Ganraj Mirashe

Ganraj Mirashe • ᴘᴏᴇᴛ ᴀɢᴀɪɴsᴛ ᴇxᴘʟᴏɪᴛᴀᴛɪᴏɴ
• ʜɪᴅᴅᴇɴ ᴛᴀʟᴇs ɪɴ ᴇᴠᴇʀʏ ʟᴇᴀғ
• ɪɴsᴘɪʀᴇᴅ ʙʏ ʀᴇᴠᴏʟᴜᴛɪᴏɴ
• ᴠᴏɪᴄᴇ ꜰʀᴏᴍ ꜰᴏʀᴇsᴛ ᴛᴏ ᴄɪᴛʏ🎭

जागतिक पर्यावरण दिवस ५ जून  #कविता
05/06/2026

जागतिक पर्यावरण दिवस ५ जून
#कविता

लोकतंत्र केवल वोट देने से नहीं, बल्कि सवाल पूछने से मजबूत होता है।जब जनता अपनी आवाज़ खो देती है, तब तानाशाही को रास्ता म...
01/06/2026

लोकतंत्र केवल वोट देने से नहीं, बल्कि सवाल पूछने से मजबूत होता है।
जब जनता अपनी आवाज़ खो देती है, तब तानाशाही को रास्ता मिल जाता है।

सोचिए, सवाल कीजिए और जागरूक बनिए। ✊

#लोकतंत्र
#तानाशाही
#सवाल_पूछो
#जागरूक_बनो

“आजादी” सिर्फ़ झंडा लहराने से नहीं होती,सवाल पूछने की हिम्मत भी आज़ादी होती है।जब जनता की आवाज़ दबाई जाए,छात्रों का भविष...
20/05/2026

“आजादी” सिर्फ़ झंडा लहराने से नहीं होती,
सवाल पूछने की हिम्मत भी आज़ादी होती है।
जब जनता की आवाज़ दबाई जाए,
छात्रों का भविष्य घोटालों में खो जाए,
और इंसान को इंसान नहीं समझा जाए…
तब सवाल उठाना ज़रूरी हो जाता है। ✊🔥
यह कविता किसी नफ़रत के लिए नहीं,
बल्कि सोचने और सवाल पूछने के लिए है।
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13/05/2026

ज़िंदगी हमेशा वैसी नहीं चलती जैसी हमने सोची होती है…
कभी अपने ही बदल जाते हैं, तो कभी हालात इंसान को खामोश बना देते हैं। 💔
जो दर्द अंदर से तोड़ता है, वही इंसान को पहले से ज्यादा मजबूत भी बनाता है।
अब बस वक्त का इंतज़ार है… क्योंकि हर अंधेरी रात के बाद सुबह ज़रूर आती है। 🍂✨

12/05/2026

धर्म लड़ता है,
मनुवाद कमाता है,
गरीब हर बार हार जाता है।





11/05/2026

यह सिर्फ कविता नहीं है,
यह उस ज़हरीली सोच के ख़िलाफ़ सवाल है
जिसने इंसान को ऊँच-नीच में बाँटा।
जिस किताब ने जंजीर को नियम
और सवाल को पाप बताया,
उसी सोच ने आज भी
मत चुराए, आवाज दबाई
और मानवता को शर्मिंदा किया।
दलित सवाल करे तो अंबेडकरवादी,
आदिवासी हक मांगे तो नक्सलवादी,
मुसलमान न्याय मांगे तो आतंकवादी,
और गरीब चुप रहे तो देशभक्त!
लेकिन इतिहास यहीं खत्म नहीं होता —
कबीर, रैदास, बसवेश्वर,
बुद्ध, फुले, शाहू,
बिरसा, पेरियार,
और बाबा साहब अंबेडकर
आज भी हमारी रगों में बोलते हैं।
मैं मनुस्मृति से नहीं आया हूँ,
मैं संविधान से आया हूँ।
मैं इंसान हूँ,
और सवाल करना मेरा धर्म है।
✊🔥

























29/11/2025

लाल सलाम

ये लड़ाई किसी एक गाँव की नहीं…
ये लड़ाई है जंगल, जमीन और जनजातीय अस्तित्व की।
बस्तर की मिट्टी से लेकर हसदेव के घने जंगलों तक—
हर पत्ता, हर नदी, हर पहाड़ आज पुकार रहा है…

कि हमारे जंगल सिर्फ पेड़ नहीं,
हमारी पहचान हैं, हमारी सभ्यता हैं, हमारी सांस हैं।

जब-जब अन्याय बढ़ा है,
आदिवासी समाज ने बिना डर अपनी बात रखी है।
ये आवाज़ किसी के खिलाफ नहीं—
अपनी धरती, अपने हक और अपने भविष्य के लिए है।

जंगल बचाओ…
जल-जंगल-जमीन बचाओ…
और इस आवाज़ को पूरे भारत तक पहुँचाओ।”

🇲🇨
हम नक्सलवाद के खिलाफ हैं, लेकिन फर्जी नक्सली बनाकर आदिवासियों पर अत्याचार के भी खिलाफ हैं।
आदिवासी को नक्सली बताकर जेल भेजना, मारना और डराना—असल मकसद जल-जंगल-जमीन और खनिज संपदा पर कब्जा करना है।
नक्सलवाद के नाम पर दूसरों के बनाए युद्ध में आदिवासियों को कुचला जा रहा है।
असली नक्सली कौन है? हथियार कौन दे रहा है? सुरक्षा कौन देता है?—ये सवाल सरकार जवाब नहीं देती।
हम किसी भी हिंसा का समर्थन नहीं करते—सिर्फ आदिवासियों पर हो रहे अन्याय का विरोध करते हैं।

🔥





26/11/2025

🔥🔥 "बिरसा क्रांती दल" मा.दशरथ मडावी सरांची भेट 🔥🔥
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क्रांतीसुर्य जननायक बिरसा मुंडा यांची जयंती साखरतळा येथे पार पाडण्यात आली 23/11/2025
जंगलाचा आवाज… आणि संघर्षाचा प्रवाह!
दशरथ मडावी सरांसोबत बोलताना घेतलेली ही काही क्षणांची क्लिप…
पण यातून उठलेली 🔥ऊर्जा🔥 पूर्ण आदिवासी समाजासाठी प्रेरणा आहे!

हक्क, स्वाभिमान आणि अस्तित्वासाठी लढणारे हे योद्धे—
दशरथ मडावी!
त्यांचे प्रत्येक शब्द = प्रेरणा
प्रत्येक विचार = आंदोलन
प्रत्येक वाक्य = इतिहास!

ही रील तुमच्यापर्यंत पोहोचली म्हणजे —
आवाज उठवण्याची वेळ आली आहे!

👇 तुमचा समाज कुठला हे कमेंटमध्ये लिहा ✍️
👇 ‘जय आदिवासी’ लिहून शेअर करा!
आवाज उठवूया, आवाज पोहोचवूया!

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