Goswami Nabha Dass International Consciousness Society

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Goswami Nabha Dass International Consciousness Society One Heritage • One Humanity • One Future. Uniting followers of Goswami Guru Nabha Dass Ji worldwide. Sastipe thaj Baxt!

Honouring our heritage, inspiring education, promoting equality, and welcoming Romani (Roma), Lom, and all who share this journey.

26/08/2026

Om Namah Shivay

25/08/2026

GNICS

24/08/2026

Jai Goswami Nabha Dass Ji

Jai Goswami Nabha Dass Ji
24/08/2026

Jai Goswami Nabha Dass Ji

09/08/2026

Goswami Nabha Dass Ji

08/08/2026

Om Namah Shivaya
नटराज — एक मूर्ति नहीं, एक विचार।

नृत्य करते शिव को केवल धार्मिक दृष्टि से देखने के बजाय हम उन्हें परिवर्तन, सृजन और विनाश के चक्र के एक दार्शनिक प्रतीक के रूप में भी समझ सकते हैं।

समाज भी एक निरंतर नृत्य है—
पुरानी रूढ़ियाँ टूटती हैं, नए विचार जन्म लेते हैं और मनुष्य अपनी स्वतंत्रता की ओर आगे बढ़ता है।

बसवन्ना ने श्रम और समानता की बात की।
गुरु नानक ने मानव-एकता और आडंबर से ऊपर उठने का संदेश दिया।
डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय को मुक्ति का मार्ग बनाया।
कार्ल मार्क्स ने श्रम, वर्ग और सामाजिक व्यवस्था को समझने का प्रयास किया।

इन विचारों को जोड़ने वाली एक साझा बात है—
मनुष्य को जड़ता, अंधविश्वास और अन्याय से बाहर निकालकर अधिक जागरूक और स्वतंत्र बनाना।

इसलिए नटराज का यह नृत्य मेरे लिए केवल पूजा का विषय नहीं, बल्कि एक प्रश्न है—

क्या हम भी अपने भीतर और अपने समाज में पुरानी जंजीरों को तोड़कर नए विचारों के लिए जगह बना सकते हैं?

कला जब प्रश्न पूछती है, तो वह शिक्षा बन जाती है।
विचार जब मनुष्य को मुक्त करते हैं, तो वे आध्यात्मिकता बन जाते हैं।

  यह पद    #गोस्वामी_नाभादास_जी द्वारा रचित भक्तमाल से माना जाता है और यह संत कबीर की महिमा का वर्णन करता है।श्लोक इस प्...
05/08/2026

यह पद #गोस्वामी_नाभादास_जी द्वारा रचित भक्तमाल से माना जाता है और यह संत कबीर की महिमा का वर्णन करता है।
श्लोक इस प्रकार है:
जाके कुटुम्ब सबै अछूता,
वरन अछूत गति अछूता।
ताके काज सबै जग डोला,
तासों बड़ा कबीर न कोइला॥

लेखक: गोस्वामी नाभादास जी
ग्रंथ: भक्तमाल (कबीर जी का वर्णन)

मुख्य संदेश
गोस्वामी नाभादास जी यह बताना चाहते हैं कि किसी व्यक्ति की महानता उसकी जाति से नहीं, बल्कि उसके ज्ञान, भक्ति और कर्म से होती है। समाज जिसे जन्म के कारण छोटा समझता था, वही कबीर अपने विचारों से महान संत बने।

05/08/2026

समानता + मानवता + शिक्षा = एक संतुलित समाज

समाज को बदलने की शुरुआत किसी बड़े आंदोलन से नहीं, बल्कि हमारी सोच से होती है।

समानता हमें सिखाती है कि हर इंसान सम्मान का अधिकारी है।
मानवता हमें एक-दूसरे का दुख-दर्द समझना और साथ देना सिखाती है।
शिक्षा हमें सही और गलत में अंतर करना तथा विवेकपूर्ण निर्णय लेना सिखाती है।

जब ये तीनों हमारे जीवन का हिस्सा बन जाते हैं, तब जाति, धर्म, भाषा और ऊँच-नीच की दीवारें कमजोर पड़ने लगती हैं, और एक संतुलित, जागरूक और प्रगतिशील समाज का निर्माण होता है।

आइए, ज्ञान को अपनाएँ, मानवता को जीएँ और समानता को बढ़ावा दें। यही एक बेहतर भविष्य की सच्ची नींव है।

– GNICS (Goswami Nabha Das International Consciousness Society)

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