एक तरफ जहाँ घूसखोरी चरम पर है . बेपरवाह नौकरशाह है . बिचौलिए आम आदमी का हक अपनी तिजोरियों में भर रहे हैं तो दूसरी तरफ हमें धर्म और जात पात के नाम पर बाँट कर अपनी राजनितिक रोटी सेक रहें है. भ्रष्टाचार चाहे वो एक हल्का कर्मचारी करता हो या फिर जन वितरण प्रणाली वाले . चाहे वो सरकारी कार्यालय में बैठे बाबु करते हो या फिर मंत्रालय में बैठे मंत्री. दीमक की तरह हमारे देश हमारे समाज को खत्म कर रहे हैं. राज
नितिक पार्टियों को हमारे गरीबी से ज्यादे चिंता हमारे धर्म की हो गयी है. वो हमें उचित शिक्षा ,व्यवसाय, रोजगार, सुरक्षा, स्वास्थ्य , सड़क, पेयजल देने में नाकाम रहे हैं राजनीति को पूंजीपतियों का खेल बना दिया गया है. हमारे मन मस्तिस्क में इतनी घृणा भर दी गयी है राजनीति के प्रति की हम अब राजनीति के नाम से दूर भागने लगे हैं.जिसका फायदा ये राजनेता उठाते हैं. लेकिन अब समय आ गया है अब इनका खेल खत्म करना है हम सब को अब देश की कमान अपने हाथ में लेनी है अब स्वराज का निर्माण करना है. जिसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ सशक्त कानून हो, राईट टू रिजेक्ट हो, राइट टू रिकोल हो, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले के सुरक्षा के लिए व्हिसलब्लोअर लो हो. और इसके लिए हमें अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व वाले आम आदमी पार्टी को मजबूत बनाने की जरुरत है.