्मीबाई केळकर का कार्य गति पकड़ने लगा और कई महिलाएं उनके कार्य में स्वतः स्फूर्त होकर शामिल होने लगीं। १९५३ में उन्होंने "स्त्री जीवन विकास परिषद" की स्थापना की। शहर के प्रमुख डॉक्टरों को एकत्र कर महिलाओं को नर्सिंग (सुश्रूषा) का प्रशिक्षण दिलाया। वे योगासन के महत्व को जानती थीं, इसलिए दैनिक कार्यक्रमों में योगासन को शामिल किया गया।
​एक आदर्श सेविका कैसी होनी चाहिए? इसकी रूपरेखा तैयार कर उन्होंने अपने कुशल सांगठनिक कौशल से सेविकाओं को गढ़ने का काम शुरू किया।
​उन्होंने अपने पाठ्यक्रम में व्यायाम, योग, दंड (लाठी), छुरिका (खंजर) और नियुद्ध (मार्शल आर्ट) जैसी विधाओं को शामिल किया। महिलाओं में आध्यात्मिकता, शौर्य, साहस, धैर्य और राष्ट्रभक्ति का निर्माण किया। 'स्वस्थ शरीर में ही ओजस्वी मन का वास होता है', इसलिए उन्होंने 'बौद्धिक' (वैचारिक सत्रों) के माध्यम से महिलाओं का मानसिक विकास किया। उन्होंने कई शैक्षणिक संस्थान, सिलाई केंद्र, योग केंद्र, औषधालय, वनवासी महिलाओं के लिए छात्रावास और कई भजन मंडलियां चलाईं। उन्होंने राष्ट्रसेविका समिति को भारतीय महिलाओं के एक सुदृढ़ संगठन के रूप में सक्रिय किया। आज यह समिति न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी सक्रिय है और दुनिया के १६ देशों में इसका कार्य चल रहा है।
​विनम्र श्रद्धांजलि
​महिलाओं के लिए इतना बड़ा कार्य करने वाली लक्ष्मीबाई केळकर का २६ नवंबर को स्वर्गवास (देवाज्ञा) हो गया। "कृण्वन्तो विश्वमार्यम्" (हम पूरे विश्व को श्रेष्ठ बनाएंगे) का सपना देखने वाली साहसी, कुशल संगठनकर्ता, प्रखर राष्ट्रप्रेमी, हिंदू संस्कृति पर गर्व करने वाली और आत्मविश्वास की प्रतिमूर्ति आदरणीय लक्ष्मीबाई केळकर के चरणों में कोटि-कोटि नमन।

06/07/2026
कुशल संगठनकर्ता, ममतामयी मार्गदर्शक को जन्मदिवस की बधाई! 🚩​मध्य प्रदेश भाजपा की रीढ़, पूर्व मंत्री एवं पूर्व सांसद श्रीम...
02/07/2026

कुशल संगठनकर्ता, ममतामयी मार्गदर्शक को जन्मदिवस की बधाई! 🚩
​मध्य प्रदेश भाजपा की रीढ़, पूर्व मंत्री एवं पूर्व सांसद श्रीमती जयश्री बनर्जी (माताजी) को जन्मदिवस पर सादर प्रणाम।
​सिद्धांतों की राजनीति और निस्वार्थ जनसेवा का जो पाठ आपने हमें सिखाया है, वह अद्वितीय है। आपका आशीर्वाद और स्नेह हम सभी पर सदैव बना रहे, यही कामना है।
​"आपका समर्पित जीवन और आपकी कर्त्तव्यनिष्ठा हमारे लिए पथ-प्रदर्शक है।"
​जन्मदिन की कोटि-कोटि मंगलकामनाएं! 🙏💐

01/07/2026

श्रद्धा-सुमन: दादा ईश्वरदास रोहाणी जी की पावन स्मृति को नमन
​जन-जन के लाडले, सादगी और सेवा के प्रतिमान, स्वर्गीय ईश्वरदास रोहाणी जी की पुण्य स्मृति में आयोजित "स्मृति गौरव शिखर सम्मान" समारोह एक भावुक और गौरवपूर्ण क्षण का गवाह बना। इस गरिमामयी अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री मोहन यादव जी द्वारा समाज की 12 विशिष्ट विभूतियों को सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि दादा के सेवा-कार्यों की निरंतरता का प्रतीक है।
​सादगी, सेवा और संस्कारों का एक महासागर
​दादा ईश्वरदास रोहाणी जी का संपूर्ण जीवन निश्छल सादगी, निःस्वार्थ सेवा और उच्च संस्कारों का एक अनूठा संगम था।
​पद नहीं, प्रतिष्ठा पाई: मध्यप्रदेश विधानसभा के गरिमामयी अध्यक्ष पद को सुशोभित करने के बाद भी, अहंकार उन्हें छू तक नहीं सका। वे सत्ता के शीर्ष पर रहकर भी सदैव ज़मीन से जुड़े रहे।
​अंतिम जन की सेवा ही धर्म: भारतीय जनता पार्टी के एक निष्ठावान और कर्मठ साधक के रूप में, उन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबों, शोषितों और जरूरतमंदों के आंसू पोंछने में समर्पित कर दिया। उनके लिए समाज का हर वर्ग उनका अपना परिवार था।
​अपनत्व और सहजता की मिसाल
​"उनका दरवाज़ा हर किसी के लिए हमेशा खुला रहता था, और उनका दिल हर पीड़ित के लिए धड़कता था।"
​वे हर छोटे-बड़े व्यक्ति को जो आदर और आत्मीयता देते थे, उसने उन्हें हर दिल का 'दादा' बना दिया। उनका सहज व्यक्तित्व, अद्भुत कार्यशैली और जनसेवा का निश्छल भाव आज भी हम सभी के दिलों में जीवित है और युगों-युगों तक हमारा मार्गदर्शन करता रहेगा।
​विभूतियों का सम्मान, दादा को सच्ची श्रद्धांजलि है।
​अपनत्व और लोक-कल्याण की प्रतिमूर्ति, आदरणीय दादा ईश्वरदास रोहाणी जी की पावन और अमिट स्मृतियों को कोटि-कोटि नमन। शत-शत नमन। 🙏

01/07/2026
मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति सदस्य के रूप में मनोनीत किए जाने पर जबलपुर की यशस्वी पूर्व महापौर, क...
23/06/2026

मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति सदस्य के रूप में मनोनीत किए जाने पर जबलपुर की यशस्वी पूर्व महापौर, कर्मठ समाजसेविका एवं वरिष्ठ भाजपा नेत्री डॉ. श्रीमती स्वाति सदानंद गोडबोले जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।

आपके नेतृत्व, संगठन के प्रति समर्पण तथा जनसेवा के अनुभव से भारतीय जनता पार्टी को नई ऊर्जा एवं सशक्त दिशा प्राप्त होगी। ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं उज्ज्वल राजनीतिक भविष्य की मंगलकामना करते हैं।

“सेवा, संगठन और समर्पण की इस नई जिम्मेदारी हेतु अनंत शुभकामनाएँ।”
BJP Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav Hemant Khandelwal

Dr. Swati Godbole - Jabalpur Mayor Swati Godbole

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Jabalpur

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