राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS

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विशाखापट्टनम के समीप स्थित गुड़िलोवा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ‘अखिल भारतीय समन्वय बैठक’ आयोजित हो रही है।बैठक 19 अ...
19/08/2026

विशाखापट्टनम के समीप स्थित गुड़िलोवा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ‘अखिल भारतीय समन्वय बैठक’ आयोजित हो रही है।बैठक 19 अगस्त प्रातः 9:00 बजे शुरू होकर 21 अगस्त की शाम तक चलेगी।

प्रतिवर्ष होने वाली अखिल भारतीय समन्वय बैठक में संघ की प्रेरणा से कार्य कर रहे कुल 32 संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी भाग लेंगे। बैठक में विविध संगठनों से 49 महिलाओं सहित कुल 253 प्रमुख कार्यकर्ता और संघ के पदाधिकारियों को मिलाकर 327 प्रतिनिधि अपेक्षित हैं।

बैठक में देश की वर्तमान स्थिति, सामाजिक परिवर्तन और समस्याओं को लेकर बैठक में चर्चा होगी। जनसांख्या असंतुलन, डेमोग्राफिक बदलाव तथा उससे उत्पन्न होने वाली चिंताओं व उपायों को लेकर भी बैठक में विचार-विमर्श होगा। नशा मुक्ति: युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं तथा आने वाले समय में सभी संगठन क्या कर सकते हैं, इस विषय पर भी बैठक में चर्चा होगी। नशा मुक्ति के साथ ही युवाओं में जागृति के लिए अन्य विषयों पर भी चर्चा होगी।

अनुशासन, साहस और सेवा का अभ्यास 🚩
19/08/2026

अनुशासन, साहस और सेवा का अभ्यास 🚩

नई शाखा शुरू करना है ???
17/08/2026

नई शाखा शुरू करना है ???



बचपन की कुछ स्‍मृतियां को साथ  #भारत_भारती_ बेतुल में दंगल संपन्न। सूरज के आते भोर हुआलाठी लेझिम का शोर हुआयह नागपंचमी झ...
17/08/2026

बचपन की कुछ स्‍मृतियां को साथ #भारत_भारती_ बेतुल में दंगल संपन्न।

सूरज के आते भोर हुआ
लाठी लेझिम का शोर हुआ
यह नागपंचमी झम्मक-झम
यह ढोल-ढमाका ढम्मक-ढम
मल्लों की जब टोली निकली
यह चर्चा फैली गली-गली
दंगल हो रहा अखाड़े में
चंदन चाचा के बाड़े में।।

सुन समाचार दुनिया धाई,
थी रेलपेल आवाजाई।
यह पहलवान अम्बाले का,
यह पहलवान पटियाले का।
ये दोनों दूर विदेशों में,
लड़ आए हैं परदेशों में।

देखो ये ठठ के ठठ धाए
अटपट चलते उद्भट आए
थी भारी भीड़ अखाड़े में
चंदन चाचा के बाड़े में

वे गौर सलोने रंग लिये,
अरमान विजय का संग लिये।
कुछ हंसते से मुसकाते से,
मूछों पर ताव जमाते से।
जब मांसपेशियां बल खातीं,
तन पर मछलियां उछल आतीं।
थी भारी भीड़ अखाड़े में,
चंदन चाचा के बाड़े में॥

यह कुश्ती एक अजब रंग की,
यह कुश्ती एक गजब ढंग की।
देखो देखो ये मचा शोर,
ये उठा पटक ये लगा जोर।
यह दांव लगाया जब डट कर,
वह साफ बचा तिरछा कट कर।
जब यहां लगी टंगड़ी अंटी,
बज गई वहां घन-घन घंटी।
भगदड़ सी मची अखाड़े में,
चंदन चाचा के बाड़े में॥

वे भरी भुजाएं, भरे वक्ष
वे दांव-पेंच में कुशल-दक्ष
जब मांसपेशियां बल खातीं
तन पर मछलियां उछल जातीं
कुछ हंसते-से मुसकाते-से
मस्ती का मान घटाते-से
मूंछों पर ताव जमाते-से
अलबेले भाव जगाते-से
वे गौर, सलोने रंग लिये
अरमान विजय का संग लिये
दो उतरे मल्ल अखाड़े में
चंदन चाचा के बाड़े में

यहां शायद कुछ भूल रहा हूं।

तालें ठोकीं, हुंकार उठी
अजगर जैसी फुंकार उठी
लिपटे भुज से भुज अचल-अटल
दो बबर शेर जुट गए सबल
बजता ज्यों ढोल-ढमाका था
भिड़ता बांके से बांका था
यों बल से बल था टकराता
था लगता दांव, उखड़ जाता
जब मारा कलाजंघ कस कर
सब दंग कि वह निकला बच कर
बगली उसने मारी डट कर
वह साफ बचा तिरछा कट कर
दंगल हो रहा अखाड़े में
चंदन चाचा के बाड़े में

#शाखा #संघ

यह किस संगठन की बैठक चल रही है ? केवल जागरूक लोग ही जवाब दे सकते हैं। ⛳
17/08/2026

यह किस संगठन की बैठक चल रही है ? केवल जागरूक लोग ही जवाब दे सकते हैं। ⛳


आज 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नागपुर स्थित महाल कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ...
15/08/2026

आज 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नागपुर स्थित महाल कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने ध्वजारोहण किया।

भारत माता की जय 🇮🇳

छोटे हैं हम, पर हमारी दोस्ती सबसे बड़ी है। 🥰
14/08/2026

छोटे हैं हम, पर हमारी दोस्ती सबसे बड़ी है। 🥰

बलिदान की नींव पर खड़ा सौ वर्षों का महायज्ञ: अनगिनत शहादतों से सिंचित संघ का 'शतक वर्ष’_ ===================राष्ट्रीय स्...
14/08/2026

बलिदान की नींव पर खड़ा सौ वर्षों का महायज्ञ: अनगिनत शहादतों से सिंचित संघ का 'शतक वर्ष’_
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने सौ वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा पूर्ण करने के मुहाने पर खड़ा है। एक शताब्दी की यह यात्रा केवल संगठन विस्तार, शाखाओं के नेटवर्क या सामाजिक प्रभाव की कहानी भर नहीं है; यह कहानी उन अनगिनत समर्पित स्वयंसेवकों के त्याग, तपस्या और आत्म-उत्सर्ग की नींव पर रची गई है, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण के इस महायज्ञ में अपने प्राणों की आहुति दे दी।
संघ के इस शताब्दी पर्व का आलोक जितना भास्वर है, उसकी जड़ें स्वयंसेवकों के रक्त और बलिदान से उतनी ही सिंचित हैं। संघ या उससे जुड़े वैचारिक, सामाजिक और राजनीतिक प्रकल्पों—चाहे वह भारतीय जनता पार्टी हो, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), या बजरंग दल—का इतिहास इस बात का साक्षी है कि राष्ट्रीय चेतना के प्रसार और सांस्कृतिक संरक्षण की राह में स्वयंसेवकों को हर कदम पर भारी कीमत चुकानी पड़ी है।

_संघर्ष और शहादत के विविध आयाम_
यद्यपि किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा ऐसे बलिदानों का कोई एकल एकीकृत (मास्टर) डेटाबेस प्रकाशित नहीं किया गया है, लेकिन इतिहास के पन्नों, राज्य विधानसभाओं के अभिलेखों और संघ के आधिकारिक प्रकाशनों में दर्ज आँकड़े इस संघर्ष की भयावहता और स्वयंसेवकों की अटूट निष्ठा को स्पष्ट रूप से उजागर करते हैं:-

_केरल में वैचारिक संघर्ष:-_
केरल की धरती पर वामपंथी हिंसा और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बीच संघ के विचारों को जीवंत रखने के लिए 250 से अधिक स्वयंसेवकों ने अपनी शहादत दी। केवल वर्ष 2000 से 2017 के बीच ही दर्जनों कार्यकर्ताओं को असमय अपनी जान गंवानी पड़ी।

_पंजाब में आतंकवाद के विरुद्ध अडिग निष्ठा:-_
1980 और 90 के दशक में जब पंजाब खालिस्तानी आतंकवाद के साये में था, तब संघ के स्वयंसेवकों ने राष्ट्रीय अखंडता के लिए अभूतपूर्व संबल दिखाया। जून 1989 का मोगा हत्याकांड इसका दर्दनाक प्रमाण है, जहाँ प्रभात शाखा पर हुए उग्रवादी हमले में 25 स्वयंसेवक एक साथ वीरगति को प्राप्त हुए। इस दौर में 200 से अधिक कार्यकर्ताओं ने देश की एकता के लिए बलिदान दिया।

_आपातकाल का दौर (1975-1977):-_ लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के संघर्ष में सत्याग्रह करते हुए और जेलों में अमानवीय यातनाएं सहते हुए 100 से अधिक स्वयंसेवकों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

_पूर्वोत्तर में राष्ट्रवाद की अलख:-_
त्रिपुरा और असम के दुर्गम क्षेत्रों में उग्रवाद के प्रभाव के बावजूद राष्ट्र-निर्माण में जुटे वरिष्ठ प्रचारकों का अपहरण और हत्या (जैसे 1999 में NLFT द्वारा 4 वरिष्ठ प्रचारकों का बलिदान) यह दर्शाता है कि संघ कार्य की कीमत स्वयंसेवकों ने हर क्षेत्र में चुकाई है।

_हालिया राजनीतिक हिंसा:-_
पश्चिम बंगाल हो या देश के अन्य संवेदनशील अंचल, हाल के वर्षों में चुनाव और चुनाव-पश्चात् हुई हिंसा में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने अपने वैचारिक संकल्प के लिए शहादत दी है।

_आत्म-उत्सर्ग से निर्मित 'शतक वर्ष'_
संघ का कोई भी प्रकल्प ऐसा नहीं है चाहे वह सीमावर्ती क्षेत्रों में शिक्षा का कार्य हो, जनजातीय अंचलों में सेवा कार्य हो, या राजनीतिक और छात्र आंदोलनों के माध्यम से राष्ट्रीय मुद्दों को उठाना हो जहाँ किसी स्वयंसेवक ने अपने रक्त से उस विचार को न सींचा हो।
सौ वर्षों की यह यात्रा केवल उपलब्धियों का उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि उन अनगिनत गुमनाम नायकों और *शहीदों को नमन करने का समय है,* जिनकी अस्थियों पर इस विशाल वटवृक्ष की नींव टिकी है। संघ का शताब्दी वर्ष वास्तव में इन्हीं राष्ट्रभक्त स्वयंसेवकों के अक्षुण्ण संकल्प, निष्काम सेवा और अमर बलिदानों का जीवंत प्रतीक है।

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