15/06/2026
"वसेपुर में लड़ाई रामाधीर और सरदार की नहीं थी, लड़ाई कोयले पर वर्चस्व की थी।"
अब वसेपुर की जगह पटना का मुसल्लहपुर हाट रख दीजिए और कोयले की खदानों की जगह हजारों करोड़ रुपये के कोचिंग उद्योग को।
इस कहानी के दो मुख्य किरदार हैं—
खान सर (खान ग्लोबल स्टडीज), जिनके पास करोड़ों फॉलोअर्स, डिजिटल प्रभाव और विशाल छात्र आधार है।
दूसरी ओर रौशन सर (ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी), जिन्हें उनके समर्थक "दरोगा फैक्ट्री" का संचालक मानते हैं, क्योंकि उनकी संस्था से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी बिहार पुलिस और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हुए हैं।
दोनों का केंद्र एक ही इलाका रहा—किसान कोल्ड स्टोरेज परिसर, मुसल्लहपुर।
2020–21: विस्तार और टकराव
कोरोना महामारी के दौरान कई छोटे कोचिंग संस्थान बंद हो गए। इस दौर में खान सर ने अपनी बढ़ती लोकप्रियता और संसाधनों के बल पर कई खाली हॉल और कार्यालय अपने नियंत्रण में ले लिए। दूसरी तरफ रौशन सर का प्रभाव क्षेत्र अपेक्षाकृत सिमटता दिखाई दिया।
मार्च 2021: पहली बड़ी भिड़ंत
खान सर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि रौशन आनंद, उनके भाई प्रिंस और समर्थक उनके संस्थान में घुस आए, फर्नीचर तोड़ा और कर्मचारियों को धमकाया। यहीं से संघर्ष खुलकर सामने आ गया।
2023: लड़ाई सड़कों से निकलकर छवि की जंग बनी
खान सर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए और लोकप्रिय टीवी कार्यक्रमों तक पहुंचे।
रौशन सर ने आरोप लगाया कि यह सब बड़े पैमाने पर पीआर और प्रचार का परिणाम है।
जवाब में खान सर ने "दरोगा फैक्ट्री" नाम पर तंज कसते हुए कहा—
"फैक्ट्री में मत जाइए, फैक्ट्री में जाएंगे तो मजदूर बन जाएंगे।"
2023 के अंत में: हिंसा और आरोप
ज्ञान बिंदु परिसर में तोड़फोड़ हुई। रौशन सर ने आरोप लगाया कि हमलावरों को खान सर के कार्यालय से समर्थन मिला।
इसी दौरान रौशन सर के भाई प्रिंस पर हमला हुआ, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आईं।
दूसरी ओर खान सर ने आरोप लगाया कि उनके वाहनों पर हमलों और बमबाजी की साजिश रची जा रही है।
फरवरी–मार्च 2026: टॉपर की लड़ाई
वन क्षेत्र पदाधिकारी (Forest Range Officer) परीक्षा का परिणाम आया। राज्य के टॉपर अभिषेक पटेल को लेकर दोनों संस्थानों में दावा-प्रतिदावा शुरू हो गया।
28 मार्च 2026 को अभिषेक पटेल का खान सर के संस्थान में सम्मान हुआ। इसके बाद रौशन सर ने कथित व्हाट्सएप चैट जारी कर आरोप लगाया कि टॉपर को अपने संस्थान से जोड़ने के लिए आर्थिक प्रलोभन दिया गया।
2 जून 2026: संघर्ष चरम पर
आरोप लगा कि ज्ञान बिंदु के प्रवेश द्वार पर लगे बोर्ड के ऊपर दूसरे पक्ष के बैनर लगा दिए गए। विरोध शुरू हुआ, जो जल्द ही पत्थरबाजी और लाठी-डंडों की झड़प में बदल गया।
इसी दौरान आरोप सामने आए कि खान सर के निजी सुरक्षा कर्मियों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवाई फायरिंग की।
3 जून 2026: कानूनी कार्रवाई
घटना के बाद रौशन आनंद और उनके कुछ सहयोगियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। लेकिन बाद में सामने आए सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने खान सर और उनके सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया। पुलिस का आरोप है कि सुरक्षा कर्मियों की कार्रवाई उनके निर्देश पर हुई थी।
और फिर...
जब लगा कि कहानी समाप्त हो रही है, तभी नया मोड़ आ गया। खबरें आईं कि रौशन सर के भाई प्रिंस की नेपाल में रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई।
मुसल्लहपुर की इस कहानी में शायद यही सबसे बड़ा सच है—
यह लड़ाई सिर्फ दो व्यक्तियों की नहीं, बल्कि प्रभाव, प्रतिष्ठा, छात्रों और अरबों रुपये के शिक्षा बाजार पर वर्चस्व की लड़ाई है।
और मुसल्लहपुर में हर अंत, किसी नई शुरुआत की भूमिका लिखता है।
The Skin Dr