05/02/2024
मित्रों, आज अन्या मिश्रा जी के जन्म दिन के शुभ अवसर पर प्रांशु मिश्रा जी , आरती मिश्रा जी एवं पूरे परिवार की तरफ से मेडिकल कॉलेज, लखनऊ में कैंसर एवम असाध्य रोगियों के निःसक्त तिमारदारो की भोजन सेवा कर दरिद्र नारायण की सेवा के माध्यम से नर सेवा ही नारायण सेवा है, के ध्येय वाक्य को चरितार्थ किया।
मित्रों ,सेवा से बड़ा कोई परोपकार इस विश्व में नहीं है, जिसे मानव सहजता से अपने जीवन में अंगीकार कर सकता है। प्रारंभिक शिक्षा से लेकर हमारे अंतिम सेवा काल तक सेवा ही एक मात्र ऐसा आभूषण है, जो हमारे जीवन को सार्थक सिद्ध करने में अहम भूमिका निभाता है। बिना सेवा भाव विकसित किए मनुष्य जीवन को सफल नहीं बना सकता। हम सभी को चाहिए कि सेवा के इस महत्व को समझें व दूसरों को भी इस ओर जागरूक करने की पहल करें।
सेवा भाव के इसी महत्ता को अंगीकार करते हुए प्रांशु मिश्रा जी एवं आरती मिश्रा जी का मानना है कि भक्ति और सेवा का भाव अविभाज्य हैं। सेवा वह है जो किसी दूसरे को सुख देने के लिये निष्प्रह और निष्काम भाव से की जाती है । मन से सबका हित चाहना ही सेवा है । ऐसा तभी सम्भव है जब हम सबमे स्वयं को देखे । " आत्मवत् सर्वभूतेषु " की भावना से दूसरे का सुख दुःख अपना सुख दुःख हो जाता है । पर की भेद दृष्टि ही नही रहती ,इस अवस्था में हमारी समस्त चेष्टाएँ सेवा रूप हो जाती है और किसी की भी सेवा स्वयं सेवा होती है । यह मनुष्य को आत्मतुष्टि प्रदान करती है ।इसमें कृतिमता, दिखावा, आडम्बर या अहंकार आदि के लिये कोई स्थान नही होता है । इस प्रकार की सेवा पूर्णतः निष्काम होती है ।
विजय श्री फाउंडेशन के संस्थापक फूडमैन विशाल सिंह ने अन्या मिश्रा जी को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विनम्रता मनुष्य के व्यवहार को उजागर करती है। विनम्र प्रवृति का व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में आसानी से उत्कृष्ट कार्य कर सकता है। विनम्रता ही मानव को इस संसार में सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति बनाती है। हम सभी को विनम्रता पूर्वक जीवन यापन करना चाहिए। सेवा भाव का असल उद्देश्य समाज के दबे कुचले लोगों की मदद करना है। ऐसे में हमारी एक छोटी सी पहल भी बड़े सामाजिक परिवर्तन का प्रतिरूप बनकर उभर सकती है। हम सभी को सदैव सेवाभाव के पथ पर अग्रसर रहना चाहिए।
फूडमैन विशाल सिंह ने कहा कि सेवादार साथी प्रांशु मिश्रा जी एवं आरती मिश्रा जी पर माँ अन्नपूर्णा का आशीर्वाद बना रहे , प्रभु आपको हमेशा दूसरों की सहायता के लिए सक्षम बनाये रखें यही हमारी दीनानाथ ईश्वर से प्रार्थना है । भोजन सेवा, जिसे हम सामान्यत: आहार की सेवा भी कह सकते हैं, वह एक अद्वितीय संस्कृति और समृद्धि का प्रतीक है। भोजन सेवा का आयोजन व्यक्ति की उदारता, मेहनत, और सामाजिक संबंधों को मजबूत करता है। इसमें सही समय पर और सही व्यक्तियों के साथ भोजन करने का अनुभव होता है, जिससे भाईचारे और एकजुटता का माहौल बनता है।