12/10/2025
आज ही के दिन 20 वर्ष पूर्व भारत में सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) लागू हुआ था. यह कानून आम नागरिक को अधिकार देता है कि वह किसी भी सरकारी विभाग या संस्था से जानकारी मांग सके- चाहे वह योजनाओं के खर्च की हो, किसी अधिकारी के निर्णय की, या किसी फाइल की स्थिति की.
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1) के तहत सूचना का अधिकार, नागरिकों के लिए एक मौलिक अधिकार है. यह निर्णय भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने श्री कुलवाल बनाम जयपुर नगर निगम के मामले में दिया था. शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 19 के अंतर्गत प्रदत्त अभिव्यक्ति और वाक् स्वतंत्रता में स्पष्ट रूप से सूचना का अधिकार निहित है.
सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम का प्रारंभिक वादा धुंधला हो रहा है. 30 जून 2024 तक, देश भर के 29 सूचना आयोगों में 4.05 लाख से अधिक अपीलें और शिकायतें लंबित थीं. कई राज्यों में, आयोग वर्षों से नेतृत्वहीन है, जिससे कानून द्वारा निर्धारित 30-दिवसीय समय सीमा लगभग निरर्थक साबित हो रही है.
2005 से, 74 से ज़्यादा आरटीआई कार्यकर्ता मारे जा चुके हैं और कई अन्य को धमकियों या हमलों का सामना करना पड़ रहा है. भ्रष्टाचार को उजागर करने के उनके प्रयासों को अक्सर क्रूर प्रतिशोध का सामना करना पड़ा है.
आरटीआई कानून स्वतंत्र भारत में सबसे सशक्त कानूनों में से एक रहा है. देश भर में हर साल लगभग 60 लाख सूचना अनुरोध दायर किए जाते हैं. इस कानून का इस्तेमाल लोगों द्वारा व्यापक रूप से विभिन्न मुद्दों पर सरकारों को जवाबदेह ठहराने के लिए किया गया है. बुनियादी अधिकारों के वितरण से लेकर सर्वोच्च अधिकारियों के प्रदर्शन, आचरण और कार्यप्रणाली तक ।