VANDE Bharat

VANDE Bharat सामाजिक परिवर्तन लाने, मानवीय सहायता प्रदान करने, समुदायों को विकसित करने और दुनिया भर में आबादी के अधिकारों और कल्याण की वकालत करने के लिए

23/08/2026

जब पंडित जवाहरलाल नेहरू गांव पनिआड आए - 1947

*बात 15 अगस्त 1947 की है।* देश भर में आज़ादी की खुशियाँ मनाई जा रही थीं और हमारे गाँव पानीयाड़ में जो मुस्लिम परिवार थे, परेशान थे। उन्हें यहाँ रहना सुरक्षित नहीं लग रहा था क्योंकि पाकिस्तान की तरफ से रेलगाड़ियों में हिन्दू भाइयों-बहनों, बच्चों की लाशें आ रही थीं। देश के दोनों तरफ दंगे हो रहे थे।

जैसे मैंने आपको बताया हमारा परिवार भी उन दिनों *दादा पंडित बनवारी लाल शारदा जी, दादी विद्यावती शारदा जी, ताया श्री शिव कुमार शारदा जी, आनंद कुमार शारदा जी* एवं मेरे पिता *श्री जतिंदर कुमार शारदा जी* जो कि 15 साल के थे, सभी पानीयाड़ गाँव में थे।

और 15 अगस्त से पहले हमारा घर जो कि पानीयाड़ में एक मामूली से किराए पर लिया हुआ था, *क्रांतिकारी गतिविधियों का केंद्र* हुआ करता था ब्रिटिश राज में। दोनों ताया जी श्री शिव कुमार शारदा और बुआ जी *शकुंतला ऋषि* को क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण जेल या फरारी काटनी पड़ती थी और तो और गुरदासपुर ज़िले में कोई भी कार्रवाई ब्रिटिश के खिलाफ होती तो हमारे परिवार पर ही शक जाता, घर की तलाशियाँ होतीं।

मेरी दादी जी ब्रिटिश पुलिस से बहुत मज़बूती से बात करतीं और कहतीं कि *"घर की तलाशी अगर लेनी है तो पहले अपनी तलाशी देकर जाओ, कहीं अपने साथ लाए सामान या गलत हथियार को मेरे घर में रखकर हमें गलत फँसाना तो तेरे आने का उद्देश्य नहीं है।"* वो बहुत हिम्मत वाली महिला थीं।

फिर ताया जी श्री शिव कुमार शारदा जी और सारे परिवार और गाँव वालों, जिसमें उस वक़्त गाँव के सरपंच जो कि राजपूत थे (उनका नाम पिता जी को याद नहीं आ रहा) और एक और गाँव के किसान *ठाकुर उधम सिंह जी* और सभी गाँव वालों ने उन मुस्लिम परिवारों को बचाने की शपथ ली कि *"इन परिवारों को हम अपनी जान देकर भी बचाएंगे।"*

यह बात पूरे ज़िला गुरदासपुर में फैल गई। आस-पास से मुस्लिम परिवार भी शरण लेने पानीयाड़ आने लगे। धीरे-धीरे यह संख्या *50,000 से भी ऊपर* हो गई।

सारी की सारी व्यवस्था गाँव वाले मिलकर कर रहे थे। टोलियाँ बना कर थोड़े-बहुत मामूली हथियारों के साथ सुरक्षा का ज़िम्मा युवा लोगों ने उठा रखा था, लेकिन हालात दिन-ब-दिन बिगड़ रहे थे। ताया जी श्री शिव कुमार शारदा जी को धमकियाँ आ रही थीं कि *"आप पीछे हट जाओ"* पर पानीयाड़ गाँव के सभी लोग एकजुट थे।

फिर *24 अगस्त 1947* को पता चला कि *पंडित जवाहर लाल नेहरू जी*, प्रधानमंत्री, बॉर्डर एरिया के दौरे पर हैं और बँटवारे के बाद हुए बुरे प्रभाव को देखने जालंधर और फिर बॉर्डर एरिया में पाकिस्तान उच्चायोग, भारत के वरिष्ठ अधिकारी के साथ आएंगे।

नेहरू जी तक यह बात पहुँचाई गई और वो पानीयाड़ का बचाव शिविर देखने को आए। उन्होंने सारा शिविर हमारे ताया जी के कंधे पर हाथ रख कर देखा और पाकिस्तान उच्चायोग के वरिष्ठ अधिकारी से कहा कि *"आपके पाकिस्तान में ऐसा शिविर लगा है कहीं?"* उनकी आँखें शर्म से झुकी हुई थीं।

प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू जी ने वहाँ मिट्टी के ढेर के ऊपर खड़े होकर 50,000 से ऊपर मुसलमानों, जिनमें ज़्यादा महिलाएँ और बच्चे भी थे, को आश्वासन दिया कि *"आप सुरक्षित हो। जो रुकना चाहता है रुक सकता है, जो पाकिस्तान जाना चाहता है उसे सुरक्षित डेरा बाबा नानक बॉर्डर से पाकिस्तान भेज दिया जाएगा।"* और आर्मी और पुलिस को उन सब की ज़िम्मेदारी दी।

*आज जब पिता जी उन दिनों को याद करते हैं तो हमारा सीना गर्व से भर जाता है।*

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18/07/2026

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*"सीड रेन" का विचार 🌱*हाँ — हम कर सकते हैं। मानसून में प्रकृति आधा काम खुद कर देती है। फलों के बीजों को बर्बाद करने के ब...
15/07/2026

*"सीड रेन" का विचार 🌱*

हाँ — हम कर सकते हैं। मानसून में प्रकृति आधा काम खुद कर देती है। फलों के बीजों को बर्बाद करने के बजाय, हम उन्हें छोटे-छोटे जंगलों में बदल सकते हैं।

*कॉन्सेप्ट:*
जब आप आम, जामुन, अमरूद, नींबू खाएँ तो बीज इकट्ठा कर लें। उन्हें कचरे में मत फेंकें। बीजों को साफ करके सुखा लें, और बारिश के दौरान खाली प्लॉट, रोड डिवाइडर, पहाड़ी ढलान और बंजर जमीन पर बिखेर दें। बारिश + मिट्टी = अंकुरण।

*समुदाय 100 शब्दों में कैसे योगदान दे सकते हैं:*
1. *सोसाइटी में बीज बैंक:* गेट पर एक डिब्बा रखें। सब लोग धुले और सूखे बीज उसमें डालें।
2. *सीड-बम ड्राइव:* बीजों को मिट्टी + खाद के साथ मिलाकर गोले बना लें। बच्चे इन्हें वॉक पर जाते समय खाली जमीन पर फेंकना बहुत पसंद करेंगे।
3. *मानसून वॉक:* स्कूल, RWA, कॉलेज एक वीकेंड तय करें। साइकिल/वॉक करते हुए 2-3 तय की गई बंजर जगहों पर बीज बिखेरें।
4. *मैप करें:* WhatsApp ग्रुप पर जगहें मार्क कर दें ताकि एक ही जगह पर ज्यादा भीड़ न हो।
5. *टैग और ट्रैक करें:* मानसून से पहले और बाद की फोटो लें। उगे हुए पौधों को सेलिब्रेट करें।

छोटा कदम, आगे चलकर बड़ी छाया।
आप किस फल के बीज से शुरुआत करेंगे?

Celebrating my 3rd year on Facebook. Thank you for your continuing support. I could never have made it without you. 🙏🤗🎉
27/06/2026

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04/06/2026

ਬੀਜੇਪੀ ਕਾਰਯਕਰਤਾ ਨਾਲ ਕੋਈ ਧੱਕਾ ਬਰਦਾਸ਼ਤ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ
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24/05/2026

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*कैमरे से भारत की आत्मा को पकड़ने वाले कलाकार: रघु राय*(26 अप्रैल 2026 को उनका निधन हो गया।)*"फोटोग्राफी समय को थाम लेने...
26/04/2026

*कैमरे से भारत की आत्मा को पकड़ने वाले कलाकार: रघु राय*
(26 अप्रैल 2026 को उनका निधन हो गया।)

*"फोटोग्राफी समय को थाम लेने का जरिया है"* - यह कहना था पद्मश्री रघु राय का, जिन्होंने पिछले 6 दशकों से अपने कैमरे से भारत की धड़कन को दुनिया तक पहुँचाया।

*1. शुरुआत: सिविल इंजीनियर से फोटोग्राफर तक*
दिसंबर 1942 में झंग, पंजाब में जन्मे रघु राय ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। 1965 में, 23 साल की उम्र में, बड़े भाई एस पॉल से प्रेरणा लेकर उन्होंने फोटोग्राफी शुरू की। 1966 में 'द स्टेट्समैन' अखबार से चीफ फोटोग्राफर के रूप में करियर शुरू किया।
*2. दुनिया ने माना लोहा*
1971 में पेरिस में उनकी प्रदर्शनी देखकर महान फोटोग्राफर हेनरी कार्टियर-ब्रेसों इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने रघु राय को दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित फोटो एजेंसी 'मैग्नम फोटोज' के लिए नामित किया। 1977 में वे मैग्नम से जुड़े। 1972 में बांग्लादेश शरणार्थी संकट और युद्ध को कवर करने के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। 1992 में नेशनल जियोग्राफिक की स्टोरी के लिए अमेरिका में 'फोटोग्राफर ऑफ द ईयर' बने। 2009 में फ्रांस सरकार ने 'ऑफिसियर देस आर्ट्स ए देस लेट्रेस' से नवाज़ा।
*3. तस्वीरें जो इतिहास बन गईं*
- *भोपाल गैस त्रासदी 1984*: आधी रात को दिल्ली में फोन आया और सुबह 8 बजे भोपाल पहुँच गए। उनका खींचा हुआ कीचड़ में दबे बच्चे का चेहरा इस त्रासदी की सबसे चर्चित तस्वीर बन गई। उन्होंने कहा था: "ऐसा लगा जैसे युद्ध अभी खत्म हुआ हो"।
- *मदर टेरेसा, दलाई लामा, इंदिरा गांधी, बिस्मिल्लाह खान* - हर बड़े व्यक्तित्व को उन्होंने अपने लेंस से अमर कर दिया।
- *इमरजेंसी 1975*: जब सेंसरशिप थी, तब चांदनी चौक की सूनी सड़क की तस्वीर के साथ कैप्शन दिया "Life normal in Chandni Chowk" - जो अपने आप में बड़ा सच बयान कर गई।
*4. विरासत*
'इंडिया टुडे' के फॉर्मेटिव सालों में पिक्चर एडिटर रहे। 50 से ज्यादा किताबें: 'रघु रायज दिल्ली', 'द सिख्स', 'ताज महल', 'मदर टेरेसा'। उनकी बेटी अवनी राय ने उन पर 'Raghu Rai: An Unframed Portrait' डॉक्यूमेंट्री बनाई।
रघु राय ने सिखाया कि फोटोग्राफी सिर्फ क्लिक नहीं है, बल्कि "ठंडी आँख और गर्म दिल" से दुनिया को देखना है। 2003 के बाद उन्होंने पूरी तरह डिजिटल कैमरा अपना लिया था।
भारत का विज़ुअल इतिहास रघु राय के बिना अधूरा है। कैमरे की दुनिया का एक सूरज अस्त हो गया।*

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