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ستاروں سے یہ چاند کہتا ہے ہر دم ، تمہیں کیا بتائیں وہ ٹکڑوں کا منظراشاروں میں آقا کے اتنا مزہ تھا کہ پھر ٹوٹ جانے کو دل ...
31/12/2022

ستاروں سے یہ چاند کہتا ہے ہر دم ، تمہیں کیا بتائیں وہ ٹکڑوں کا منظر
اشاروں میں آقا کے اتنا مزہ تھا کہ پھر ٹوٹ جانے کو دل چاہتا ہے۔

صلی اللہ علیہ وسلم تسلیما کثیرا کثیرا 💖💖

میں بندۂ عاصی ہوں خطا کار ہوں مولالیکن تری رحمت کا طلبگار ہوں مولا-🤲🏻 وابستہ ہے امید میری تیرے کرم سےتیرا ہوں فقط تیرا ...
31/12/2022

میں بندۂ عاصی ہوں خطا کار ہوں مولا
لیکن تری رحمت کا طلبگار ہوں مولا-🤲🏻

وابستہ ہے امید میری تیرے کرم سے
تیرا ہوں فقط تیرا پرستار ہوں مولا-🌹

Main Banda-E-Aasi Hoon Khatakaar Hoon Maula-🤲🏻
Lekin Teri Rehmat-🫧 Ka Talabgaar Hoon Maula--❤️

वानिया असद‌‌ शेख के लिए कौन बोलेगा ? :-हिजाब नहीं पहना था उसने, कालेज के युनिफॉर्म कोड का पालन किया था , माफ करिएगा , मद...
22/10/2022

वानिया असद‌‌ शेख के लिए कौन बोलेगा ? :-
हिजाब नहीं पहना था उसने, कालेज के युनिफॉर्म कोड का पालन किया था , माफ करिएगा , मदरसे की भी छात्रा नहीं थी।

फर्क यह है कि वह "वानिया असद‌‌ शेख" थी , दुमका की अंकिता सिंह नहीं थी , जिसके लिए चार्टर्ड प्लेन से तमाम सांसद, लाखों करोड़ों रुपए की मदद को लेकर पहुंचे थे।

पहुंचना भी चाहिए था , मगर वानिया के लिए कोई नहीं पहुंचा।

आरोपी शाहरुख खान भी नहीं था , वह होता तो भी मीडिया के तमाम चैनल पैनल डिस्कशन और‌ ब्रेकिंग न्यूज चला रहे होते‌, सिविल सोसायटी सड़कों पर होती और उसे सरेआम फांसी की सज़ा देने की मांग हो रही होती।

तमाम विराट हिन्दू सभा आयोजित होती और देश में एक समुदाय विशेष के आर्थिक सामाजिक बहिष्कार का आह्वान हो रहा होता।

बदकिस्मती से वह "वानिया असद‌‌ शेख" थी , मेडिकल की पढ़ाई कर रही थी और‌ BDS की द्वितीय साल की छात्रा थी।

मेरठ के दिल्ली-देहरादून बाइपास स्थित सुभारती कालेज में बीडीएस की पढ़ाई करने वाली छात्रा "वानिया शेख" ने सहपाठी छात्र सिद्धांत सिंह पंवार के छेड़छाड़ और परेशान करने का विरोध करने पर कालेज में सरेआम उसे थप्पड़ मारने से व्यथित होकर कॉलेज की ही चौथी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली।

मगर समाज चुप है , मीडिया चुप है, नेता चुप है , क्यों कि इस घटना का कंबिनेशन उल्टा है , इससे नफ़रत नहीं फैलती ,

मामला 19 अक्टूबर का है , सभी मीडिया पोर्टल या तो इस घटना की लीपापोती कर रहें हैं , मामूली झगड़ा बता कर मामले को दबा रहे हैं या फिर खामोश हैं , यहां तक कि सुभारती कालेज के उसके सहपाठी भी खामोश हैं।

वानिया के पिता का आरोप है कि हरिद्वार का रहने वाला सिद्धार्थ सिंह पंवार पिछले 10 दिन से लगातार वानिया को परेशान कर रहा था , उस दिन उसने वानिया को पूरी क्लास के सामने बदनियती और गलत तरीके से छूने की कोशिश की , जिसका विरोध करने पर सिद्धांत सिंह पवार ने उसे थप्पड़ मारा जिससे व्यथित होकर और उससे बचने के लिए वानिया कालेज के चौथी मंजिल से कूद गयी।

आरोपी सिद्धांत सिंह पंवार को गिरफ्तार करके 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

कल इसी सिद्धांत को संस्कारी बता कर रिहा कर दिया जाएगा , इस देश में बिल्किस बानो हों या वानिया शेख, अंजाम निराशाजनक ही हैं।

तीन परिवारों की इकलौती चहेती और लाडली औलाद "वानिया शेख" कल शाम 2 दिनों से ज़िन्दगी से जंग लड़ते हुए हार कर मौत की आगोश में चली गई।

अब इनके लिए इंसाफ की बात कौन करेगा,

हिजरत का हुक्मजब हुजूर (ﷺ) घाटी से निकले और कुछ कदम चले, तो आप को किसी के पांव की चाप सुनायी दी। आप (ﷺ) ने पीछे पलट कर द...
21/10/2022

हिजरत का हुक्म

जब हुजूर (ﷺ) घाटी से निकले और कुछ कदम चले, तो आप को किसी के पांव की चाप सुनायी दी। आप (ﷺ) ने पीछे पलट कर देखा, तो साफ़ नजर आया कि एक भारी-भरकम जिस्म वाला अरब लम्बे-सम्बे कदम रखता हुआ आ रहा है।

हजरत अब्बास ने भी उस आने वाले को देखा। आते ही वह बोला, मुहम्मद (ﷺ) ! तुम क्या साजिश कर रहे थे?
हुजूर सल्ल० ने उस की तरफ़ देख कर जवाब दिया, नज़र ! तुम्हें किस साजिश का गुमान है ?

यह आराबी नजर बिन हारिस था। यह सरकश भी था और इसे मुसलमानों से सख्त् नफ़रत भी थी। कुफ्र व शिकं में अबू जहल से कम न था।

उस ने कहा, मेरा ख्याल है कि तुम ने यसरब के लोगों को मक्का पर हमला करने की दावत दी है।

हुजूर (ﷺ) ने मुस्करा कर जवाब दिया, नजर! यह तुम्हारी गलत-फहमी है। यसरब वाले क्यों मेरे कहने से मक्का पर हमलावर होंगे?

नजर बिगड़ गया, बोला, फिर क्या मश्विरा हो रहा था?

हुजूर (ﷺ) ने फ़रमाया, चूंकि मक्का वाले मुझे और मुसलमानों को सताते हैं, इसलिए मेरा इरादा यसरब को हिजरत कर जाने का है। यही मश्विरा हो रहा था।

तो क्या आप यसरब जाने का इरादा रखते हैं? नज़र ने पूछा।

हाँ नजर! आप (ﷺ) ने कहा, जब मेरी कौम मुझे सताती है, तो मेरे लिए हिजरत कर जाने के अलावा रास्ता ही क्या है?

नजर खामोशी से चला गया।

फिर आप (ﷺ) और हजरत अब्बास भी अपने-अपने घरों को वापस चले गये।

सुबह सबेरे आप (ﷺ) अरकम के मकान पर पहुंचे। साथ में सब ने फज्र की नमाज पढ़ी। हुजूर (ﷺ) ने कुरआन तिलावत फ़रमायी। अरकम के मकान में जमा तमाम मुसलमान बड़े ध्यान से कुरआन सुनते रहे।

कुरआन की तिलावत के बाद आप (ﷺ) ने फ़रमाया, मुझे ऐसा लग रहा है कि यसरब ही अब दारुस्सलाम बनेगा। मक्का वालों का जुल्म हद से आगे निकल गया है, इसलिए अब वहीं आराम व सुकन मिलेगा। तुम में से जो लोग हिजरत कर सकते हैं या करना चाहते हैं, वे आज़ से तैयारियां शुरू कर दें, ये तैयारियां खुफ़िया तौर पर होंगी, इसलिए कि अगर कुफ्फ़ारे मक्का को मालूम हुआ तो वे रोड़ा अटकाएंगे।

फिर हिजरत के सिलसिले में कुछ हिदायतें दी गयीं और कुछ दिनों के बाद से मुसलमानों ने यसरब की तरफ़ हिजरत करना शुरू कर दिया। जो लोग सवारी की ताकत न रखते थे, वे पैदल ही चल पड़े।

शुरू में तो कुफ्फ्रारे मक्का को हिजरत का पता न चला, लेकिन हिजरत करने वालों के मकान खाली देखे, तो उन्हें खटंक हुई। जांच शुरू हुई और जब ही मालम हो सका कि ये सब के सब यसरब की तरफ रवाना हो गये हैं।

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