05/08/2026
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पटना, 5 अगस्तः
‘‘जेन जी आन्दोलन लोगों के असंतोष का इजहार है। इस ऐतिहासिक आन्दोलन की जीत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि चुनाव नहीं, बल्कि आन्दोलन ही किसी सरकार को झुकने के लिए मजबूर कर सकता है।’’
उक्त बातें आज सर्वहारा वर्ग के महान नेता, महान मार्क्सवादी दार्शनिक व चिंतक तथा सोशलिस्ट यूनिटी सेन्टर ऑफ इण्डिया (कम्युनिस्ट) के संस्थापक महासचिव शिवदास घोष के 50वें स्मृति दिवस पर स्थानीय आई एम ए हॉल में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) के पोलित ब्यूरो सदस्य सह पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी के सचिव कॉमरेड चंडीदास भट्टाचार्य ने कही।
एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) बिहार राज्य कमेटी के तत्वावधान में आयोजित इस महती जनसभा को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित करते हुए कॉमरेड चंडीदास भट्टाचार्य ने कहा कि दिल्ली और पूरे देश में हुए हाल के छात्र-युवा आन्दोलन से पहले ऐसा लगता था कि लोग राजनीति से उदासीन हैं, लेकिन जब आन्दोलन ऽड़ा हुआ, तो उसने यह तस्वीर बदल दी। उन्होंने इस ऐतिहासिक आन्दोलन की जीत को भाजपा नेतृत्ववाली फासीवादी केन्द्र सरकार की दूसरी हार बताते हुए कहा कि पांच साल पहले दिल्ली में हुए ऐतिहासिक किसान आन्दोलन को पहली हार बतायी, जिसमें केन्द्र सरकार को तीन काले कृषि कानूनों को वापस लेना पड़ा था।
कॉमरेड भट्टाचार्य ने कहा कि खाद्यान्न, दवाओं और रोजाना इस्तेमाल की वस्तुओं की बेलगाम महंगाई ने मेहनतकश आम अवाम का जीन मुहाल कर दिया है। बदहाल होती शिक्षा, बढ़ती बेरोजगारी, सांस्कृतिक-नैतिक मूल्यों में गिरावट की वजह से आम लोगों के लिए गरिमापूर्ण जिन्दगी जीना असंभव होता जा रहा है। देश में आर्थिक असमानता इतनी बड़ी है कि देश की कुल सम्पत्ति का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा शीर्ष एक प्रतिशत आबादी के पास केन्द्रित है। फसल का वाजिब दाम न मिलने और कर्ज के बोझ तले दबकर देश में लाखों किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की वजह से देश के किसान अपने उत्पाद कम दामों पर बेचने को मजबूर होंगे, जबकि देशी-विदेशी पूंजीपति बाजार में उन्हीं उत्पादों को अधिक दामों पर बेचकर मालामाल होंगे। नतीजतन, देश के आम लोगों को इससे कोई फायदा होने वाला नहीं है।
शिवदास घोष के संघर्ष पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 1942 में ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में गिरफ्रतार होकर जब वे 1945 में जेल से बाहर आये, तो अपने कुछ सहयोद्धाओं को लेकर आजादी के एक साल बाद 1948 में एक सही मार्क्सवादी-लेनिनवादी पार्टी के तौर पर एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) की स्थापना की। आजादी आन्दोलन की क्रांतिकारी धारा के एक सेनानी के तौर पर शिवदास घोष ने देखा कि देश तो राजनैतिक तौर पर आजाद हो गया है, लेकिन लोगों के आर्थिक, राजनैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक--हर प्रकार के शोषण से छुटकारा पाने का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है। इसलिए देश में तमाम समस्याओं की जड़ इस पूंजीवादी व्यवस्था को उखाड़ फेंककर समाजवाद कायम करने के लिए क्रांति की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कहा कि केन्द्र और राज्य में पूंजीपतियों की हितैषी सत्ताधारी पार्टियों के खिलाफफ़ एक ताकतवर वामपंथी आन्दोलन खड़ा करना वक्त की जरूरत है।
सभा की अध्यक्षता करते हुए एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) केन्द्रीय कमेटी सदस्य सह बिहार राज्य सचिव कॉमरेड अरुण कुमार सिंह ने बिहार में भाजपा के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार द्वारा एक पर एक लागू की जा रही जनविरोधी व दमानात्मक नीतियों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश के खास्हाल गांवों में राज्य सरकार ने होल्डिंग टैक्स बढ़ा दिया है, जिससे गांवों की बदहाली में और इजाफा होगा। उन्हाेंने कहा कि घोर गरीबी, चरम बेरोजगारी, और पलायन का दंश झेल रहे बिहार में बुलडोजर से गरीबों के आशियाने उजाड़े जा रहे हैं एक तरह हत्या, लूट और अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है, महिलाओं के खिलाफ बलात्कार-हत्या और उत्पीड़न की घटनाओं में इजाफा हो रहा है, तो दूसरी तरफ जन आन्दोलन पर दमन बढ़ रहे हैं, यहां तक कि पुलिस द्वारा एनकाउन्टर की घटनाओं को भी अंजाम दिया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि जनता के सामने अब आन्दोलन और संघर्ष के सिवा और कोई रास्ता नहीं बचा है।
जनसभा में नीट आन्दोलन में छात्र-युवाओं पर बर्बर पुलिसिया दमन, शिक्षा के भगवाकरण तथा उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता पर हमले के खिलाफ एक निन्दा प्रस्ताव पार्टी राज्य कमेटी सदस्य कॉमरेड साधना मिश्रा ने पेश किया, जिसे सर्वसम्मति से पास किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत पार्टी के संस्थापक महान मार्क्सवादी दार्शनिक व चिंतक शिवदास घोष पर रचित गीत से हुई तथा समापन अन्तर्राष्ट्रीय गीत से हुआ। मंच पर पार्टी राज्य कमिटी के सभी सदस्य मौजूद थे।