22/08/2026
*राजस्थान का अनोखा गांव - पिपलांत्री*
राजस्थान में अक्सर सूखा, पानी की कमी और बेटियों को बोझ समझने की कहानियाँ सुनने को मिलती हैं। लेकिन राजसमंद जिले का छोटा सा गांव *पिपलांत्री* इन सभी धारणाओं को तोड़ता है। यह गांव आज पूरे दुनिया के लिए एक मिसाल है।
पिपलांत्री की इस अनोखी पहचान के पीछे हैं गांव के पूर्व सरपंच *श्याम सुंदर पालीवाल*। 2006 में उनकी बेटी किरण की मृत्यु के बाद उन्होंने एक संकल्प लिया - बेटी के नाम को जिंदा रखने का।
यहाँ का नियम है:
*जब भी गांव में किसी बेटी का जन्म होता है, तो:*
1. गांव वाले मिलकर 111 पेड़ लगाते हैं।
2. बेटी के माता-पिता गांव की पंचायत में 10,000 रुपये जमा करते हैं और पंचायत 31,000 रुपये अपनी तरफ से जोड़ती है। कुल 41,000 रुपये की FD बेटी के नाम पर कर दी जाती है।
3. गांव के लोग एक शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करते हैं कि वे बेटी को पढ़ाएंगे, बाल विवाह नहीं करेंगे और पेड़ों की देखभाल अपने बच्चों की तरह करेंगे।
पिछले 18 सालों में इस गांव में 350 से ज्यादा बेटियों के जन्म पर 4 लाख से ज्यादा पेड़ लगाए जा चुके हैं। कभी मार्बल खन से उजड़ा हुआ यह इलाका आज फिर से हरा-भरा हो गया है। इन पेड़ों में नीम, आम, आंवला, शीशम के पेड़ हैं जो पर्यावरण के साथ-साथ ग्रामीणों की आमदनी का जरिया भी बने हैं। एलोवेरा की खेती से महिलाओं को रोजगार मिला है।
पिपलांत्री सिर्फ पेड़ नहीं लगाता, यह सोच बदलता है। यहां बेटी का जन्म उत्सव की तरह मनाया जाता है। यह सिखाता है कि बेटी और प्रकृति - दोनों ही जीवन का आधार हैं। अगर दोनों को बचाया जाए तो भविष्य खुद-ब-खुद सुरक्षित हो जाएगा।