07/04/2026
ौद….यही शब्द सुनने के लिए क्या 16 सालों से जाट क़ौम के लिए काम कर रहा हूँ, जाट समाज के लिए, देश-दुनिया के राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर #“जाट” शब्द की इज़्ज़त उसके मान, सम्मान और स्वाभिमान के लिए अपनी जवानी क़ुर्बान कर दी और आज जाट समाज का ठेकेदार जाट महासभा का राष्ट्रीय महासचिव मीडिया के सामने बैठकर जाटों की बहन-बेटियों को दूसरे समाज में देने की वकालत कर रहा हैं। शर्म है, लानत है, ऐसी सोच पर, ऐसे विचारों पर। कहाँ मर गया जाट का जमीर जो ऐसे लोगों को बीच में बैठा कर, समाज को बर्बाद करने की साज़िश को अंजाम देने की मुहिम का हिस्सा बन रहे हैं।
यह ौद मुझे नहीं…. #”जाट” शब्द या हर उस युवा, हर उस बहन-बेटी को दे रहा है, जो जाट क़ौम से प्यार करते हैं, जो अपना DNA बचाना चाहते हैं। समाज बंधुओं अब भी कुछ जमीर बचा है तो इस लड़ाई को अंजाम तक पहुँचा दो वरना इतिहास में बहन-बेटियों की इज़्ज़त नहीं बचा पाने के लिए, हम सब इतिहास में काफ़िर, दलाल गद्दार कहलाएँगे।
ये महाशय 40 सालों से जाट समाज की ठेकेदारी कर रहे है और विचार है, जाट समाज के DNA को ख़त्म करने के, क्या जाट महासभा का उद्देश्य जाट समाज की बहन-बेटियों को दूसरी समाज में शादी कराने के लिए प्रेरित करना है।
कहाँ गया जाट समाज का जमीर, कहाँ गया जाट समाज का स्वाभिमान, कहाँ गए बात-बात पर धरने देने वाले, अब तुम्हारा जमीर नहीं जग रहा। यह 75 साल का बुढ़ा समाज को बर्बाद करने की बात कर रहा है। राजस्थान, हरियाणा व उत्तर प्रदेश को तोड़ने की साज़िश को अंजाम दे रहा है और अंतर्जातीय विवाह के नाम पर अपनी बंद पड़ी दुकान जाट महासभा की राजनीतिक चमकाना चाहता है।
राजस्थान वालो तुम्हारी बहन-बेटियों को कैसे खुले में ख़रीदने की बात कर रहा है, जितने भी 70 साल के ऊपर के ये सारे बुढ़े क्या जाट समाज को बर्बाद कर के ही छोड़ेंगे क्या। समझ नहीं आ रहा कि जाट समाज के युवा, इनकी मृत मानसिकता, भ्रष्ट बुद्धि , दिवालिया सोच, का इलाज क्यूँ नहीं कर रहे।
ऐसी जाट महासभा व ऐसे ठेकेदारों का बहिष्कार करना चाहिए जो जाट समाज के DNA को ही ख़त्म करने पर तुले हुए हैं। मैंने क्या गलत बोला #अंतर्जातीय_विवाह पर। हमारा खून, हमारा वजूद, हमारा वंश, हमारा DNA नहीं बचना चाहिए क्या। हमारी बहन बेटियों को कैसे दूसरे समाजों में दे दे, इज़्ज़त से बड़कर क्या होता है, कुछ नहीं होता इज़्ज़त से बड़कर। इज़्ज़त के लिए ही तो रात-दिन काम कर रहे हैं इज़्ज़त चली गई तो समझो सब कुछ ख़त्म हैं, ज़िंदा लाश है फिर हम।
जाट समाज की इज़्ज़त जाट समाज में ही रहे तो हमारा वजूद बचा रहेगा, वरना फिर हम क्यूँ जाट-जाट करते फिर रहे हैं। किस लिए जाट आरक्षण चाहिए, किस लिए जाटों के सम्मान की बात कर रहे है। बहन-बेटियों से बड़कर कोई इज़्ज़त होती है क्या….?
ये समाज का ठेकेदार हैं और इसके विचार सुने #अंतर्जातीय_विवाह के बारे में मुझे तो शर्म आ रही हैं, उन लोगों पर जो अभी तक चुप हैं, अब तो जाग जाओं मेरे भाईयों बचा लो इस जाट क़ौम की इज़्ज़त को।
चौधरी सर छोटूराम जी ने सामाजिक कुरीतियों के विरोध में कितने जाट अधिवेशन किए, कितनी जाट संस्थाओं के नाम जाट रखे, कितनी जाट स्कूल व कॉलेज बनाए, उन्होंने कभी “जाट” शब्द हटाने की वकालत क्यूँ नहीं करी, हमेशा चौधरी सर छोटूराम जी ने स्वयं जाट कॉलेज रोहतक (हरियाणा) जाट कॉलेज बडौत (उत्तर प्रदेश) जाट कॉलेज मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) जाट कॉलेज संगरिया, हनुमानगढ़ (राजस्थान) जाट हॉस्टल आगरा (उत्तर प्रदेश) जाट धर्मशाला पुष्कर (राजस्थान) कितने संस्थाएं स्वयं चौधरी छोटूराम जी ने बनवाई या सहयोग किया यह सब सोचना पड़ेगा आप लोगों को।
इसलिए #“जाट” शब्द एक नाम ही नहीं है जाट शब्द इज़्ज़त सम्मान और स्वाभिमान के साथ जुड़ा है और इससे भी आगे बढ़कर अपने वजूद, अपनी पहचान व DNA के साथ जुड़ा हैं। अगर इस #“जाट” शब्द के लिए और अपनी ेटियों की #इज़्ज़त के लिए जान भी क़ुर्बान करनी पढ़े तो हँसते-हँसते अपनी क़ुर्बानी कर दूँगा मेरा पूर्वज भगतसिहं है।
जितने भी लोग मेरे खिलाफ बोल रहे हैं, उनको दिक़्क़त रामावतार पलसानिया से इसलिए है की गाँव-देहात, ग़रीबी से निकला, पढ़ा-लिखा, जर्नलिज़्म से पीएचडी, जर्नलिज़्म से मास्टर, एलएलबी, पॉलिटिक्स साइंस से मास्टर, योग साइंस से मास्टर, NCC से ‘C’ सर्टिफिकेट हासिल कर पिछले 16 सालों में पुरी दुनिया में इतना बड़ा काम जाट समाज के लिए कर दिया 36 कौम को जोड़ने की बात करता है, दिल्ली, जयपुर, चंडीगढ़, लखनऊ सहित पुरी दुनिया में रामावतार पलसानिया के काम की सराहना तारीफ़ और चर्चा होती हैं। बड़े बड़े मंचों पर पलसानिया को बुलाया जा रहा है, कई ये इन ठेकेदारों से आगे ना निकल जाए, कई ये गरीब जाट का बेटा बड़ा आदमी ना बन जाए, गरीब किसान का बेटा हमारे बराबर क्यूँ बैठने लग गया। पुरी दुनिया का जाट रामावतार पलसानिया को इज़्ज़त सम्मान लाड़ प्यार क्यूँ दे रहा है, तकलीफ़ सिर्फ़ इस बात की है साथियों अब आप लोगों को तय करना है कि रामावतार पलसानिया ने क्या गुनाह किया है क़ौम की इस लड़ाई को लड़कर।
रामावतार पलसानिया अगर घर बेठ गया तो समझ लेना सदियों में कोई भी जाट का बेटा, फिर जाट कौम के वजूद की इस लड़ाई में, DNA को बचाने की इस लड़ाई की आवाज कोई नहीं उठाएगा। अगर मेरे काम से दिक़्क़त है, मेरे से व्यक्तिगत दिक़्क़त है, तो फिर कभी भी लड़ लेना मेरे से, मेरी फिर कभी भी टांग खींच लेना, लेकिन इस वजूद की लड़ाई में मेरा साथ दे दो, भविष्य में कभी आप लोगों को ज़रूरत पड़े तो मैं मेरी क़ुर्बानी आप लोगों के लिए देने को हमेशा तैयार रहूँगा। इस से ज़्यादा ना कुछ बोल सकता ना लिख सकता।
विनम्र गुज़ारिश है - पिछले एक हफ़्ते से मेरे साथ क्या-क्या किया जा रहा है, आप सब लोगों को सब पता हैं, मुझे प्रताड़ित किया जा रहा है, परेशान किया जा रहा है, मेरा चीर हरण किया जा रहा है, अब मेरी इज़्ज़त मेरा वजूद आपके हाथों में है। इन जाट समाज के ठेकेदारों व मगरमच्छों को समझ लो वरना ये जाट क़ौम की इज़्ज़त को भरे चौराहे पर बेचने के लिए तैयार हैं और ख़रीददार बुला रहे हैं, खुलेआम, खुले मंचों से। आप तय कर लो अब क्या करना है, इन ठेकेदारों व मगरमच्छों का 🙏
पगड़ी सँभाल जट्टा। इंकलाब ज़िंदाबाद।
रामावतार पलसानिया
(आपका बेटा, आपका भाई, जाट क़ौम का सेवक)