10/06/2026
शफी उर्दू लाइब्रेरी, एकहत्था
परिचय, उद्देश्य और लक्ष्य
(शफी उर्दू लाइब्रेरी के सभी शुभचिंतकों और उन सभी सज्जनों से, जो लाइब्रेरी और इसकी गतिविधियों के बारे में जानना चाहते हैं, उनसे अनुरोध है कि इस लेख को पूरा अवश्य पढ़ें।)
ज्ञान, संस्कृति और चमकते अतीत की धरोहर:
एक प्रेरणादायक सफर: खंडहर से गुलिस्तानतक:
पुनर्निर्माण की दास्तान: उम्मीद और संघर्ष:
उद्देश्य और लक्ष्य:
लाइब्रेरी का प्रबंधन और संचालन:
लाइब्रेरी की वर्तमान गतिविधियां
कुछ शंकाओं/आशंकाओं का निवारण
एक निष्ठापूर्ण अपील
ज्ञान, संस्कृति और चमकते अतीत की धरोहर:
एकहत्था के लिए शफी उर्दू लाइब्रेरी केवल ईंट-पत्थर की एक इमारत का नाम नहीं, बल्कि यह एक इतिहास है, एक संस्कृति है, चमकते अतीत की एक जीवित दास्तान है, एकहत्था की शैक्षिक और साहित्यिक गतिविधियों की अमीन है, शैक्षिक और साहित्यिक शौक की विरासत है, उम्मीदों का वह उपवन (चमन) है जिसे हरा-भरा रखने की कोशिशें हर दौर में होती रही हैं।
एक प्रेरणादायक सफर: खंडहर से गुलिस्तानतक:
आखरी कोशिश जिसके नतीजे में यह लाइब्रेरी आज फिर से ताजे फूल की तरह चमकने लगी, की शुरुआत लॉकडाउन के कठिन दौर में उस समय हुई जब कुछ उत्साही युवाओं ने खंडहर होती इमारत को नया जीवन देने का संकल्प लिया और पुरानी इमारत को ही अपने संकल्प और हौसले के रंग-रोगन से वह चमक दी कि मुरझाता हुआ उपवन फिर से लहलहा उठा। इन दो-तीन साल के समय में जब पूरी दुनिया लॉकडाउन की तबाही की तपिश में झुलस रही थी, एकहत्था में शफी उर्दू लाइब्रेरी के साये में शैक्षिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की सुखद हवा चल रही थी। बैत-बाज़ी, मोशायरा, डिबेट, करियर गाइडेंस, और अपनी तरह के दो अनोखे और बेहद सफल पेंटिंग, क्राफ्ट प्रतियोगिता और मैथ व साइंस ओलंपियाड के आयोजन ने घर-घर में शफी उर्दू लाइब्रेरी को जीवित कर दिया और गांव में ज्ञान और साहित्य के माहौल को अनुकूल बनाया।
लॉकडाउन खुलने के बाद, जब फिर से वे युवा जिनके दम से गुलिस्तान में रौनक थी, शिक्षा या रोजगार की तलाश में परदेसी हुए, तो बहार ने भी इस उपवन से अपने पंख समेटना शुरू किया और साहित्यिक व शैक्षिक गतिविधियों का सिलसिला थमने सा लगा, हालांकि ज्ञान और साहित्य के प्यासों के लिए लाइब्रेरी के दरवाजे नियमित रूप से खुलते रहे। मगर कुदरत को यह मंजूर नहीं था कि युवाओं की मेहनत और लगन बर्बाद जाए, तो ऐसा इंतजाम कर दिया कि इसकी रौनक न केवल बाकी रहे, बल्कि इसके निखार में बढ़ोत्तरी होती रहे।
पुनर्निर्माण की दास्तान: उम्मीद और संघर्ष:
पुरानी इमारत अब इतनी जर्जर हो चुकी थी कि बार-बार की मरम्मत नाकाफी थी, इसलिए संरक्षकों की सलाह से युवाओं ने नई इमारत के सपने को हकीकत में बदलने का निश्चय किया और इसके लिए संघर्ष शुरू कर दिया। पूर्व विधायक श्री भारत भूषण जी ने दो बार में लाइब्रेरी की दो मंजिला इमारत बनवाने का वादा किया। सरकारी ग्रांट मिलने में देरी की वजह से पहली मंजिल के निर्माण में दो साल लग गए। इस दौरान लाइब्रेरी के विस्तार के लिए भूमि मालिक की सहमति, विधायक जी से प्रोजेक्ट की मंजूरी और सरकारी प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने की जटिलता, संघर्ष, भाग-दौड़ और उम्मीद-निराशा के समुद्र से गुजरने की एक लंबी कहानी है, जिससे जानने वाले परिचित हैं। यह निर्माण केवल सरकारी सहायता नहीं, बल्कि गांव के जागरूक लोगों के सहयोग और युवाओं के संकल्प का फल है कि लाइब्रेरी की इमारत बड़ी हद तक उसी रूप में पूरी हुई जिस रूप में हम चाहते थे, वरना सरकार की तरफ से बनने वाले मकानों की हालत क्या होती है, सब पर जाहिर है। अब चूँकि सरकार से हमें ग्रांट मिलने की उम्मीद नहीं है, दूसरी मंजिल पर हॉल का निर्माण इन-शा-अल्लाह जनता के सहयोग से पूरा किया जाएगा।
अल्हम्दुलिल्लाह, 8-10 महीनों से गांव के जागरूक विद्वानों की सरपरस्ती में युवाओं की एक कमेटी के तहत लाइब्रेरी पूरी तरह सक्रिय है और इसके तहत गांव में शिक्षा के प्रचार-प्रसार की कोशिशें जारी हैं।
उद्देश्य और लक्ष्य:
लाइब्रेरी का लक्ष्य इलाके में शैक्षिक और साहित्यिक माहौल कायम करना, शिक्षा का प्रचार, उर्दू भाषा का प्रचार, और छात्रों व युवाओं का शैक्षिक और बौद्धिक मार्गदर्शन है, जिसमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण उद्देश्य शामिल हैं:
शफी उर्दू लाइब्रेरी को एक व्यवस्थित और मानक लाइब्रेरी का रूप देना।
इलाके में शैक्षिक जागृति पैदा करने के लिए उपयुक्त और प्रभावी कार्ययोजना तैयार करना।
मानक शिक्षा, विशेष रूप से प्राथमिक शिक्षा को बेहतर करने के लिए कदम उठाना।
इलाके में बच्चे और बच्चियों की शिक्षा के संबंध में मानसिकता तैयार करना, और उनकी अच्छी व उच्च शिक्षा और प्रशिक्षण का उचित प्रबंध करना।
इस्लामी प्रशिक्षण के साथ आधुनिक शिक्षा के लिए उपयुक्त कार्ययोजना तैयार करना।
गांव व इलाके में शिक्षा से जुड़े शिक्षकों और व्यक्तियों के प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) का इंतजाम करना।
मानक अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की हौसला-अफजाई करना और कमजोर छात्रों को वजीफे (छात्रवृत्तियां) देना।
उच्च शिक्षा और प्रोफेशनल कोर्सेज तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शैक्षिक और आर्थिक मदद प्रदान करना।
छात्रों के मार्गदर्शन के लिए करियर गाइडेंस का प्रबंध।
शैक्षिक व सामाजिक जागृति के लिए सभी संसाधन अपनाना, अखबार व पत्रिकाएं निकालना, सेमिनार और कॉन्फ्रेंस आदि आयोजित करना।
लाइब्रेरी का प्रबंधन और संचालन:
लाइब्रेरी एक कोर कमेटी के तहत काम कर रही है जिसमें उन युवाओं के अलावा जिन्होंने लाइब्रेरी को नई जिंदगी देने के सफर की शुरुआत की, वे सभी युवा शामिल हैं जो लाइब्रेरी की नई इमारत के निर्माण के संघर्ष और लाइब्रेरी के तहत होने वाली सभी गतिविधियों में शामिल रहे और जो इसके प्रबंधन में हमेशा आगे रहते हैं। जिसकी सूची नीचे दी गई है:
1. मोहम्मद अली अख्तर अध्यक्ष
2. खतीब अख्तर सचिव
3. दिलशाद गनी सोनी कोषाध्यक्ष (Treasurer)
4. इश्त्याक अहमद नदवी
5. रज़ा-उद-दीन नदवी
6. अनज़र-उल-इस्लाम कासमी
7. दिलशाद गनी
8. शादाब अली
9. नासिर जमाल
10. फजल-उर-रहमान
11. उमर कमाल
12. अबू लैस
13. नवाज शाहिद
कोर कमेटी के अलावा लाइब्रेरी की संरक्षकों पर आधारित एक कमेटी है, साथ ही एक कमेटी विशेष सदस्यों की बनाई गई है, जिसमें गांव के गंभीर, जागरूक और शिक्षित लोग शामिल हैं। इसी तरह एक सामान्य सदस्यों का समूह है जिसमें वे सभी लोग शामिल हो सकते हैं जो लाइब्रेरी का सदस्य बनकर इसकी उन्नति में अपना हिस्सा देने के इच्छुक हैं।
लाइब्रेरी की सभी गतिविधियाँ कोर कमेटी के सदस्यों के परामर्श से संचालित की जाती हैं। लाइब्रेरी के प्रबंधन को सुव्यवस्थित रखने के लिए एक स्थायी वेतनभोगी कर्मचारी नियुक्त किया गया है, जिनकी मुख्य जिम्मेदारियों में लाइब्रेरी को निर्धारित समय पर खोलना और बंद करना, साफ-सफाई का ध्यान रखना, पुस्तकों की व्यवस्थित व्यवस्था और देखभाल करना तथा अन्य प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रूप से पूरा करना शामिल है। लाइब्रेरी का खर्च सदस्यों, मेंबर्स और शुभचिंतकों के मासिक सहयोग से पूरा किया जाता है।
"हम अपने सभी शुभचिंतकों का शुक्रिया अदा करते हैं जिनके सहयोग से यह शैक्षिक मिशन निरंतर जारी है।"
लाइब्रेरी की वर्तमान गतिविधियां
लाइब्रेरी के उद्देश्यों में शिक्षा का प्रचार बहुत महत्वपूर्ण और बुनियादी उद्देश्य है। जब गांव में रहने का मौका मिला और गांव की शैक्षिक स्थिति का करीब से जायजा लिया तो यह चीज उभरकर सामने आई कि गांव में शिक्षा का ग्राफ संख्या के आधार पर ऊपर तो गया है मगर मानक और गुणवत्ता के हिसाब से स्थिति बहुत नाजुक है। विशेष रूप से स्कूलों में पढ़ रहे बच्चे और बच्चियों में 90% वे बच्चे हैं जिन्हें दूसरे विषय तो क्या, उर्दू और हिंदी सही से पढ़ना और लिखना नहीं आता। और यही वजह है कि मैट्रिक और यहां तक कि इंटर कर लेने के बाद भी योग्यता की कमी की वजह से बच्चे आगे नहीं बढ़ पाते। बुनियाद की कमजोरी के साथ एक महत्वपूर्ण वजह गाइडेंस का न मिलना भी है।
इसी स्थिति को नजर में रखते हुए लाइब्रेरी की कोर कमेटी ने गहराई से यह महसूस किया कि हमारा पूरा ध्यान अभी केवल शिक्षा की स्थिति को बेहतर बनाने और विशेष रूप से बुनियाद को मजबूत करने पर हो। इसी एहसास के तहत पिछले साल नवंबर में कक्षा 6-8 के बच्चे और बच्चियों के लिए कोचिंग क्लास से एक छोटी सी शुरुआत की गई। जनवरी में 9वीं की क्लास शुरू हुई, मार्च से 10वीं का इजाफा किया गया और अप्रैल-मई से 11वीं के लिए क्लासेज की शुरुआत की गई है। जिसमें फिलहाल चार वेतनभोगी शिक्षकों के साथ तीन शिक्षक स्वैच्छिक रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
कुछ शंकाओं/आशंकाओं का निवारण
यहाँ पर कुछ लोगों के मन में उभर रहे इस डर को हम दूर करना चाहेंगे, कि क्या लाइब्रेरी को कोचिंग सेंटर में बदल दिया गया है?
बिल्कुल नहीं।
लाइब्रेरी हमेशा से और आज भी सभी ज्ञान और साहित्य के प्यासों के अध्ययन, शोध और लेखन, सेल्फ या ग्रुप स्टडी, और लाइब्रेरी में बड़ी संख्या में उपलब्ध किताबों से लाभ उठाने के लिए खुली है। यह लाइब्रेरी का पहला उद्देश्य है और इस उद्देश्य के लिए कोचिंग क्लासेज न अभी तक बाधा बनी हैं और न आगे इसे बाधा बनने दिया जाएगा। जो लाभ उठाने वाले हैं वे जब चाहें इससे लाभ उठा सकते हैं और उठा भी रहे हैं, उन्होंने कभी यह शिकायत नहीं की कि क्लासेज की वजह से उन्हें अध्ययन की जगह नहीं मिल रही।
कोचिंग क्लासेज लाइब्रेरी के तहत चल रही हैं और लाइब्रेरी के साथ-साथ लाइब्रेरी से सटे मदरसे में भी इसकी कक्षाएं चलाई जा रही हैं। ये कक्षाएं केवल कुछ घंटों के लिए होती हैं, इन समयों में भी लाइब्रेरी का एक कमरा केवल अध्ययन के लिए विशेष रहता है।
इसका दूसरा पहलू यह भी है: पिछले पांच वर्षों में हमें यह कड़वा अनुभव हुआ है कि हमारी विभिन्न कोशिशों के बावजूद लाइब्रेरी को अध्ययन के लिए आने वालों का इंतजार ही रहता है। हां, बाहर शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चे जब घर आते हैं तो वे जरूर इससे लाभ उठाते हैं। भविष्य में पूरी उम्मीद है कि इसका रुझान बढ़ेगा, लेकिन फिलहाल कोचिंग के लिए आने वाले बच्चे और बच्चियों से लाइब्रेरी आबाद रहती है। हमारा अनुभव है कि ये क्लासेज केवल लाइब्रेरी के उद्देश्यों के अनुकूल ही नहीं बल्कि इसे आबाद रखने के लिए एक बड़ी जरूरत है।
कोचिंग की जरूरत क्यों है?
लाइब्रेरी का एक उद्देश्य शिक्षा का प्रचार, समाज में शैक्षिक जागृति और बच्चों की शैक्षिक गाइडेंस है, यह तभी संभव है जब बच्चों के साथ उनके अभिभावकों (गार्जियन) को भी लाइब्रेरी से जोड़ा जाए। ये कोचिंग क्लासेज इसी दिशा में एक कोशिश है। जहां बच्चों की शिक्षा और प्रशिक्षण के साथ अभिभावकों की मानसिकता बनाने और मार्गदर्शन की कोशिश जारी है।
इस कोशिश के असर दिखने में समय लगेगा, लेकिन यह कोशिश किस हद तक सफल है यहां पढ़ रहे बच्चे और बच्चियों के अभिभावक ही बेहतर बता सकते हैं, हमारे लिए यह हौसला बढ़ाने वाला है कि न केवल अभिभावकों की तरफ से बल्कि गांव के उन सभी जागरूक लोगों की तरफ से जो शिक्षा और बच्चे व बच्चियों की राह भटकने के डर से चिंतित रहे हैं, हमें प्रशंसा, हौसला-अफजाई और समर्थन मिला है।
एक सवाल यह उठाया जाता है कि लाइब्रेरी में अगर कोचिंग चल रही है तो इसकी फीस क्यों ली जा रही है, यह सवाल शायद इस गलतफहमी का नतीजा है कि लाइब्रेरी किसी सरकारी फंड से चल रही है।
नहीं। लाइब्रेरी सरकारी यानी विधायक जी के फंड से निर्माण जरूर हुई है, वह भी पूरी तरह नहीं, बल्कि इसमें जनता का भी सहयोग लगा है, लेकिन लाइब्रेरी किसी सरकारी मदद के बिना जनता के विशेष लोगों के सहयोग से चल रही है जो हर महीने लाइब्रेरी को अपना सहयोग देते हैं। लाइब्रेरी के खर्च हैं जिनमें लाइब्रेरियन का वेतन और विभिन्न जरूरतों का खर्च शामिल है। ये जरूरतें उन्हीं सहयोग से पूरी की जाती हैं।
कोचिंग क्लासेज में कुछ शिक्षक जो नौकरीपेशा हैं वे अल्हम्दुलिल्लाह स्वैच्छिक अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अन्य शिक्षकों को वेतन पर रखा गया, उनके वेतन के भुगतान का एक जरिया वह फीस भी है जो बच्चों से ली जाती है, फीस भी किफायती रखी गई है ताकि किसी पर बोझ न हो। अभी फिलहाल लगभग 90 के करीब बच्चे हैं, जिनमें कई ऐसे बच्चे हैं जो बिना फीस के भी पढ़ रहे हैं। वेतन के अलावा क्लास रूम और कोचिंग की अपनी जरूरतें और खर्चे हैं, बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए दो स्मार्ट टीवी खरीदे गए हैं, बेंच-डेस्क बनवाए गए हैं, हर महीने एक निश्चित रकम प्रिंटर व फोटो कॉपी पर खर्च होती है। ये सभी खर्चे, असल में तो फीस से ही पूरे होने चाहिए, लेकिन अभिभावकों पर ज्यादा बोझ नहीं डालकर ऐसा सिस्टम रखा गया है कि फीस और कुछ विशेष शुभचिंतकों के मासिक सहयोग से इन्हें पूरा किया जाता है। फिलहाल फीस की जो रकम हमें प्राप्त हो रही है वह हर महीने के खर्च का एक तिहाई हिस्सा भी नहीं है। हमें नहीं लगता कि बिना फीस के इस तरह की कोई कोशिश जीवित या टिकाऊ रह सकती है। बिना फीस का मतलब पूरी तरह चंदे पर निर्भरता है, जो व्यावहारिक नहीं है।
यहाँ यह स्पष्ट कर देना जरूरी है कि लाइब्रेरी के तहत चलाई जा रही कोचिंग क्लासेज का उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि मानक शिक्षा का प्रचार है, और अल्हम्दुलिल्लाह लाइब्रेरी जिस टीम के तहत काम कर रही है वह खुद बढ़-चढ़कर लाइब्रेरी के लिए समय के साथ आर्थिक सहयोग देती है।
एक और महत्वपूर्ण बात हम अपने पाठकों के सामने रखना चाहेंगे कि लाइब्रेरी के पुनरुद्धार (अहिया) की कोशिशों की शुरुआत से आज तक की आय और खर्च का सारा हिसाब-किताब हमने पूरी ईमानदारी के साथ रखा है। लाइब्रेरी और कोचिंग की आय और खर्च की पूरी जानकारी की रिपोर्ट लाइब्रेरी के सदस्यों और कोर कमेटी के ग्रुप में हर महीने नियमित रूप से पेश की जाती है। इस संबंध में यदि किसी के पास कोई भी पूछताछ हो तो वे कभी भी लाइब्रेरी की कोर कमेटी के किसी भी सदस्य से इसकी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
भविष्य के लक्ष्य:
बुनियादी शिक्षा को मजबूत करना और बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना कि आज से दस साल के बाद गांव के बच्चे देश के हर क्षेत्र में नजर आएं, इन-शा-अल्लाह।
इसके लिए जहां एक तरफ लाइब्रेरी के तहत कोचिंग क्लासेज के सिस्टम को मजबूत किया जाएगा और बच्चों को इस योग्य बनाने की कोशिश की जाएगी कि वे देश में होने वाली विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने की बुनियादी योग्यता रखते हों, दूसरी तरफ अभिभावकों से संपर्क का दायरा बढ़ाया जाएगा और उन्हें अपने बच्चे और बच्चियों की बुनियादी शिक्षा की मजबूती पर ध्यान देने की कोशिश होगी।
अध्ययन के लिए बच्चों को लाइब्रेरी तक लाने के लिए और सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी ताकि बच्चे लाइब्रेरी के शांत माहौल में अध्ययन के लिए प्रेरित हो सकें।
लाइब्रेरी में बच्चे और बच्चियों के अध्ययन के लिए अलग-अलग जगह की व्यवस्था की जाएगी।
बड़ी संख्या में कंप्यूटर सिस्टम लगाए जाएं ताकि बच्चे ऑनलाइन अध्ययन और स्टडी कर सकें और साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी (IT) की जरूरतों से परिचित रहें।
लाइब्रेरी के तहत शैक्षिक, साहित्यिक, और सांस्कृतिक कमेटियां बनाई जाएंगी और उनके तहत विभिन्न गतिविधियों के आयोजन में तेजी लाने की कोशिश होगी।
इन सभी उद्देश्यों और लक्ष्यों के तहत लाइब्रेरी के सामने फिलहाल सबसे बड़ा लक्ष्य ऊपर एक 'मल्टी-पर्पज हॉल' का निर्माण है, जो विभिन्न जरूरतों जैसे स्टडी रूम, स्मार्ट क्लास, मीटिंग रूम और कॉन्फ्रेंस हॉल के तौर पर काम आए। चूंकि अब सरकार की तरफ से किसी मदद की संभावना नहीं है, इसलिए जन सहयोग की मुहिम शुरू हो गई है, और इन-शा-अल्लाह जल्द ही आप सबके सहयोग से इस काम को शुरू कर दिया जाए।
एक निष्ठापूर्ण अपील
हम आखिर में आप सभी लोगों से यह निवेदन करना चाहेंगे कि हमारा समुदाय अभी जिस नाजुक दौर से गुजर रहा है, ऐसे में, समुदाय की भलाई और तरक्की के लिए हम में से हर व्यक्ति का सक्रिय होना और सामूहिक भलाई के लिए काम करना जरूरी है। हमारे सामने इतने काम हैं जो एक या दो व्यक्ति के बस का नहीं। हमारी क़ौम की किस्मत का सितारा तभी चमकेगा जब हममें से हर व्यक्ति इस नाजुक स्थिति को समझेगा और इसके लिए कुछ समय सामूहिक काम को देगा।
हम लोग अपने रोजगार से जुड़े हैं और साथ में जो समय मिलता है उसमें लाइब्रेरी की तरक्की और इसके तहत अपने गांव और इलाके की तरक्की के लिए अपनी क्षमता के अनुसार कोशिश कर रहे हैं। समय की कमी और घरेलू व्यस्तताओं की वजह से जाहिर है हम बेहतरीन रूप में इस काम को चाहकर भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं। हमारे सामने करने को बहुत सारे काम हैं। अगर आप में से हर व्यक्ति इस काम में हमारे हाथ में हाथ मिलाकर हमें हौसला दें तो इन-शा-अल्लाह हम बहुत जल्द इलाके की तस्वीर बदलने में सफल होंगे। अगर आप गांव के बाहर रहते हैं तो आर्थिक मदद के अलावा आप हमें अपने अनुभव की रोशनी में उपयोगी सलाह दे सकते हैं या विभिन्न क्षेत्रों में अपनी कुशलता से लाइब्रेरी को फायदा पहुंचा सकते हैं। अगर गांव में हैं तो बहुत सौभाग्य की बात है कि आप सीधे कुछ समय हमारी गतिविधियों में शामिल होने और लाइब्रेरी के प्रबंधन में हमारा हाथ बटाने के लिए खास कर सकते हैं। इस संबंध में हमारे बहुत से भाई इस इंतजार में रहते हैं कि हमें कहा जाएगा। समय की कमी की वजह से हो सकता है कि हम आप तक नहीं पहुंच सकें, लेकिन आप हर वक्त हम तक पहुंच सकते हैं। यह संस्था हम सबकी है और हम सबका इस पर हक है और इसके प्रति हम सबकी जिम्मेदारी है, आपको किसी का इंतजार करने की जरूरत नहीं, आप सीधे हमारी गतिविधियों में शामिल होकर अपना कीमती रोल अदा कर सकते हैं। हमें हर फायदे और हर मतभेद को भूलकर केवल उम्मत के सामूहिक फायदे के लिए काम करना है और हम करेंगे। इन-शा-अल्लाह। वल्लाहुल मुस्तआन.
"हमने आवाज तुम्हें दी है बड़े नाज के साथ
तुम भी आवाज मिला दो मेरी आवाज के साथ"
प्रेषक: शफी उर्दू लाइब्रेरी, एकहत्था