06/01/2026
*भारतीय स्वतंत्रता के अग्रदूत: महाराजा यशवंतराव होलकर और उनका गौरवशाली राज्याभिषेक-
•आज 6 जनवरी 2026 को, महाराष्ट्र के वाफगांव किले की प्राचीर एक बार फिर उस ऐतिहासिक गौरव की गवाह बन रही है, जिसने भारतीय इतिहास की धारा को मोड़ने का साहस किया था। मराठा साम्राज्य के अदम्य साहसी योद्धा, महाराजा यशवंतराव होलकर (प्रथम) का राज्याभिषेक दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भारतीय स्वाभिमान और वीरता का उत्सव है।
*वीरता की जन्मस्थली: वाफगांव-
•पुणे जिले के खेड तालुका में स्थित वाफगांव किला महाराजा यशवंतराव होलकर की जन्मस्थली है। लंबे समय तक उपेक्षा का शिकार रहने के बाद, आज महाराष्ट्र सरकार और पुरातत्व विभाग के प्रयासों से यह किला अपने पुराने वैभव को प्राप्त कर रहा है। यहाँ चल रहा संरक्षण कार्य आने वाली पीढ़ियों को उस महान नायक की गाथा सुनाएगा जिसे 'मध्य भारत का नेपोलियन' कहा जाता था।
*राज्याभिषेक और साम्राज्य का संकल्प-
•महाराजा यशवंतराव होलकर का राज्याभिषेक भारतीय इतिहास के एक अत्यंत कठिन दौर में हुआ था। जब विदेशी ताकतें (ईस्ट इंडिया कंपनी) पैर पसार रही थीं, तब यशवंतराव जी ने बिखरी हुई शक्तियों को एकजुट किया। उनका राज्याभिषेक केवल सत्ता का हस्तांतरण नहीं था, बल्कि विदेशी दासता के विरुद्ध 'हिंदवी स्वराज्य' की रक्षा का एक संकल्प था।
*एक महान रणनीतिकार और योद्धा-
•इतिहासकारों के अनुसार, यशवंतराव होलकर भारत के एकमात्र ऐसे राजा थे जिनसे अंग्रेज भी भयभीत रहते थे। उन्होंने अकेले दम पर अंग्रेजों को कई युद्धों में पराजित किया। 1804 में 'डीग का युद्ध' और 'भरतपुर की घेराबंदी' के दौरान उनकी सैन्य कुशलता ने ब्रिटिश जनरलों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था। उनकी छापामार युद्ध नीति और आधुनिक तोपखाने के प्रयोग ने उन्हें अपने समय का सबसे आधुनिक योद्धा बना दिया था।
*आज की प्रासंगिकता-
•आज जब हम वाफगांव किले पर उनका राज्याभिषेक दिवस मना रहे हैं, तो यह हमारे लिए आत्म-निरीक्षण का भी समय है। जिस प्रकार उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी, वह आज के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। किले का जीर्णोद्धार और वहां आयोजित होने वाले समारोह हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं।