30/10/2025
मुग़लई खाना” एक तरह से बनाया हुआ नाम है
Sohail Hashmi के मुताबिक, जो खाना आज हम “मुग़लई खाना” कहते हैं, वो असली मुग़ल बादशाहों के ज़माने के खाने से काफी अलग था। उनका कहना है कि “मुग़लई” या “मुग़लिया” जैसे नाम ज़्यादातर लोगों ने अपनी परंपरा और मार्केटिंग के लिए मशहूर कर दिए, जबकि इतिहास के हिसाब से ये पूरी तरह सही नहीं है। Sohail Hashmi बताते हैं कि मुग़ल दरबार में जो खाना खाया जाता था, वो आज की तरह सजा-धजा और बनावट वाला नहीं होता था। उनके मुताबिक, आज की बिरयानी, कबाब, हलवा और बाकी जो चीज़ें हम “मुग़लई” कहते हैं, उनमें वक्त के साथ लोकल स्वाद और रिवाज़ों का असर मिल गया है।
उन्होंने ये भी कहा कि ये ग़लतफ़हमी इसलिए हुई क्योंकि लोग इतिहास को आज के स्वाद और खाने के नज़रिए से देखते हैं। Sohail Hashmi का कहना है कि “मुग़लई खाना” एक तरह से बनाया हुआ नाम है, जो बिज़नेस और परंपरा से जुड़ा है, न कि पूरी तरह सच्चा इतिहास। इसलिए जब हम मुग़लों के खाने की बात करते हैं, तो हमें समझना चाहिए कि असली मुग़ल खाना क्या था और आज जो “मुग़लई खाना” कहा जाता है, वो क्या है। उनका कहना है कि इतिहास को नामों और परंपराओं से नहीं, बल्कि सबूतों और असली बातों के आधार पर समझना चाहिए।
i.habib.1
with.arsalan