अक्षरवाणी काव्य-मंजरी

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अक्षरवाणी काव्य-मंजरी रचनाकारों के काव्य सृजन का प्रकाशन और वितरण

अक्षरवाणी काव्य-मंजरी संस्था , किसी व्यक्ति विशेष की संस्था नहीं है यह एक न्यास है जो कि सार्वजनिक है । अक्षरवाणी काव्य-मंजरी का उद्देश्य कलमकारों की रचनाओं को प्रकाश में लाना है ।

तुम्हारे होने की गंधतुम पास नहीं थीं,फिर भी कमरे की खिड़की परठहरी हुई शामतुम्हारा पता पूछती रही।हवा ने जबपरदे को हल्के स...
16/08/2026

तुम्हारे होने की गंध

तुम पास नहीं थीं,
फिर भी कमरे की खिड़की पर
ठहरी हुई शाम
तुम्हारा पता पूछती रही।

हवा ने जब
परदे को हल्के से छुआ,
मुझे लगा—
किसी भूली हुई उँगली ने
स्मृति का द्वार खटखटाया है।

प्रेम शायद यही है—
देह से दूर रहकर भी
किसी की उपस्थिति
रक्त में उतरती रहे।

तुम्हारी हँसी की एक किरण
अब भी मेरे भीतर
अँधेरे को छूती है,

और मेरी अनकही कामना
चाँदनी की तरह
धीरे-धीरे फैल जाती है।

मैं तुम्हें पाना नहीं चाहता,
बस इतना चाहता हूँ—
जब कभी हवा
तुम्हारे बालों से होकर गुज़रे,
उसमें मेरा नाम
एक क्षण के लिए
तुम्हें सुनाई दे।

#अक्षरवाणी_काव्य_मंजरी

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