SUCI Communist, Bihar

SUCI Communist, Bihar Long Live Marxism-Leninism-Shibdas Ghosh Thought

23/08/2026

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22 अगस्त 2026

22/08/2026
पढ़िए, एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) के मुखपत्र सर्वहारा दृष्टिकोण का ताजा अंक...
09/08/2026

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08/08/2026

🔴 एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) ने राज्य में मध्य विद्यालयों के मर्जर की नीति का किया विरोध

🔴 सभी विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने की मांग की

पटना, 08 अगस्त :
राज्य में पीएम श्री स्कूल योजना के रूप में चयनित राजकीय उच्च एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों के साथ आसपास के मध्य विद्यालयों की कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के मर्जर की नीति का एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) ने विरोध किया है।

इस संबंध में प्रेस को जारी बयान में पार्टी के राज्य सचिव अरुण कुमार सिंह ने कहा कि मर्जर की इस नीति से मध्य विद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं, खासकर छात्राओं को अपने बगल के विद्यालय को छोड़कर दूर के पीएम श्री विद्यालय में जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इस वजह से उनके सामने सुरक्षा तथा आवागमन की समस्याएं खड़ी हो गयी हैं।

उन्होंने कहा कि पीएम श्री विद्यालयों के साथ मध्य विद्यालयों का मर्जर करते हुए सरकार की मंशा मंजर किये गये मध्य विद्यालयों को समाप्त कर देने की है। उन्होंने आगे कहा कि पीएम श्री विद्यालयों में पहले से नामांकित छात्रों के लिए ही पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, ऐसे में जाहिर है कि इन विद्यालयों में आवश्यक बुनियादी सुविधाएं बहाल किये बिना आसपास के मध्य विद्यालयों के मर्जर किये जा रहे अतिरिक्त छात्रों का पठन-पाठन बुरी तरह से प्रभावित होगा।

श्री सिंह ने केन्द्र और राज्य सरकार से मांग की कि पीएम श्री योजना के अंतर्गत चयनित विद्यालयों सहित सभी सरकारी विद्यालयों में पठन-पाठन का समुचित माहौल कायम करने हेतु वहां आवश्यक बुनियादी सुविधाएं मुहैया करायी जायें। मध्य विद्यालयों का मर्जर करते हुए उन्हें अंततोगत्वा समाप्त कर दिये जाने की नीति पर रोक लगायी जाये। सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने एवं शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देने वाली नीतियां वापस ली जायें।

06/08/2026

बिहार राज्य सरकार द्वारा 16 मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों के पीपीपी मोड पर चलाने के फैसले का एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) ने किया विरोध

पटना, 6 अगस्त :
बिहार में भाजपा-जदयू सरकार द्वारा राज्य के 16 मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों के पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मोड पर चलाने के फैसले का एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) ने विरोध किया है।

पार्टी के राज्य सचिव अरुण कुमार सिंह ने इस संबंध में कहा कि ऐसी स्थिति में जब महंगे निजी अस्पतालों में इलाज कराने में असमर्थ आम आदमी सरकारी अस्पतालों में उपयुक्त संख्या में डॉक्टर, नर्स तथा स्वास्थ्य कर्मियों की कमी, पर्याप्त मात्रा में दवाएं न मिलने तथा समय पर जांच न होने की समस्या से रूबरू होकर इलाज से महरूम हो रहा है, तब नये 16 मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों को पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मोड पर चलाने का फैसला पूरी तरह से जनविरोधी है।

उन्होंने कहा कि राज्य की जनता के स्वास्थ्य की देखभाल करना और उसे स्वस्थ रखना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए। लेकिन सम्राट चौधरी सरकार ने जनहित को पूरी तरह से नजरअंदाज करते हुए 16 नये अस्पतालों को पूंजिपतियों के मुनाफा कमाने के लिए खुला छोड़ दिया है, जबकि इन्हें आम जनता के टैक्स के पैसे से बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इन अस्पतालों को पीपीपी मोड पर चलाने से वहां अध्ययन करने वाले छात्रों को काफी फीस देनी होगी। साथ ही उन अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को अतिरिक्त फीस देनी होगी। नतीजतन, उनके लिए वहां इलाज कराना मुश्किल हो जायेगा।

श्री सिंह ने लोगों से, खासकर गरीबों और मेहनतकशों से राज्य सरकार के इस जनविरोधी कदम का डटकर विरोध करने का आह्वान किया है।

आज 5 अगस्त को सर्वहारा वर्ग के महान नेता कॉमरेड शिवदास घोष के 50वें स्मृति दिवस पर एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) पश्चिम बंगाल रा...
05/08/2026

आज 5 अगस्त को सर्वहारा वर्ग के महान नेता कॉमरेड शिवदास घोष के 50वें स्मृति दिवस पर एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी के तत्वावधान में भीषण प्राकृतिक आपदा को नजरअंदाज करते हुए कोलकाता के रानी रासमणि रोड पर एक विशाल जनसभा हुई। जनसभा को पार्टी के महासचिव कॉमरेड प्रभास घोष ने बतौर मुख्य वक्ता संबोधित किया। जनसभा की अध्यक्षता पार्टी के केन्द्रीय कमेटी सदस्य कॉमरेड देवाशीष राय ने की।

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05/08/2026

(We appeal to the viewers whose translation option is "on" on the facebook settings, please ignore the Bengali or English translation of this news item. Because meta (Facebook) is making erroneous translation of the news and it may create confusion. So, please donot depend on facebook translation, read the original text in Hindi.)

पटना, 5 अगस्तः
‘‘जेन जी आन्दोलन लोगों के असंतोष का इजहार है। इस ऐतिहासिक आन्दोलन की जीत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि चुनाव नहीं, बल्कि आन्दोलन ही किसी सरकार को झुकने के लिए मजबूर कर सकता है।’’

उक्त बातें आज सर्वहारा वर्ग के महान नेता, महान मार्क्सवादी दार्शनिक व चिंतक तथा सोशलिस्ट यूनिटी सेन्टर ऑफ इण्डिया (कम्युनिस्ट) के संस्थापक महासचिव शिवदास घोष के 50वें स्मृति दिवस पर स्थानीय आई एम ए हॉल में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) के पोलित ब्यूरो सदस्य सह पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी के सचिव कॉमरेड चंडीदास भट्टाचार्य ने कही।

एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) बिहार राज्य कमेटी के तत्वावधान में आयोजित इस महती जनसभा को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित करते हुए कॉमरेड चंडीदास भट्टाचार्य ने कहा कि दिल्ली और पूरे देश में हुए हाल के छात्र-युवा आन्दोलन से पहले ऐसा लगता था कि लोग राजनीति से उदासीन हैं, लेकिन जब आन्दोलन ऽड़ा हुआ, तो उसने यह तस्वीर बदल दी। उन्होंने इस ऐतिहासिक आन्दोलन की जीत को भाजपा नेतृत्ववाली फासीवादी केन्द्र सरकार की दूसरी हार बताते हुए कहा कि पांच साल पहले दिल्ली में हुए ऐतिहासिक किसान आन्दोलन को पहली हार बतायी, जिसमें केन्द्र सरकार को तीन काले कृषि कानूनों को वापस लेना पड़ा था।

कॉमरेड भट्टाचार्य ने कहा कि खाद्यान्न, दवाओं और रोजाना इस्तेमाल की वस्तुओं की बेलगाम महंगाई ने मेहनतकश आम अवाम का जीन मुहाल कर दिया है। बदहाल होती शिक्षा, बढ़ती बेरोजगारी, सांस्कृतिक-नैतिक मूल्यों में गिरावट की वजह से आम लोगों के लिए गरिमापूर्ण जिन्दगी जीना असंभव होता जा रहा है। देश में आर्थिक असमानता इतनी बड़ी है कि देश की कुल सम्पत्ति का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा शीर्ष एक प्रतिशत आबादी के पास केन्द्रित है। फसल का वाजिब दाम न मिलने और कर्ज के बोझ तले दबकर देश में लाखों किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की वजह से देश के किसान अपने उत्पाद कम दामों पर बेचने को मजबूर होंगे, जबकि देशी-विदेशी पूंजीपति बाजार में उन्हीं उत्पादों को अधिक दामों पर बेचकर मालामाल होंगे। नतीजतन, देश के आम लोगों को इससे कोई फायदा होने वाला नहीं है।

शिवदास घोष के संघर्ष पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 1942 में ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में गिरफ्रतार होकर जब वे 1945 में जेल से बाहर आये, तो अपने कुछ सहयोद्धाओं को लेकर आजादी के एक साल बाद 1948 में एक सही मार्क्सवादी-लेनिनवादी पार्टी के तौर पर एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) की स्थापना की। आजादी आन्दोलन की क्रांतिकारी धारा के एक सेनानी के तौर पर शिवदास घोष ने देखा कि देश तो राजनैतिक तौर पर आजाद हो गया है, लेकिन लोगों के आर्थिक, राजनैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक--हर प्रकार के शोषण से छुटकारा पाने का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है। इसलिए देश में तमाम समस्याओं की जड़ इस पूंजीवादी व्यवस्था को उखाड़ फेंककर समाजवाद कायम करने के लिए क्रांति की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कहा कि केन्द्र और राज्य में पूंजीपतियों की हितैषी सत्ताधारी पार्टियों के खिलाफफ़ एक ताकतवर वामपंथी आन्दोलन खड़ा करना वक्त की जरूरत है।

सभा की अध्यक्षता करते हुए एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) केन्द्रीय कमेटी सदस्य सह बिहार राज्य सचिव कॉमरेड अरुण कुमार सिंह ने बिहार में भाजपा के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार द्वारा एक पर एक लागू की जा रही जनविरोधी व दमानात्मक नीतियों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश के खास्हाल गांवों में राज्य सरकार ने होल्डिंग टैक्स बढ़ा दिया है, जिससे गांवों की बदहाली में और इजाफा होगा। उन्हाेंने कहा कि घोर गरीबी, चरम बेरोजगारी, और पलायन का दंश झेल रहे बिहार में बुलडोजर से गरीबों के आशियाने उजाड़े जा रहे हैं एक तरह हत्या, लूट और अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है, महिलाओं के खिलाफ बलात्कार-हत्या और उत्पीड़न की घटनाओं में इजाफा हो रहा है, तो दूसरी तरफ जन आन्दोलन पर दमन बढ़ रहे हैं, यहां तक कि पुलिस द्वारा एनकाउन्टर की घटनाओं को भी अंजाम दिया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि जनता के सामने अब आन्दोलन और संघर्ष के सिवा और कोई रास्ता नहीं बचा है।

जनसभा में नीट आन्दोलन में छात्र-युवाओं पर बर्बर पुलिसिया दमन, शिक्षा के भगवाकरण तथा उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता पर हमले के खिलाफ एक निन्दा प्रस्ताव पार्टी राज्य कमेटी सदस्य कॉमरेड साधना मिश्रा ने पेश किया, जिसे सर्वसम्मति से पास किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत पार्टी के संस्थापक महान मार्क्सवादी दार्शनिक व चिंतक शिवदास घोष पर रचित गीत से हुई तथा समापन अन्तर्राष्ट्रीय गीत से हुआ। मंच पर पार्टी राज्य कमिटी के सभी सदस्य मौजूद थे।

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