22/08/2026
शिव व्यवस्था : जब सुख दुख..जीवन में आते जाते रहते है..तो जीवन में स्थिर क्या रहता हैं..?
सुख में अति-उत्साह नहीं और दुख में निराशा नहीं—दोनों परिस्थितियों के बीच अपनी चेतना को स्थिर रखना ही 'समत्व' है..!!
रीकृष्ण ने अर्जुन को यही समत्व का ज्ञान दिया, और भगवान शिव ने विष को गले में धारण कर दुनिया को दिखाया कि विपरीत परिस्थितियों में भी शांत और संतुलित कैसे रहा जाता है..!!
शिव: सदा सहाय: 🙏