15/05/2026
माननीय उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री श्री प्रेमचंद बैरवा जी ने कल राजस्थान रोडवेज बस में सफर कर जनता के बीच एक संदेश देने का प्रयास किया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की “पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाओ, ईंधन बचाओ” अपील का समर्थन करना निश्चित रूप से सराहनीय पहल है।
लेकिन एक आम यात्री होने के नाते कुछ सवाल भी हैं, जिनका जवाब शायद राजस्थान की जनता जानना चाहती है।
जिस बस में माननीय मंत्री जी यात्रा कर रहे थे, वह बस पहले से ही क्षमता से कहीं अधिक भरी हुई थी। लगभग 47 सीटों वाली बस में 80-90 तक सवारियां मौजूद थीं, दर्जनों लोग खड़े होकर सफर कर रहे थे। रोज़ मजदूरी करने वाला व्यक्ति, पढ़ाई के लिए आने-जाने वाला विद्यार्थी, छोटे व्यापारी—ये सब लोग इसी तरह हर दिन सफर करने को मजबूर हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कुछ समय पहले कम यात्री भार वाली बस के परिचालक को ओवरलोडिंग पर सख्त फटकार लगाई गई थी, तो कल उसी नियम का पालन मंत्री जी की मौजूदगी में क्यों नहीं हुआ?
क्या नियम सिर्फ कर्मचारियों के लिए हैं?
क्या जनता की मजबूरी को सिर्फ कैमरे के सामने महसूस किया जाएगा?
अगर साथ चल रहे नेता, प्रशासनिक अधिकारी, बॉडीगार्ड और स्टाफ में से कुछ लोग अपनी सीट छोड़कर आम यात्रियों को बैठने देते, तो शायद यह संदेश और भी मजबूत बनता कि “जनसेवा” सिर्फ शब्द नहीं, संवेदना भी है।
राजस्थान रोडवेज की असली तस्वीर एक दिन के प्रतीकात्मक सफर से नहीं, बल्कि उन हजारों यात्रियों से समझी जा सकती है जो रोज़ घंटों खड़े होकर यात्रा करते हैं।
जरूरत सिर्फ फोटो और पोस्ट की नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था की है जहां आम आदमी को सम्मानपूर्वक यात्रा मिल सके।
माननीय उपमुख्यमंत्री जी,
यदि आप सच में रोडवेज की समस्याओं को जमीनी स्तर पर समझना चाहते हैं, तो बिना किसी प्रोटोकॉल, बिना आरक्षित सीट और बिना सुरक्षा घेरे के कभी सुबह-शाम आम यात्रियों के बीच सफर करके देखिए…
शायद तब राजस्थान रोडवेज की असली स्थिति और जनता की तकलीफ दोनों साफ दिखाई देंगी।
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