shauka

shauka The Shauka living in the Johar valley of Goriganga river in Munsiyari Tehsil are also known as Johari or Johari Shauka. :)

शौका, मध्य हिमालय की एक जनजाति है, जो जोहार घाटी में निवास करते हैं।
यह page, शौका समाज के गौरवमयी इतिहास (जो राजुला-मालुशाही प्रकरण से धामु बुढा के जोहार आगमन, गोरखा आक्रमणकारियों से संघर्ष से लेकर, ब्रिटिश काल और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम तक कही ना कही उत्तराखण्ड और भारत के इतिहास को प्रभावित करता रहा है), तिब्बत व्यापार विनिमय मे दिये गये योगदान, 60's के भारत चीन युद्ध के बाद विरान पङे

मल्ला जोहार के गाँवोँ की दशा, हमारे रीति रिवाज, लुप्त होती परम्पराओँ, शौकाओँ के गौरवशाली अतीत से जुङी तस्वीरोँ को सामने लाने का हमारा एक छोटा सा प्रयास है।

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04/03/2026

रंगों के त्योहार होली की हार्दिक शुभकामनाएं।



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दरकोट गाँव अपनी पारंपरिक हथकरघा एवं ऊन बुनाई की समृद्ध विरासत के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जो सदियों से यहाँ की स्था...
14/02/2026

दरकोट गाँव अपनी पारंपरिक हथकरघा एवं ऊन बुनाई की समृद्ध विरासत के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जो सदियों से यहाँ की स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार रही है। यह शांत हिमालयी गाँव आज भी अपनी सांस्कृतिक पहचान और शिल्प परंपरा को सहेजे हुए है। यहाँ के कारीगर, विशेषकर महिलाएँ, पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक तकनीकों का उपयोग करते हुए हाथ से बुने ऊनी उत्पाद जैसे शॉल, कालीन, स्टोल, पंखी और अन्य पारंपरिक परिधान तैयार करती हैं। इन उत्पादों में स्थानीय रूप से प्राप्त ऊन, विशेषकर अंगोरा एवं भेड़ की ऊन का उपयोग किया जाता है, जो उनकी गुणवत्ता, गर्माहट और टिकाऊपन को विशिष्ट बनाता है।
दरकोट के हस्तनिर्मित वस्त्र अपनी महीन बुनाई, आकर्षक डिज़ाइनों और पारंपरिक पैटर्न के कारण विशेष पहचान रखते हैं। प्रत्येक उत्पाद केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर और कलात्मक अभिव्यक्ति का प्रतीक है। हथकरघा की यह परंपरा न केवल स्थानीय संस्कृति को जीवित रखती है, बल्कि गाँव के परिवारों के लिए सतत और सम्मानजनक आजीविका का मजबूत आधार भी प्रदान करती है।
दरकोट की इस विशिष्ट बुनाई परंपरा और कारीगरों के समर्पण को व्यापक स्तर पर पहुँचाने के उद्देश्य से हिमालयन शेफर्ड द्वारा एक लघु वृत्तचित्र (शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री) का निर्माण किया गया है। यह वृत्तचित्र दरकोट के हथकरघा कार्य, कारीगरों के दैनिक जीवन, उनकी तकनीकी दक्षता और इस शिल्प की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को दर्शाता है। इसके माध्यम से न केवल स्थानीय हस्तशिल्प को प्रोत्साहन मिला है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है।

Himalayan Shepherd has played a significant role in promoting the traditional handloom heritage of Darkot, a renowned village in the Johar Valley celebrated ...

2026 की पहली बर्फबारी।
24/01/2026

2026 की पहली बर्फबारी।

उत्तराखण्ड केe लोकपर्व घुघुतिया की हार्दिक शुभकामनाएं।
14/01/2026

उत्तराखण्ड केe लोकपर्व घुघुतिया की हार्दिक शुभकामनाएं।

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31/12/2025

नववर्ष की शुभकामनाएं।



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मुनस्यारी महोत्सव|  २०२५•स्रोत 📸 : शैलेन्द्र सिंह पांगती✓Follow ➮ ✓Follow ➮ •☆ 𝓓𝓸 𝓽𝓪𝓰 𝔂𝓸𝓾𝓻 𝓯𝓻𝓲𝓮𝓷𝓭𝓼 𝓲𝓷 𝓲𝓽. ☆•            ...
05/12/2025

मुनस्यारी महोत्सव| २०२५



स्रोत 📸 : शैलेन्द्र सिंह पांगती

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मुनस्यारी महोत्सव|  २०२५•स्रोत 📸 : चंदन कुमार✓Follow ➮ ✓Follow ➮ •☆ 𝓓𝓸 𝓽𝓪𝓰 𝔂𝓸𝓾𝓻 𝓯𝓻𝓲𝓮𝓷𝓭𝓼 𝓲𝓷 𝓲𝓽. ☆•                       ...
03/12/2025

मुनस्यारी महोत्सव| २०२५



स्रोत 📸 : चंदन कुमार
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शुभ दिवाली। 🪔•✓Follow ➮ ✓Follow ➮ •☆ 𝓓𝓸 𝓽𝓪𝓰 𝔂𝓸𝓾𝓻 𝓯𝓻𝓲𝓮𝓷𝓭𝓼 𝓲𝓷 𝓲𝓽. ☆•
20/10/2025

शुभ दिवाली। 🪔



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लास्पा - बनकटिया स्रोत 📸 : लास्पा - बनकटिया ट्रैक हेतु संपर्क करें। •✓Follow ➮ ✓Follow ➮ •☆ 𝓓𝓸 𝓽𝓪𝓰 𝔂𝓸𝓾𝓻 𝓯𝓻𝓲𝓮𝓷𝓭𝓼 𝓲𝓷 𝓲𝓽. ☆...
09/10/2025

लास्पा - बनकटिया

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जोहार घाटी के पहले गांव लास्पा में, अभी भेड़पालकों द्वारा, 'करबछ' का निर्माण किया जा रहा है, ताकि शीत ऋतु आने से पहले, व...
01/10/2025

जोहार घाटी के पहले गांव लास्पा में, अभी भेड़पालकों द्वारा, 'करबछ' का निर्माण किया जा रहा है, ताकि शीत ऋतु आने से पहले, वो अपनी भेड़ों के साथ, पलायन कर गर्म स्थलों में पहुंच सकें। नवरात्र के आने के साथ ही ऊंचे जोहारी हिमालयी गांवों से अत्यंत शीत मौसम के चलते, पलायन नीचे की ओर स्थित जोहार वासियों के गांव की ओर होना प्रारंभ हो जाता है।
करबछ, एक तरह का सामान ढ़ोने का झोला होता है, जिन्हें भेड़ों ने रखकर, सामान को एक पड़ाव से दूसरे पड़ाव में पहुंचाया जाता है।



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लास्पा गांव से, रात्रि के समय, बनकटिया का अदभुत दृश्य।स्रोत 📸 : •✓Follow ➮ ✓Follow ➮ •☆ 𝓓𝓸 𝓽𝓪𝓰 𝔂𝓸𝓾𝓻 𝓯𝓻𝓲𝓮𝓷𝓭𝓼 𝓲𝓷 𝓲𝓽. ☆•   ...
26/09/2025

लास्पा गांव से, रात्रि के समय, बनकटिया का अदभुत दृश्य।

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लास्पा गांव और बनकटिया (५५०८ मी.) •✓Follow ➮ ✓Follow ➮ •☆ 𝓓𝓸 𝓽𝓪𝓰 𝔂𝓸𝓾𝓻 𝓯𝓻𝓲𝓮𝓷𝓭𝓼 𝓲𝓷 𝓲𝓽. ☆•
19/09/2025

लास्पा गांव और बनकटिया (५५०८ मी.)



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Address

Munsiyari, Pithoragarh, Uttarakhand
Munsyari
262554

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