08/02/2026
नहीं रहीं मेरी दादी…
मुझे अधूरी ज़िंदगी छोड़कर चली गईं।
माँ के 2012 में निशब्द चले जाने के बाद,
मेरे परिवार की हर ज़िम्मेदारी, हर चिंता, हर दुआ—
सब कुछ दादी ही तो देखती थीं।
आज वही साया उठ गया, और मन पूरी तरह टूट गया है।
आज हालत यह है कि मन इतना विचलित है
कि शब्द भी साथ छोड़ गए हैं।
कुछ लिख पाना आसान नहीं है…
जब मेरी तबियत खराब होती थी,
जब मैं कहीं बाहर रहता था,
तो सबसे पहले दादी का ख्याल आता था—
“खाना खाया या नहीं?”,
“दवा समय से ली या नहीं?”
मुजफ्फरपुर में रहते हुए भी
उनकी चिंता और ममता हर पल मेरे साथ रहती थी।
100 वर्ष से अधिक उम्र जीकर
उन्होंने सिर्फ जीवन नहीं जिया,
बल्कि एक पूरा युग हमें सौंप दिया—
संस्कारों का, त्याग का, स्नेह का।
आज लगता है जैसे
ज़िंदगी का एक बहुत बड़ा हिस्सा
हमेशा के लिए अधूरा हो गया है।
कल उनका अंतिम संस्कार
मेरे पैतृक आवास
मदारीपुर कर्ण में होगा।
जहाँ उन्होंने जीवन जिया,
वहीं से आज उन्हें अंतिम विदाई मिलेगी।
हे ईश्वर,
मेरी दादी की आत्मा को अपने चरणों में स्थान देना
और मुझे यह दुख सहने की शक्ति देना।
आप हमेशा मेरी दादी नहीं,
मेरी माँ थीं…
और हमेशा मेरे दिल में रहेंगी।