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15/02/2016
पैरिस पर आतंकवादी हमला....❓❓(सबसे पहले:- पैरिस में हुए  हमले और दुनिया में हो रहे सभी आतंकवादी हमलों की मैं मज़म्मत निंद...
17/11/2015

पैरिस पर आतंकवादी हमला....❓❓

(सबसे पहले:- पैरिस में हुए हमले और दुनिया में हो रहे सभी आतंकवादी हमलों की मैं मज़म्मत निंदा करता हूँ)

पैरिस में हुए आतंकवादी हमले के विरोध में न्यूज़ चैनल में dibates चल रही है
और लोग , 'sapp, Twitter
अपनी अपनी profiles पर फ्रांस का फ्लैग लगाकर हमले में मरने वाले मासूम लोगो को श्रद्धांजलि दे रहे है

अच्छी पहल है ये आतंकवाद के विरोध में
लेकिन मैं उन इंसानियत पसन्द लोगो से कहना चाहूँगा के क्या कभी आपने
(फिलिस्तीन)में हो रहे हर रोज़ इज़राइल द्वारा इसी तरह के आतंकवादी हमलों में मर रहे मासूस बच्चों और औरतों के मरने पर कभी आपने अपनी प्रोफाइल पर Gaza
(Philisteen) का झण्डा लगाया

मैं पूछना चाहता हूँ के कभी आप लोगो ने , , , , ...
में रोज़ मरने वाले लाखों मासूमो के मरने पर कभी आपने इतेजाज किया,
कभी उन हमलों का विरोध किया,
कभी उनके मरने पर अपने profile पर उनका झण्डा लगाया

मेरे भाइयो हम इंसानियत पसंद लोग है और हमारा मज़हब इस्लाम भी हमे अमन और इंसानियत सिखाता है

लेकिन मेरे भाइयों आतंकवाद का विरोध धर्म देखकर नहीं किया जाता।
आतंकवादी हमलो में मरने वाले सिर्फ और सिर्फ मासूम लोग ही होते है

जिस तरह मैं पैरिस में हुए आतंकवादी हमलों का विरोध करता हूँ उसी तरह मैं , , , , ... में रोज़ हो रहे हमलो का विरोध करता हूँ

आतंकवाद आज पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है और इसके खिलाफ हम सबको मिलकर अपने अपने धर्मो से उपर उठकर एक होकर लड़ना होगा

क्योंकि आतंकवाद का कोई मज़हब नहीं होता।

लोगो को Pray For Paris के साथ साथ Pray For Gaza (Philisteen) भी लिखना चाहिए
मैं, Paris,Gaza,Syria,Yemen,Libya,Iraq
में मरने वाले लाखो मासूमो के लिए हमदर्दी रखता हूँ

📝🇮🇳हाफ़िज़ सय्यद मुहम्मद वसी🇮🇳
मुस्लिम यूथ ब्रदर्स उत्तर प्रदेश (रजि.)
व्हाट्सऐप सम्पर्क नं. #09335504329

16/08/2015

Asslamualaikum Maulana ABUL KALAM AAZAD R. NE NEHRU JI SE KAHA THA THA KI AGAR MUSLIM YANG JENERATION MERE SAATH HOJAYE TO MAI HINDUSTAN KO SARI DUNYA KA SUPER POWER BANA DUN KYUNKI INME HIMMAT JAZBA HAUSLA AUR SABSE ZYADA IN KE SEENE ME EK FAULADI JIGAR HOTA HAI JO INHE SARI DUNYA KE SAMNE SEESA PILAI HUI DEEWAR KI TARAH KHARHA KAR DETA HAI....... YOUTH POWER THINK POWER HI QAUM KI TARAQQI KE LIYE AAGE BARH SAKTE HAIN TO AAYEN AUR HUM MUSLIM YOUTH BROTHERS U.P ME INQUIlAB LANE KE LIYE KHOOD KO PESH KAREN...

Hindustan Zindabad.............Yaum e azadi 15 August k mauqe par Muslim Youth Brothers U.P. k head office Dubagga Luckn...
16/08/2015

Hindustan Zindabad.............
Yaum e azadi 15 August k mauqe par Muslim Youth Brothers U.P. k head office Dubagga Lucknow me parcham kushai ( flag hostimg ) ke photos.....

22/05/2015

आज 22 मई है,
भारतीय इतिहास का एक काला दिन ये भी है,
आज से ठीक 28 साल पहले हाशिमपुरा में पी०ए०सी० द्वारा बेगुनाह मुसलमानों को उनके घरों से निकाल कर मौत के घाट उतार दिया गया था,

हाशिमपुरा काण्ड के पीड़ित परिवारों को इन्साफ की बाट जोहते हुए आज 28 साल हो गए,
लेकिन इस देश की न्यायपालिका ने उन्हें नाइन्साफ़ी के सिवा कुछ नहीं दिया,
हालत ये है कि अब तक जस्टिस जी०एल० श्रीवास्तव आयोग की रिपोर्ट भी सर्वजनिक नहीं की गई है,

उत्तर प्रदेश सरकार ने उनके ज़ख्मों पर मरहम लगाने की जगह 5 लाख मुआवज़े का एलान कर के उन्हें कुरेद दिया,
ऐसे ना जाने कितने 5 लाख उन पीड़ितों ने कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगाने में ख़र्च कर दिये ।
क्या प्रदेश सरकार की नज़र में हमारी जान की क़ीमत सिर्फ 5 लाख रूपए है ?
हम मज़लूमों को मुआवज़ा नहीं इन्साफ चाहिए ।
•••••••••••••••••••

22/05/2015

👉ध्यान से पढ़ें और आगे शेयर करें :-

कब्रों पर इमारतें, फूल और चिराग
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

हजरत आईशा रजि. फरमाती है कि अल्लाह के रसूल सल्ल. अपने मरजुल मौत में यह फरमाते थे :-
'अल्लाह यहूदियों पर, जिन्होंने अपने नबियों की कब्रों को सज्दागाह बना लिया लानत भेजता है'।
{इसलिये आपकी कब्र खुली नहीं रखी गई कि कहीं मुसलमान पूजने न लग जाये ।}
[बुखारी 1555]

हजरत जुन्दुब रजि. कहते है कि अल्लाह के रसूल सल्ल. की वफात से पांच दिन पैहले मैने हुजूर सल्ल. को यह फरमाते हुए सुना :-
"खबरदार हो कि तुमसे पहली उम्मतों ने अपने और नेक मुर्दो की कब्रों को मस्जिद बना लिया था । तुम हरगिज कब्रों को मस्जिद न बनाना, मै तुमकों इससे मना करता हूँ ।"
[मुस्लिम 488]

हजरत जाबिर रजि. कहते है कि नबी करीम सल्ल. ने कब्रों को पक्की करने से (यानी पक्की बनाने से ) मना फरमाया है ।
[इब्ने माजा 1581]

हजरत जाबिर रजि. कहते है कि नबी करीम सल्ल. ने कब्रों पर लिखने से मना फरमाया है ।
[ इब्ने माजा 1582]

हजरत अबू सईद रजि. कहते है कि हुजूर सल्ल. ने कब्रों पर इमारतें बनाने से मना फरमाया है ।
[ इब्ने माजा 1583]

हजरत जाबिर रजि. से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल सल्ल. ने कब्रों को गच ( यानी पक्की) करने उस पर लिखने, ईमारत बनाने और उस पर चलने से मना फरमाया है ।
[तिर्मिजी 956, सही मुस्लिम 973, अबूदाऊद 1468]

आजकल कब्रों पर लिखने का रिवाज आम होता जा रहा है नादान से नादान आदमी मर जाता है तो उसकी कब्र पर लिखा जाता है "अलहाज्ज" फलां बिन फलां फलां सन में पैदाईश, फलां सन मे वफात हालांकि हुजूर सल्ल. ने कब्रों पर लिखने से मना फरमाया है ।
हुजूर सल्ल. के नामें मुबारक पर और हुजूर सल्ल. के जितने भी सहाबा किराम रजि. थे उनमें से किसी के नाम से पहले अलहाज्ज नहीं लिखा गया । इमामों के नाम पर मुहद्दिसीने किराम के नाम पर कहीं भी अलहाज्ज लिखा हुआ नजर नहीं आता लेकिन हमारे हिन्दुस्तान में एक जाहिल की कब्र पर लिखा जाता है । आलिम हो या जाहिल किसी की कब्र पर लिखकर लगवाना जायज नहीं ।

हजरत अली रजि. ने हजरत अबुल हय्याज असदी रजि. से फरमाया कि " तुम्हें उसी काम पर मै भेजता हूँ जिस काम पर अल्लाह के रसूल सल्ल. ने मुझे भेजा था वह यह कि किसी बड़ी ऊंची कब्र को बराबर किये बगैर न छोड़ो , न किसी मूरत को बगैर मिटाये रहने दो "
[ तिर्मिजी 954, सही मुस्लिम 972, अबूदाऊद 1461, मिश्कात 1598]

कुछ लोग कहते है कि कब्रें पक्की बन जाने के बाद उसको तोड़ने का हुक्म नहीं है । वे लोग बगैर ईल्म के बहस करते रहते है उनको न तो कुरान करीम का ईल्म है और न तो हदीसों की जानकारी है और न तो फुकहा ए किराम के फत्वों की तहकीकात है ।

कब्रों पर फूल डालना और चिराग वगैरह जलाना ?

हजरत इब्ने अब्बास रजि. कहते है कि हुजूर नबी करीम सल्ल. दो कर्बों पर से गुजरे , तो आपने फरमाया इन दोनों पर अजाब हो रहा है और किसी बड़ी बात पर अजाब नहीं हो रहा है :-
1. एक तो उनमें से पेशाब से बचता न था ।
2. दूसरा चुगलखोरी करता था ।
फिर आपने एक तर शाख ली और उसे चीर कर दो टुकड़े कर दिये और हर कब्र पर एक टुकडा गाड दिया ।
सहाबा रजि. ने अर्ज किया ऐ अल्लाह के रसूल सल्ल. ! यह आपने क्यों किया ?
फरमाया उम्मीद है कि जबतक ये दोनों लकडियां सूख न जाएं अजाब उन पर कम रहेगा ।
[ बुखारी 211, सही मुस्लिम 250 ]

नबी ए करीम सल्ल. का यह एक मोजिजा था । हम लोग अगर पूरे का पूरा पेड किसी कब्र पर रख दे तब भी अजाब कम नहीं हो सकता । हम खुद अपने होने वाले अजाब को कम नहीं कर सकते, तो दूसरों के अजाब को क्या कम करायेंगे । और नबी करीम सल्ल. ने उन लोगों की कब्रों पर हरी डाली लगायी थी जिन की कब्रों पर अजाब हो रहा था अब आप अगर इस हदीस से फूल चढाने की दलील लेते है तो सबसे पहले उस कब्र पर अजाब साबित करना पडेगा, जिस कब्र पर आप फूल चढाते है और तमाम उम्मत का इस बात पर इत्तिफाक है कि हकीकत में जो अल्लाह के वलि है उन पर अजाब नहीं होता ।

हजरत उमर बिन खत्ताब रजि. से रिवायत है कि वह (तवाफ में) काले पत्थर (हजरे अस्वद) के पास आये फिर उसको बोसा दिया और कहा कि बेशक मैं जानता हूँ कि तू एक पत्थर है न किसी को नुक्सान पहुंचा सकता है और न फायदा पहुंचा सकता है और अगर मैने नबी करीम सल्ल. को तेरा बोसा देते न देखा होता तो मैं तुझे हरगिज बोसा न देता ।
[सही बुखारी 1482, तिर्मिजी 775]
हजरत उमर रजि. का इन लफ्जों से मकसद यह था कि कहीं अगले जमाने के लोग सिर्फ पत्थर की ताजीम व तक्रीम न करने लगें और उसको नफा या नुकसान का मालीक न समझ बैठे और उसका चूमना देखकर लोग किसी फित्ने में मुब्तला न हो जायें ।

अब कब्रों पर चिराग जलाने और कब्रों को सजाने के बारे में भी सुन ले और फिर खुद अपनी अक्ल और ईमानदारी से इंसाफ करें कि हम शरीयत पर है या जहालत पर ?

हजरत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रजि. फरमाते है कि अल्लाह के रसूल सल्ल. ने कब्रों की जियारत करने वाली औरतों पर लानत फरमायी है और कब्रों पर मस्जिद बनाने और चिराग जलाने वालों पर भी लानत फरमायी है ।
[अबूदाऊद 1479, तिर्मिजी 280, मिश्कात 682,]

इस हदीस में नबी करीम सल्ल. ने तीन किस्म के लोगों पर लानत फरमायी है :-

1. कब्रों की जियारत करने वाली औरतों पर लानत । आजकल औरतें बहुत ज्यादा मजारों पर जाती है वे तो लानत की मुस्तहिक होती ही है लेकिन उस औरत का बाप भाई या शौहर या बेटा अगर उस औरत को खुशी से मजारों पर भेजता है तो भेजने वाले पर भी लानत होगी क्योंकि शराब पीना हराम, तो पिलाना भी हराम, सूद का लेना हराम, तो सूद का देना भी हराम।

2. दूसरा कब्रों पर मस्जिद बनाने वालो पर लानत । इन लफ्जों का यह मतलब नहीं है कि कब्रों पर कोई मस्जिद बना डाले, तो उस पर लानत, बल्कि इसका मतलब यह है कि जितनी ताजीम और अदब मस्जिद की होनी चाहिये उस कब्र की ताजीम व अदब बढा देने पर लानत फरमायी है । अब सुनिये और इंसाफ कीजिये -
आपने किसी मस्जिद में सोन या चांदी के दरवाज़े नहीं देखे होंगे, मगर कुछ दरगाहों में आपने देखे होंगे, कहीं कहीं तो सोने चांदी की जालियां होती है और कहीं कहीं तो दरवाजे भी बने हुये देखें होंगे। जब कब्रे सजायी जाती है तो उन उन कब्रों की इज्जत और अदब व ताजीम जामा मस्जिदों से भी बढ जाती है मस्जिदे नबवी सल्ल. से भी बढ जाती है और काबा शरीफ से भी बढ जाती है । आप कहीं भी किसी मुल्क में, किसी कस्बे या शहर में, किसी मस्जिद में नमाज पढने जायेंगे तो आप अपने जूते मस्जिद में ले जाना चाहे तो ले जा सकते है और एहतियात से रख सकते है यहाँ तक कि जो लोग हज को जाते है वे मस्जिदे नबवी सल्ल. में भी अपनी जूतिंया रख सकते है और काबा शरीफ के अड़ोस पड़ौस में आप जहां चाहे अपनी जूतियां रख सकते है लेकिन आप अपनी जूतियां दरगाह में नहीं ले जा सकते क्योंकि अब उस दरगाह का मर्तबा मस्जिदे नबवी सल्ल. से और काबा शरीफ से भी बढ गया है ।

हजरत अबूहुरैरहा रजि. कहते है , अल्लाह के रसूल सल्ल. ने फरमाया :-
जब तुम में से कोई आदमी नमाज पढे तो अपनी जूतियों को दायें बायें न रखे इसलिये कि बायें जानिब रखना दूसरे के दायें जानिब रखना होगा, बल्कि जूतियों को पांव के दर्मियान रख लें ।
[अबूदाऊद 649, इब्ने माजा 1452]

इसके अलावा तवाफ काबे का था ये लोग दरगाहों का तवाफ करने लगे, बोसा देना हजरे अस्वद का था ये लोग दरगाहों को चूमने लगे, बरकत वाला पानी जमजम का था ये लोग कब्रों को दो धो कर यानी गुस्ल देकर और उस गुस्ल वाले पानी को तबर्रूक और बरकत वाला समझ कर पीने लगे और बेचने भी लगे है । गिलाफ तो काबे पर चढाया जाता है ये लोग कब्रों पर हजारों रूपये की कीमती गिलाफ चादर चढाने लगे । सज्दा अल्लाह ताआला को था ये ये जाहिल कब्रों पर सजदा करने लगे । अदब से हाथ बांधकर नमाज में खडे रहने का हुक्म था ये लोग कब्रों पर हाथ जोडे खडे रहने लगे और जब दरगाह से बहार निकलेंगे तो उस वक्त ये जाहिल लोग दरगाह को पीठ देकर नहीं निकलेंगे बल्कि उलटे पैर पीछे हटते हटते बाहर निकलेंगे। हज को जाने वाले हाजी लोग काबे को पीठ देकर वापस हो सकते है नबी करीम सल्ल. के रोजे को पीठ देकर बाहर निकल सकते है मगर दरगाह को पीठ देकर आप बाहर नहीं निकल सकते जहालत की भी कोई हद है ।

3. तीसरा कब्रों पर चिराग जलाने वालो पर लानत उपर हदीस में देख लें ।

अब आप ही अन्दाजा लगा ले कि आज इन दोनों तरीकों के सिवा कब्रों और मजारों पर क्या कुछ नहीं होता, यानी कब्र का तवाफ करना, कब्रों को धो धो कर पीना, वहां पर हाल चढा के सर धुनना, मुशायरा और कव्वाली कराना, मजार पर सजदे करना, नियाज व नज्र चढाकर हाजतें मांगना, मासूम बच्चों को तुर्बतों पर लिटाना, लोबानदानी की खाक चाटना , घोड़े लटकाना , पालने टांगना, डोरे धागे मजारों की जालियों में अपने अपने नाम के बांधना और तुर्बतों पर घुमा घुमा कर डोरों को अपनी गरदनों, बाजुओ, कमर और पेडू पर बांधना, ये तमाम काम नाजायज व हराम और गुमराही व जहालत के तरीके है जो इंसान को शरीअत से महरूम करके शिर्क व कुफ्र तक ले जाते है ।

आपकी दुआ का तालिब
हाफ़िज़ सय्यद मुहम्मद वसी
मुस्लिम यूथ ब्रदर्स उत्तर प्रदेश (रजि.)
वाट्सऐप और मो.नं. #09335504329

22/05/2015

👉यह है सरकारी स्कूल......

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-
आज विद्यालय में बहुत चहल पहल है । सब कुछ साफ - सुथरा , एक दम
सलीके से ।
सुना है निरीक्षण को कोई साहब आने वाले हैं । पूरा विद्यालय चकाचक ।

नियत समय पर साहब विद्यालय पहुंचे ।
ठिगना कद, रौबदार चेहरा , और
आँखें तो जैसे जीते जी पोस्टमार्टम कर दें । पूरे परिसर के निरीक्षण के बाद
उन्होने कक्षाओं का रुख किया ।

कक्षा पांच के एक विद्यार्थी को उठा कर पूछा, बताओ देश का प्रधान मंत्री कौन है?
बच्चा बोला -जी राम लाल ।
साहब बोले -बेटा प्रधान मंत्री ?
बच्चा - रामलाल ।
अब साहब गुस्साए - अबे तुझे पांच में किसने पहुंचाया ? पता है मैं तेरा नाम काट सकता हूँ ।
बच्चा - कैसे काटोगे ? मेरा तो नाम ही नहीं लिखा है । मैं तो बाहर बकरी चरा रहा था ।

इस मास्टर ने कहा कक्षा में बैठ जा दस रूपये मिलेंगे । तू तो ये बता रूपये तू देगा या मास्टर ?
साहब भुनभुनाते हुए मास्टर जी के पास गए, कडक आवाज में पूछा - क्या मजाक बना रखा है । फर्जी बच्चे बैठा रखे हैं । पता है मैं तुम्हे नौकरी से बर्खास्त कर सकता हूँ ।
गुरूजी - कर दे भाई । मैं कौन सा यहाँ का मास्टर हूँ । मास्टर तो मेरा पड़ोसी दुकानदार है । वो दुकान का सामान लेने शहर गया है । कह रहा था एक खूसट साहब आएगा, झेल लेना । अब तो साहब का गुस्सा सातवें आसमान पर ।
पैर पटकते हुए प्रधानाध्यापक के सामने जा पहुंचे ।

चिल्लाकर बोले , " क्या अंधेरगर्दी है ?, शरम नहीं आती । क्या इसी के लिए तुम्हारे स्कूल को सरकारी इमदाद मिलती है । पता है ? मैं तुम्हारे स्कूल की मान्यता समाप्त कर सकता हूँ । जवाब दो प्रिंसिपल साहब ।

प्रिंसिपल ने दराज से एक सौ की गड्डी निकाल कर मेज पर रखी और बोला -
मैं कौन सा प्रिंसिपल हूँ । प्रिंसिपल तो मेरे चाचा हैं । प्रॉपर्टी डीलिंग भी करते हैं ।
आज एक सौदे का बयाना लेने शहर गए हैं । कह रहे थे , एक कमबख्त निरीक्षण को आएगा, उसके मुंह पे ये गड्डी मारना और दफा करना ।

साहब ने मुस्कराते हुए गड्डी जेब के हवाले की और बोले - आज बच गये तुम सब । अगर आज मामाजी को सड़क के ठेके के चक्कर में शहर ना जाना होता ,
और अपनी जगह वो मुझे ना भेजते तो तुम में से एक की भी नौकरी ना बचती ।

100 मे 100 बेईमान,
फिर भी मेरा भारत महान!

यह व्यंग्य नही
चिंता का विषय है....

आपका अपना
हाफ़िज़ सय्यद मुहम्मद वसी
मुस्लिम यूथ ब्रदर्स उत्तर प्रदेश (रजि.)
वाट्सऐप एवं सम्पर्क नं. 09335504329

21/05/2015

🙈🙉🙊

"हमारा भारत"हमारी मातृभूमि है
और कश्मीर इसका अटूट अंग है

हमें गर्व हैं हम भारत में पैदा हुए....

हमें देश पर नही देश चलाने वालों केभ्रष्टाचार पर शर्मिंदा होना चाहिए

हमे देश पर नही देश के रक्षकों के लिए नकली बुलेट प्रूफ जैकेट खरीदने वालों पर शर्मिंदा होना चाहिए

हमें देश पर नही देश पर जान न्यौछावर करने वालों के लिए मंगवाए गए ताबूतों पर कमीशन खाने वालों पर शर्मिंदा होना चाहिए

हमें देश पर नही देश के चुनावों में लच्छेदार
"जुमलों से"
भोली जनता को बहका कर वोट लेने वालों पर शर्मिंदा होना चाहिए....

बातें तो बहुत है......
लेकिन....अंत में....
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
हमें "भारत" पर नही"उन भारतीयों की" बदजुबानी पर शर्मिंदा होना चाहिए जो देश से बाहर जाकर देश की अंदरूनी राजनीती पर चर्चा करते हैं....
और अंदर उनकी पार्टी को वोट ना देने वाली जनता को"हरामजादे" का खिताब देते हैं..और पाकिस्तान भेज दिए जाने की बात करते हैं....

जय हिन्द. जय भारत
🙊🙉🙈

दुआ का तालिब : आपका वसी
मुस्लिम यूथ ब्रदर्स उत्तर प्रदेश (रजि.)
वाट्सऐप सम्पर्क नं. #09335504329

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