14/06/2024
यहां अनोखे ढंग से होती है लड़की की शादी, पूरा गांव मिलकर उठाता है खर्च, फंड से मिलता है मुर्गा व मछली
घर में शादी ब्याह हो तो सबसे ज्यादा जिम्मेदारी माता-पिता के ऊपर ही आती है. ऐसे में आज हम आपको एक ऐसे अनोखे गांव के बारे में बताने वाले हैं, जहां माता-पिता की जिम्मेदारी पूरा का पूरा गांव अपने कंधे पर उठा लेता है. और बेटी की शादी बड़े धूमधाम के साथ करता है. यह है पूर्वी सिंहभूम जिले का डोभापानी गांव. जहां शादी के समय गांव वाले रिश्तेदारी की तरह मदद करते हैं.दरअसल हम बात कर रहे हैं," पूर्वी सिंहभूम जिले के डोभापानी गांव में लड़की की शादी में उसके माता-पिता पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ता है. बल्कि, सभी गांव वाले उस समय रिश्तेदार बन जाते हैं. कोई लड़की का भाई बन जाता है तो कोई लड़की की मां और सब मिलकर जिम्मेदारी उठाते हैं.गांव के वरिष्ठ सदस्य चंद्रशेखर बताते हैं कि हम लोग संथाली आदिवासी हैं. यहां गरीबी बहुत है. ऐसे में जब शादी की बात होती है तो घबराहट इस समय होने लगती है कि खर्चा कैसे चलेगा. पूरे गांव वालों को कौन खिलाएगा. क्योंकि हमारे यहां शादी में पूरे गांव वालों को खिलाने का रिवाज है.उन्होंने बताया लड़की के माता-पिता पर कोई बोझ न पड़े तो हम लोगों ने मिलकर एक तोड़ निकाला कि क्यों ना सब घर से चावल और पैसे इकट्ठा कर शादी में उपयोग में लाया जाए. इसके अलावा हमारे पास एक सामुदायिक फंड होता है. जिसमें मुर्गा और मछली जैसी चीज होती है. इससे 25 किलो मुर्गा और 10 किलो मछली दान दिया जाता है और पूरे गांव वालों को पेटभर शादी में खिलाया जाता है.इस गांव में संथाली आदिवासी के कुल 40 घर है. हर घर से 200 रुपए नकद और पांच पोयला (पांच किलो) चावल व अन्य सामग्री इकट्ठा की जाती है. और पूरा गांव मिलकर धूमधाम से बेटी की शादी और विदाई करता है.अब इस गांव में किसी भी लड़की की शादी के लिए किसी परिवार को बाहर से कर्ज नहीं लेना पड़ता. बल्कि, गांव वाले आपस में ही मिलकर एक दूसरे की सहायता कर एक मिसाल पेश कर रहे हैं. अच्छी बात यह है की इस अच्छे काम को देखते हुए अन्य गांव वाले भी प्रेरित होकर इस तरह की चीज कर रहे हैं.