26/03/2026
ज़िन्दगी में बस यही एक काम ना हुआ, जी हुजूर, जी हुजूर और सलाम ना हुआ।
बेच के ज़मीर सब बन गए बड़े बड़े, मुझसे पर अदा ये शोहरत का दाम ना हुआ।
प्यार से बुलाया जिसने, उसी के हो गए, डर से मैं किसी का लेकिन गुलाम ना हुआ।
इक कमी थी मुझमें, सच बोलता था मैं फ़क़त, इक यही वजह थी दुनिया में नाम ना हुआ।
बीच में ही छोड़ किरदार तो चला गया, किस्सा ये मगर वहीं पर तमाम ना हुआ।