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आदरणीय भाई साहब सादर जय श्री सीताराम आदरणीय बंधु आग्रह है कि शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि दिनांक 18 जुलाई 2026 दिन शनिवार को...
17/07/2026

आदरणीय भाई साहब सादर जय श्री सीताराम आदरणीय बंधु आग्रह है कि शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि दिनांक 18 जुलाई 2026 दिन शनिवार को प्रभु श्री राम की आरती के पश्चात विशाल भंडारे तथा निःशुल्क दवा वितरण का आयोजन किया गया है जिसमें आपकी परिवारी जनों तथा ईस्ट मित्रों सहित सादर उपस्थिति प्रार्थनीय है।

स्थान : 784/23w-1 साकेत नगर गौशाला चौराहे के पास साईं धाम के पास कानपुर
दिनांक:18/7/2026

दिन : शनिवार, प्रातः: 11:30 बजे
मो *8112651130* निवेदक : राष्ट्रीय सनातन धर्म सेवा संगठन भारत सरकार द्वारा रजी०

06/07/2026

*प्रतिदिन दो सुंदर, रौचक, पौराणिक, आध्यात्मिक, सिक्षास्पद, प्रेरणास्त्रोत कहानियों के लिए ग्रुप से जुड़े रहिए और अपने मित्रों परिजनों या अन्य किसी को भी आप इस ग्रुप से जोड़ना चाहते हैं तो उन्हे कहे कि 8112651130 पर संपर्क करें*

*🌳 शांति कंहा मिलेगी 🌳*

एक समय कि बात है, भगवान विष्णु सभी जीवों को कुछ न कुछ चीजें भेट कर रहे थे। सभी जीव भेट स्वीकार करते और खुशी खुशी अपने निवास स्थान के लिए प्रस्थान करते। जब सब चले गए तो उनकी चरण सेविका श्री लक्ष्मी जी ने भगवान से कहा, "हे नाथ मैंने देखा कि आपने सभी को कुछ न कुछ दिया, अपने पास कुछ नहीं रखा लेकिन एक चीज़ आपने अपने पैरों के नीचे छिपा ली है। वो चीज़ क्या है?"

श्री हरि मंद मंद मुस्कुराते रहे, उन्होंने इसका कोई उत्तर नहीं दिया।

लक्ष्मी जी ने फिर कहा, "प्रभु हमसे न छुपाएं, मैंने स्वयं अपनी आंखों से देखा है आपने कोई एक चीज़ अपने पैरों के नीचे छिपा रखी है, निवेदन है कृपया इस रहस्य से पर्दा उठाइए।"

श्री हरि बोले, "देवी मेरे पैरों के नीचे "शांति" है। शांति मैंने किसी को नहीं दि, सुख सुविधा तो सभी के पास हो सकती हैं मगर शांति तो किसी दुर्लभ मनुष्य के पास ही होगी। ये मैं सब को नहीं दे सकता। जो मेरी प्राप्ति के लिए तत्पर्य होगा, जिसकी सारी चेष्टाएं मुझ तक पहुंचने कि होगी, उसी को ये मिलेगी"

श्री हरि से आज्ञा लेकर शांति कहने लगी," हे जगत माता, श्री हरि ने मुझे अपने पैरों के नीचे नहीं छिपाया बल्कि मैं स्वयं उनके पैरों के नीचे छिप गई। शांति तो सिर्फ़ हरि चरणों के नीचे ही जीव को मिलेगी, अन्यथा कहीं नहीं।"

कथा कहती है कि उसी दिन से श्री लक्ष्मी जी ने श्री हरि के चरणों कि सेवा शुरू कर दि, क्योंकि व्यक्ति सारी सुख सम्पत्ति से सुसज्जित हो, मगर उसके पास शांति ही न हो तो उसकी सारी सुख सम्पत्ति व्यर्थ हो जाती है।

इसलिए स्वयं सुख समृद्धि कि जननी माता लक्ष्मी भी शांति प्राप्ति हेतु और श्री हरि सेवा के लिए उनके चरणों कि सेवा हमेशा करती रहती है।

हम लोग भी बहुत बड़ी गलती करते हैं। हम सुख संपत्ति, धन को ही लक्ष्मी जी की कृपा समझ लेते है। कहते भी है प्रायः संसारी लोग कि फलाने के ऊपर तो लक्ष्मी जी कि बड़ी कृपा है। उसके पास धन है, वैभव है, सम्पत्ति है परंतु वास्तविकता में लक्ष्मी जी कि कृपा उसी पर है जो अपने धन, संपत्ति, वैभव को श्री हरि चरणों कि सेवा में लगाता है। और श्री हरि चरणों की सेवा है,,धर्म का प्रचार,,जरूरमदो की सेवा,,गौसेवा इत्यादि,,,लक्ष्मी जी कृपा उसी व्यक्ति पर है जो अपने संपत्ति को श्री विष्णु की सेवा में लगाएं वर्ना उसके पास तो ये सब उसके पूर्व जन्मों के अच्छे कर्मों की वजह से मिली है, जैसे ही पुण्य क्षीण वैसे ही संपत्ति का अभाव।

जीवन में सबसे ज्यादा जरूरी है मन कि शांति। लाख सुविधाएं हो, जो प्रायः आधुनिक युग में देखा जा रहा, लोगों के पास धन है, सुविधा है, सब भोग है भोगने के लिए लेकिन शांति नहीं है, जिसकी वजह से मनुष्य सदैव अशांति का अनुभव करता है।तनाव में रहता है, दुखी रहता है।अगर धन संपत्ति ही सुख देती तो कभी कोई व्यक्ति शांति कि अभिलाषा नहीं करता।

*इसलिए भगवान की चरण सेवा करे, अपनी संपत्ति का सदुपयोग करे। गौसेवा करें,,धर्म करें,,सत्कर्म करें..निस्वार्थ भाव से सबका भला करें और परमपिता परमेश्वर के अलावा किसी से कोई उम्मीद ना रखें..*

*पोस्ट (जानकारी) अच्छी लगी हो तो आगे शेयर करें*

*_प्रेषक:-दीपक साहनी संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय सनातन धर्म सेवा संगठन भारत सरकार द्वारा रजी० मो नंबर 8112651130, 8738965566*

26/06/2026

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23/06/2026
22/06/2026

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*_प्रेरक विचार...✍️_*

*जिंदगी "परिवर्तन" से ही बनी है*
*किसी भी "परिवर्तन" से घबराएं नही*
*बल्कि उसे स्वीकार करें..*
*कुछ "परिवर्तन" आपको "सफलता" दिलवाएंगे*
*तो कुछ "सफल" होने के गुण सिखाएंगे !*

*☕ सुप्रभात ☕*
*आपका दिन मंगलयमय हो*
*🍁 दीपक साहनी संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय सनातन धर्म सेवा संगठन भारत सरकार द्वारा रजी० 🍁*
*8112651130, 8738965566*

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आज हमारे संगठन के वरिष्ठ एवं सक्रिय सदस्य बड़े भाई के डी पांडेय जी आपको जन्मदिन कि हार्दिक शुभकामनाएं ईश्वर आपको जीवन के...
12/06/2026

आज हमारे संगठन के वरिष्ठ एवं सक्रिय सदस्य बड़े भाई के डी पांडेय जी आपको जन्मदिन कि हार्दिक शुभकामनाएं ईश्वर आपको जीवन के हर पथ पर सफलता प्रदान करे यही मेरी ईश्वर से कामना है आपका भाई दीपक साहनी संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय सनातन धर्म सेवा संगठन भारत सरकार द्वारा रजी० मो नंबर 8112651130

07/06/2026

🌳 *बगुला भगत (शिक्षास्पद कहानी)*🌳

एक वन प्रदेश में एक बहुत बडा तालाब था। हर प्रकार के जीवों के लिए उसमें भोजन सामग्री होने के कारण वहां नाना प्रकार के जीव, पक्षी, मछलियां, कछुए और केकडे आदि वास करते थे।

पास में ही बगुला रहता था, जिसे परिश्रम करना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था। उसकी आंखें भी कुछ कमज़ोर थीं। मछलियां पकडने के लिए तो मेहनत करनी पडती हैं, जो उसे खलती थी। इसलिए आलस्य के मारे वह प्रायः भूखा ही रहता।

एक टांग पर खडा यही सोचता रहता कि क्या उपाय किया जाए कि बिना हाथ-पैर हिलाए रोज भोजन मिले। एक दिन उसे एक उपाय सूझा तो वह उसे आजमाने बैठ गया।

बगुला तालाब के किनारे खडा हो गया और लगा आंखों से आंसू बहाने। एक केकडे ने उसे आंसू बहाते देखा तो वह उसके निकट आया और पूछने लगा 'मामा, क्या बात है भोजन के लिए मछलियों का शिकार करने की बजाय खडे आंसू बहा रहे हो?'
बगुले ने ज़ोर की हिचकी ली और भर्राए गले से बोला
'बेटे, बहुत कर लिया मछलियों का शिकार। अब मैं यह पाप कार्य और नहीं करुंगा। मेरी आत्मा जाग उठी हैं। इसलिए मैं निकट आई मछलियों को भी नहीं पकड रहा हूं। तुम तो देख ही रहे हो।'
केकडा बोला 'मामा, शिकार नहीं करोगे, कुछ खाओगे नहीं तो मर नहीं जाओगे?'
बगुले ने एक और हिचकी ली 'ऐसे जीवन का नष्ट होना ही अच्छा है बेटे, वैसे भी हम सबको जल्दी मरना ही है। मुझे ज्ञात हुआ है कि शीघ्र ही यहां बारह वर्ष लंबा सूखा पडेगा।'

बगुले ने केकडे को बताया कि यह बात उसे एक त्रिकालदर्शी महात्मा ने बताई हैं, जिसकी भविष्यवाणी कभी ग़लत नहीं होती। केकडे ने जाकर सबको बताया कि कैसे बगुले ने बलिदान व भक्ति का मार्ग अपना लिया हैं और सूखा पडने वाला हैं।
उस तालाब के सारे जीव मछलियां, कछुए, केकडे, बत्तखें व सारस आदि दौडे-दौडे बगुले के पास आए और बोले 'भगत मामा, अब तुम ही हमें कोई बचाव का रास्ता बताओ। अपनी अक्ल लडाओ तुम तो महाज्ञानी बन ही गए हो।'

बगुले ने कुछ सोचकर बताया कि वहां से कुछ कोस दूर एक जलाशय हैं जिसमें पहाडी झरना बहकर गिरता हैं। वह कभी नहीं सूखता। यदि जलाशय के सब जीव वहां चले जाएं तो बचाव हो सकता हैं। अब समस्या यह थी कि वहां तक जाया कैसे जाएं? बगुले भगत ने यह समस्या भी सुलझा दी 'मैं तुम्हें एक-एक करके अपनी पीठ पर बिठाकर वहां तक पहुंचाऊंगा क्योंकि अब मेरा सारा शेष जीवन दूसरों की सेवा करने में गुजरेगा।'
सभी जीवों ने गद्-गद् होकर ‘बगुला भगतजी की जै’ के नारे लगाए।

अब बगुला भगत के पौ-बारह हो गई। वह रोज एक जीव को अपनी पीठ पर बिठाकर ले जाता और कुछ दूर ले जाकर एक चट्टान के पास जाकर उसे उस पर पटककर मार डालता और खा जाता। कभी मूड हुआ तो भगतजी दो फेरे भी लगाते और दो जीवों को चट कर जाते तालाब में जानवरों की संख्या घटने लगी। चट्टान के पास मरे जीवों की हड्डियों का ढेर बढने लगा और भगतजी की सेहत बनने लगी। खा-खाकर वह खूब मोटे हो गए। मुख पर लाली आ गई और पंख चर्बी के तेज से चमकने लगे। उन्हें देखकर दूसरे जीव कहते 'देखो, दूसरों की सेवा का फल और पुण्य भगतजी के शरीर को लग रहा है।'

बगुला भगत मन ही मन खूब हंसता। वह सोचता कि देखो दुनिया में कैसे-कैसे मूर्ख जीव भरे पडे हैं, जो सबका विश्वास कर लेते हैं। ऐसे मूर्खों की दुनिया में थोडी चालाकी से काम लिया जाए तो मजे ही मजे हैं। बिना हाथ-पैर हिलाए खूब दावत उडाई जा सकती है संसार से मूर्ख प्राणी कम करने का मौक़ा मिलता है बैठे-बिठाए पेट भरने का जुगाड हो जाए तो सोचने का बहुत समय मिल जाता हैं।

बहुत दिन यही क्रम चला। एक दिन केकडे ने बगुले से कहा 'मामा, तुमने इतने सारे जानवर यहां से वहां पहुंचा दिए, लेकिन मेरी बारी अभी तक नहीं आई।'
भगतजी बोले 'बेटा, आज तेरा ही नंबर लगाते हैं, आजा मेरी पीठ पर बैठ जा।'
केकडा खुश होकर बगुले की पीठ पर बैठ गया। जब वह चट्टान के निकट पहुंचा तो वहां हड्डियों का पहाड देखकर केकडे का माथा ठनका। वह हकलाया 'यह हड्डियों का ढेर कैसा है? वह जलाशय कितनी दूर है, मामा?'
बगुला भगत ठां-ठां करके खूब हंसा और बोला 'मूर्ख, वहां कोई जलाशय नहीं है। मैं एक- एक को पीठ पर बिठाकर यहां लाकर खाता रहता हूं। आज तू मरेगा।'
केकडा सारी बात समझ गया। वह सिहर उठा परन्तु उसने हिम्मत न हारी और तुरंत अपने जंबूर जैसे पंजों को आगे बढाकर उनसे दुष्ट बगुले की गर्दन दबा दी और तब तक दबाए रखी, जब तक उसके प्राण पखेरु न उड गए।

फिर केकडा बगुले भगत का कटा सिर लेकर तालाब पर लौटा और सारे जीवों को सच्चाई बता दी कि कैसे दुष्ट बगुला भगत उन्हें धोखा देता रहा।

*इस कहानी से क्या सीखें: ये कहानी भी हमें 2 महत्वपूर्ण सीख देती है।*

1. दूसरों की बातों पर आंखें मूंदकर विश्वास नहीं करना चाहिए, वास्तविक परिस्थिति के बारे में पहले पता लगा लेना चाहिए, हो सकता है सामने वाला मनगढंत कहानियाँ बना रहा हो और आपको लुभाने की कोशिश कर रहा हो।

2. कठिन से कठिन परिस्थिति और मुसीबत के समय में भी अपना आपा नहीं खोना चाहिए और धीरज व बुद्धिमानी से कार्य करना चाहिए।

*पोस्ट कहानी अच्छी लगे तो अधिक से अधिक लोगो तक पहुँचाए और पुण्य कमाएं*

*_प्रेषक:- दीपक साहनी संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय सनातन धर्म सेवा संगठन भारत सरकार द्वारा रजी० मो नंबर 8112651130

*ऎसी ही जानकारी और प्रतिदिन पंचांग एवं दो सुंदर, रौचक, पौराणिक, आध्यात्मिक, शिक्षाप्रद, प्रेरणास्रोत कहानियों के लिए "राष्ट्रीय सनातन धर्म सेवा संगठन" ग्रुप से जुड़ना चाहते हैं तो 8112651130 पर व्हाटसअप करें हम आपको ग्रुप का लिंक का शेयर कर देंगे*

श्री बीरेंद्र सिंह जी आपको नगर सचिव फतेहपुर उत्तर प्रदेश मनोनीत किए जाने की हार्दिक शुभकामनाएं आज से आप राष्ट्रीय सनातन ...
03/06/2026

श्री बीरेंद्र सिंह जी आपको नगर सचिव फतेहपुर उत्तर प्रदेश मनोनीत किए जाने की हार्दिक शुभकामनाएं आज से आप राष्ट्रीय सनातन धर्म सेवा संगठन की अमूल्य धरोहर है हम आपसे उम्मीद करते हैं के आप संगठन की गरीमा को बनाए रखेंगे और संगठन का विस्तार करेंगे शुभकामनाओं के साथ आपका भाई
दीपक साहनी संस्थापक एवम राष्ट्रीय अध्यक्ष
राष्ट्रीय सनातन धर्म सेवा संगठन भारत सरकार द्वारा रजी० मो नंबर 8112651130
8738965566

03/06/2026

राष्ट्रीय सनातन धर्म सेवा ट्रस्ट
हमारे बारे में
राष्ट्रीय सनातन धर्म सेवा ट्रस्ट भारत में विधिवत पंजीकृत एक सामाजिक, धार्मिक एवं जनकल्याणकारी ट्रस्ट है, जो सनातन संस्कृति, राष्ट्रसेवा, शिक्षा, गौसेवा तथा मानव कल्याण के कार्यों के लिए समर्पित है।
ट्रस्ट का उद्देश्य समाज में नैतिक मूल्यों, सांस्कृतिक जागरूकता, सेवा भावना एवं सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देना है। संस्था विभिन्न धार्मिक, शैक्षिक एवं सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से समाज के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करने का संकल्प रखती है।
पंजीकरण विवरण
ट्रस्ट पंजीकरण संख्या: 118/24
NGO Darpan पर पंजीकृत
ट्रस्ट के नाम से अधिकृत बैंक खाता संचालित
12AA प्रमाणन प्राप्त
80G प्रमाणन प्राप्त
हमारे प्रमुख उद्देश्य
✅ सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति का संरक्षण एवं संवर्धन।
✅ हिंदू समाज में संगठन, जागरूकता एवं सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना।
✅ गौशालाओं की स्थापना, निर्माण, विकास एवं गौसेवा कार्यों का संचालन।
✅ गुरुकुलों की स्थापना तथा शिक्षा, संस्कार एवं सांस्कृतिक प्रशिक्षण को प्रोत्साहन।
✅ वृद्धाश्रमों की स्थापना एवं वरिष्ठ नागरिकों की सेवा और देखभाल।
✅ प्राचीन मंदिरों के संरक्षण, जीर्णोद्धार एवं विकास में सहयोग।
✅ निर्धन, असहाय, जरूरतमंद एवं वंचित वर्गों के कल्याण हेतु सेवा कार्य।
✅ युवाओं में राष्ट्रभक्ति, चरित्र निर्माण एवं नैतिक मूल्यों का विकास।
✅ हिंसा, उत्पीड़न या अन्याय से प्रभावित व्यक्तियों को कानूनी, सामाजिक एवं मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास।
✅ सामाजिक सद्भाव, शांति, न्याय एवं मानव कल्याण के लिए कार्य करना।
हमारा संकल्प
"सेवा, संस्कार, संगठन और राष्ट्र निर्माण" के आदर्शों को लेकर राष्ट्रीय सनातन धर्म सेवा ट्रस्ट समाज के विभिन्न वर्गों तक सहायता, शिक्षा और सांस्कृतिक जागरूकता पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
हमारा विश्वास है कि सेवा और संस्कार के माध्यम से एक सशक्त, जागरूक और नैतिक समाज का निर्माण किया जा सकता है। अगर आप भी इस महायज्ञ में शामिल होना चाहते हैं या फिर हमारा किसी भी प्रकार से सहयोग सहायता करना चाहते हैं तो 8111651130 पर संपर्क करें
संपर्क
ठाकुर दीपक साहनी
संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष
राष्ट्रीय सनातन धर्म सेवा ट्रस्ट
📞 मोबाइल: 8112651130, 8738965566
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